संपादकीय / कागज के साथ अब दिल से भी हटाना होगा 370



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Dainik Bhaskar

Aug 09, 2019, 12:27 AM IST

नरेंद्र मोदी से कश्मीर या भारत ही नहीं, पूरी दुनिया जानना चाहती थी कि इस राज्य से संविधान के अनुच्छेद 370 के हटने के बाद अब आगे क्या। दरअसल, 370 कागज पर तो हट गया है पर क्या कश्मीरियों के दिलों से यह रातोंरात हटाया जा सकता है या इसके लिए एक लंबा समय चाहिए?  कोशिश की जा रही है कि जुमे को अघोषित कर्फ्यू में ढील दी जाए, ताकि नमाज अदा हो सके। इस समय धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगाए हैं और आगे ईद भी है। एक ओर सरकार के लिए चुनौती है शांति बहाल करने की और दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए मौका है केंद्र की नई कोशिशों का स्वागत कर मुख्यधारा में आने का।

 

प्रधानमंत्री का प्रयास भी इसी  दिशा में है। यह भी बताया गया है कि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट आएगा तो इससे उद्योग लगेंगे। कृषि को नई दिशा मिलेगी। सबको रोजगार मिलेगा, जो वहां के युवाओं की आज सबसे बड़ी जरूरत है। क्यों पकड़ते हैं वे हाथ में पत्थर या बंदूक? अगर रोजगार हो तो शायद इसकी जरूरत न पड़े। मोदी का संदेश यही है कि हम तुम्हें रोजगार देंगे, तुम पत्थर और बंदूक छोड़ दो या जो पत्थर बंदूक चला रहे हैं वे उनके बहकावे में न आएं। पूरी दुनिया को भी एक मैसेज है कि देखिए भारत पूरी शिद्दत से कश्मीर से आतंकवाद और हिंसा खत्म कर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास में लगा है।

 

प्रधानमंत्री के लिए एक लिटमस टेस्ट होगा जुमे की नमाज पर मुसलमानों का व्यवहार, क्योंकि इसके बाद भारत सरकार का हौसला और बुलंद होगा, विकास को और रफ्तार मिलेगी तथा दुनिया को नया संदेश मिलेगा। कश्मीर में सोच के स्तर पर यह परिवर्तन तभी आएगा, जब वहां के लोगों को यह भरोसा हो कि केंद्र सरकार उनके कल्याण के लिए निहायत ईमानदारी से कोशिश कर रही है।

 

अगर उस इलाके में गैर-खेती जमीन को देश के उद्योगपतियों को देकर उन्हें पूंजी लगाने को कहा जाए और इस बात की गारंटी दी जाए कि उनके जान-माल की हिफाजत होगी और साथ ही सिर्फ एक शर्त रखी जाए कि उद्योगों में सृजित होने वाले रोजगार का 80% स्थानीय युवकों को मिलेगा तो क्या वहां का युवक पत्थर और बंदूक  छोड़कर कौशल विकास करके 40 हजार रुपए प्रति माह की नौकरी नहीं करेगा और तब क्या पाकिस्तान वहां आतंकवाद की पौध लगा पाएगा। शायद यही रास्ता प्रधानमंत्री मोदी ने चुना है।

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