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करंट इश्यू / शिक्षित और संभ्रांत वर्ग की डरावनी अनैतिकता

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

दैनिक भास्कर

Jan 29, 2020, 12:04 AM IST

पिछले पांच महीने के रिकॉर्ड को देखें तो भारत से हर 10 मिनट पर एक बाल यौन शोषण का पोर्न वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों से यह हो रहा है वे देश के बड़े और संपन्न शहर हैं। इनमें सबसे आगे राजधानी दिल्ली है। मुंबई, पुणे के अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल के बड़े शहर भी पीछे नहीं हैं।

अमेरिका की एक जानी-मानी स्वयंसेवी संस्था ने खोए और शोषित बच्चों के कल्याण के लिए बने राष्ट्रीय केंद्र (एनसीएमईसी) से ऐसे वीडियो और आंकड़ों को ट्रैक कर साझा किया। एनसीएमईसी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को हाल ही में यह जानकारी दी। इस तरह के वीडियो बनाने और अपलोड करने में अव्वल दिल्ली की शिक्षा दर और प्रति व्यक्ति आय भी देश के अधिकतर संपन्न शहरों में सबसे ज्यादा है।

इससे साफ है कि यह सामाजिक मानसिक रुग्णता ग्रामीण इलाकों में नहीं है, बल्कि शिक्षित व संपन्न वर्ग में ज्यादा है। अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच महीने में कुल 25000 बाल यौन शोषण के वीडियो यहां से अपलोड किए गए, यानी हर 10 मिनट पर एक।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि केंद्र व राज्यों की पुलिस, साइबर क्राइम का बड़ा अमला, सोशल मीडिया पर मौजूद इतने बड़े अपराध से अभी तक इतना अनभिज्ञ कैसे है? देश के बड़े शहरों में यह सब हो रहा है, लेकिन यह जानकारी अमेरिका में बैठी स्वयंसेवी संस्था दे रही है।

सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि ये वीडियो खुलेआम सोशल साइट्स पर हैं, बल्कि डर यह सोचकर लगता है कि इस अपराध में लगे लोग किस तरह बच्चों को गायब करते हैं या कैसे उन्हें गरीबों के घर से ले जाते हैं। एनसीआरबी के पास उपलब्ध आंकड़ों से भी साफ है कि गरीबों के बच्चों के गायब होने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं।

फिर जो राज्य सरकारें अपनी पुलिस के अधिकारों के लिए केंद्र से लड़ती हैं, वे इस अमानवीय बाल यौन शोषण से अनभिज्ञ क्यों हैं?  बाल यौन शोषण (पीडोफीलिया) एक मानसिक बीमारी है। सवाल है कि क्या शिक्षा और संपन्नता इस बीमारी को बढ़ाती है? आज इसके निदान के लिए क्या एक राष्ट्रीय चेतना जगाने की जरूरत नहीं है? 

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