कोरोनावायरस: 11 देशों में असर; वर्ल्ड इकोनाॅमी को खतरा, 2003 में सार्स से हुआ था 3.55 लाख करोड़ रु का नुकसान

2 वर्ष पहले
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फोटो चीन के बीजिंग की है। यहां लॉन्गटन पार्क में नए साल का जश्न मनाया जाना था, कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे के बीच इसे रद्द कर दिया गया। - Dainik Bhaskar
फोटो चीन के बीजिंग की है। यहां लॉन्गटन पार्क में नए साल का जश्न मनाया जाना था, कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे के बीच इसे रद्द कर दिया गया।
  • चीन के18 शहरों में ट्रैवल बैन, 5.60 करोड़ लोग घरों में फंसे, शेयर मार्केट में 5% गिरावट
  • कोरोना से अब तक 56 मौतें, 1600 से ज्यादा संक्रमित, इस वायरस के खतरे पर रिपोर्ट

द इकोनॉमिस्ट (विशेष अनुबंध के तहत सिर्फ भास्कर में). चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्सर अधिकारियों को अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली अप्रत्याशित घटनाओं से सचेत रहने की चेतावनी देते हैं। लोग अक्सर अनुमान लगाते हैं कि उनका मतलब बैंकों में गड़बड़ी या व्यापार में तनाव से संबंधित होगा। लेकिन इस बार यह अलग मामला था। चीन जानलेवा कोरोनावायरस से पीड़ित है। यह संक्रमण चीन में 17 साल पहले फैली बीमारी सार्स से सैकड़ों मौतों की काली याद को ताजा करता है। इससे चीन की विकास दर लगभग ठप पड़ गई थी।


दिसंबर 2019 के अंत में कोरोनावायरस के सामने आने के बाद से अब तक यह खतरा 11 देशों में पहुंच चुका है। वायरस से प्रभावित मरीज अमेरिका, जापान, दक्षिण काेरिया और थाईलैंड में भी पाए जा चुके हैं।2002 से 2003 के बीच सार्स वायरस से चीन और अन्य देशों में 8 हजार से ज्यादा लोग पीड़ित हुए थे। इनमें से 10% की मौत हुई थी। 2003 में चीन की विकास दर 12.5 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी ही रह गई थी। हालांकि, 2003 की तुलना में चीन आज ज्यादा गतिशील है। लगभग 4 लाख 50 हजार लोग रोज वुहान की राजधानी हुबेई से यात्रा करते हैं।


2018 में दो लाख पांच हजार लोगों ने रोज चीन से दूसरे मुल्कों के लिए उड़ान भरी। यह सार्स के दिनों से छह गुना अधिक है। 2003 के मुकाबले आज चीन की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है। उस दौर में निर्यात 35 फीसदी तक बढ़ गया था। 2019 में निर्यात की वृद्धि दर केवल 0.5 फीसदी रही। कोरोना का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर भी देखा जा रहा है। इसके फैलने की खबर से चीनी शेयर बाजार में  5 फीसदी की गिरावट आई है। सार्स के दौरान हॉन्गकॉन्ग का सूचकांक 20 फीसदी गिरा था। सार्स के समय सर्विस सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।  यह जीडीपी का 40 फीसदी था, आज यह 50 फीसदी है।

कोरोनावायरस: वो सब कुछ जो आपको जानना चाहिए 

यह वायरस है क्या ?: यहां जिस खतरे की बात हो रही है। उसका नाम है- नोवेल कोरोनावायरस। दरअसल, कोरोनावायरस अकेला वायरस नहीं है। यह कई वायरस का समूह है। बाकी अन्य वायरस की तरह यह भी जानवरों से फैलता है। शुरुआत में जो भी संक्रमित सामने आए, वे सभी वुहान के सी फूड मार्केट में या तो काम करते थे, या वहां से अक्सर खरीदारी करते थे। कोरोनावायरस के दूसरे प्रकार पहले तबाही मचा चुके हैं। जैसे- सार्स। सार्स यानी सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम। यह 2002-2003 में फैला था। इससे आठ हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे। साढ़े सात सौ से ज्यादा जानें गई थीं। वहीं मर्स यानी मिडिल ईस्टर्न रेस्पिरेटरी सिंड्रोम की मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण की दर कम थी। लेकिन जान जाने की दर बहुत ज्यादा थी। ढाई हजार संक्रमित लोगों में से 35 फीसदी की मौत हो गई थी।

इसके लक्षण क्या हैं?: वायरस से निमोनिया होता है। कफ, बुखार और सांस लेने में तकलीफ शुरुआती लक्षण हैं। 

कितना खतरनाक है?: निमोनिया के बाद मरीज की स्थिति ऑर्गन फेलियर तक जा सकती है। चूंकि, यह वायरल निमोनिया है, ऐसे में इसके खिलाफ एंटी-बायोटिक्स बेकार हैं। एंटी-वायरल ड्रग्स का भी कोई असर नहीं होगा। अस्पताल में भर्ती कराने की स्थिति में लंग्स और बाकी ऑर्गन्स को सपोर्ट सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है। रिकवरी कब, कैसे होगी, यह सिर्फ इम्यून सिस्टम पर निर्भर करता है। जिनकी मौतें हुई हैं, उनमें अधिकतर का इम्यून सिस्टम कमजोर था। कुल मिलाकर कहें तो अभी इसके खिलाफ कोई सटीक और समुचित उपचार की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

कितने देशों में पहुंच?: चीन सहित 11 देशों में अभी तक संक्रमित लोग सामने आ चुके हैं। संक्रमितों की सर्वाधिक संख्या चीन में है। लेकिन दुनियाभर में ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। चीन के अलावा अन्य देशों की स्थिति इस लिस्ट में देखिए।

भारत की क्या स्थिति है?: देश में 11 संदिग्ध जरूर मिले हैं। सौ से ज्यादा लोगों को निगरानी में रखा गया है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई सहित कुल 14 एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी किया गया है। 7 एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था शुरू की गई है । चीन और हॉन्गकॉन्ग से भारत आने वाले लोगों की जांच की जा रही है। लगभग 17 साल पहले भी सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा पैदा हो गया था।

चीन में भारतीय किस स्थिति में हैं?
पहली मरीज: प
्रीति माहेश्वरी को चाहिए 1 करोड़ रु.: एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- चीन के शेनझेन में प्रीति पहली भारतीय हैं, जो कोरोनावायरस से ग्रस्त पाई गई हैं। जैसे-जैसे चीन में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका इलाज महंगा होता जा रहा है। इलाज की दर अभी 10 लाख चीनी युआन पड़ रही है। यानी भारतीय मुद्रा में करीब एक करोड़ रुपए।  प्रीति कोरोनावायरस टाइप-1 से ग्रस्त हैं। उन्हें मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम और सेप्टिक शॉक की शिकायत है। वे वेंटिलेटर पर हैं। उनका डायलिसिस और ब्लड प्योरिफिकेशन प्रोसेस चल रहा है। प्रीति के परिवार ने मदद के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क किया है। दूतावास ने भी चीन में रह रहे भारतीयों से संपर्क के लिए दो हॉटलाइन +8618612083629 और +8618612083617 शुरू की हैं।

चीन के शेनझेन में प्रीति पहली भारतीय हैं, जो कोरोना वायरस से ग्रस्त पाई गई हैं। वे वेंटिलेटर पर हैं।
चीन के शेनझेन में प्रीति पहली भारतीय हैं, जो कोरोना वायरस से ग्रस्त पाई गई हैं। वे वेंटिलेटर पर हैं।

इकोनॉमी पर असर

  • 2003 में सार्स का खतरा सामने आया। इससे 50 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। यानी करीब 3.55 लाख करोड़ रुपए। सार्स से ही सबक मिला था, कि कोई वायरस किस तरह इकोनॉमी को प्रभावित कर सकता है। मई 2003 में चीन में यात्रियों की संख्या 2002 के मुकाबले 40 फीसदी तक घट गई थी। स्विस बैंक यूबीएस के अनुसार विकास दर 12.5 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी रह गई थी।
  • इसी तरह 2014-2016 के दौरान इबोला की वजह से गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियाेन जैसे देशों को 2.2 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
  • वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार-फ्लू जैसे क्रॉस बॉर्डर आउटब्रेक्स की वजह से एक सदी पूर्व पांच करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इससे स्वास्थ्य को तो नुकसान हुआ ही। आर्थिक तौर पर भी घाटा हुआ। इन्हें आर्थिक नुकसान के तौर पर देखा जाए तो यह आंकड़ा 570 अरब डॉलर तक जाएगा।

चीनी नववर्ष का उत्साह फीका हुआ वायरस से
एक करोड़ से अधिक आबादी वाला वुहान चीन का सातवां सबसे बड़ा शहर और एक प्रमुख परिवहन केंद्र है। यहीं पर कोरोनावायरस का पहला केस मिला। अब 18 शहरों में ट्रैवल बैन लगाया जा चुका है। लॉक डाउन में 5.60 करोड़ लोग फंसे हुए हैं। वुहान शहर में पर्यटकों को रोका हुआ है। 14 दिन की मेडिकल ऑब्जर्वेशन के बाद ही ये लोग होटल छोड़ सकते हैं। कोरोना आउटब्रेक के बाद चीन का शेयर मार्केट 5 फीसदी गिर गया था। चीन में अभी नववर्ष का उत्सव वायरस की वजह से फीका पड़ गया है। लोगों को घर से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है। ऐसे में नए साल के सारे आयोजन रद्द कर दिए गए हैं।

चीन से फैलने वाला यह तीसरा बड़ा वायरस
बर्ड फ्लू: 1996 में पहली बार चीन से फैला। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2003 से लेकर अब तक लगभग 440 लोगोंं की मौत बर्ड फ्लू से हो चुकी है।
इबोला: 2014 से 2016 के बीच फैले इस वायरस से अकेले पश्चिमी अफ्रीका में ही 11,316 लोगों की मौत हुई थी। वहीं दुनिया के अन्य हिस्सों में 1597 लोगों ने वायरस के चलते जान गंवाई।
सार्स: 2003 में दक्षिणी चीन से निकले इस वायरस ने 26 देशों के 8000 लोगों को प्रभावित किया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में इस वायरस से 774 लोगों की मौत हुई।
मर्स: सितंबर 2012 से अब तक 27 देशों में इसका प्रकोप रहा है। 2494 लोग संक्रमित हुए। आठ सौ से ज्यादा मौतें हुई। 
स्वाइन फ्लू: 2009 में सामने आया। 2016 में भारत में सर्वाधिक मौतें हुईं। कुल 2,992 मौतें इससे हुईं।

भास्कर एक्सपर्ट

एंटीबायोटिक भी बेअसर साबित हो रही हैं, कोई समुचित इलाज नहीं है...
कोरोनावायरस के संबंध में सबसे खराब बात यह ह
ै कि फिलहाल इसका कोई इलाज दुनिया में कहीं पर नहीं है। यह वायरस इतना  खतरनाक है कि इस पर किसी भी एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता है। ऐसे मेंं व्यक्ति के इसके चपेट में आने पर उसे बचाने के लिए डाॅक्टर्स बहुत कुछ नहीं कर सकते। ऐसा मामला सामने आने पर सबसे पहले आइसोलेट करना जरूरी है। ताकि संक्रमण को रोका जा सके। अच्छी बात यह है कि अभी तक देश में कोई केस पॉजिटिव नहीं आया है। जो संदिग्ध सामने आए हैं, उनमें अभी तक कोराेना की पुष्टि नहीं हुई है।
- डॉ. संदीप नायर, डायरेक्टर एवं एचओडी, चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी डिज़ीज, बीएलके सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली



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