करंट इश्यू / हर मुकदमे में मध्यस्थता की सीजेआई की सलाह अहम

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अरविंद बोबड़े सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अरविंद बोबड़े
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अरविंद बोबड़ेसुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अरविंद बोबड़े

दैनिक भास्कर

Dec 11, 2019, 04:46 AM IST

राष्ट्रपति, कानूनमंत्री और तमाम न्यायमूर्तियों की मौजूदगी में भारत के नए मुख्य न्यायाधीश  (सीजेआई) ने न्याय में देरी की समस्या के सार्थक समाधान के लिए एक नई सलाह दी। अवसर था जोधपुर में हाईकोर्ट के नए भवन के उद्घाटन का।

सीजेआई ने सलाह दी कि ‘हर मुकदमे को अदालत जाने से पहले मध्यस्थता की प्रक्रिया से गुजरा जाए और इसके लिए प्रत्येक जिले की सभी अदालतों में संस्थाएं और साधन विकसित किए जाएं और साथ ही इस मध्यस्थता से उभरे निष्कर्ष को अदालती फैसले के समान ताकत प्रदान की जाए।

अगर हम ऐसा कर सकें तो हमेशा के लिए बढ़ते मुकदमों की समस्या का कारगर निदान हो सकता है’। उनसे पहले कानूनमंत्री ने कहा था कि ‘देश की महिलाएं आज चीख-चीखकर न्याय मांग रही हैं और मैं सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करूंगा कि ऐसे अवसर की गंभीरता को संज्ञान में ले’। भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह इसी संदर्भ में थी।

पश्चिमी दुनिया के अधिकतर देशों में न्यायपालिका में यह प्रक्रिया काफी तेजी से फैली है और मध्यस्थता के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाती हैं जो दोनों पक्षों को समझाते हैं और अधिकांश मुद्दे उसी स्तर पर ख़त्म हो जाते हैं। बाबरी मस्जिद -राम मंदिर जैसे जटिल विवाद में भी सर्वोच्च न्यायालय ने इसका प्रयोग किया था और वह काफी हद तक सफल भी रहा।

दरअसल, पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी कि हाईकोर्ट के 100 जजों की नियुक्ति के मामले में कॉलेजियम द्वारा नामों को दोबारा भेजने के बावजूद सरकार ने नियुक्ति-पत्र जारी नहीं किया है।

उधर, कानूनमंत्री ने दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद एक कार्यक्रम में कहा कि ‘सरकार रबर स्टाम्प नहीं है’। विगत सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि हत्या व बलात्कार के कितने मुजरिमों को सरकार ने सजा का समय पूरा होने के पहले छोड़ा तो सरकार के वकील का जवाब था ‘कुल 1544 सजायाफ्ता छोड़े गए’।

भारत के कानूनी मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के वक्तव्य से लगता है कि बलात्कार का दोष भी न्यायपालिका पर मढ़ने की कोशिश हो रही है। जबकि सीजेआई की सलाह पर सरकार गौर कर कानून बनाए तो समस्या का निदान संभव है।

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