संपादकीय / सुशासन के खोखलेपन को उजागर करतीं दो घटनाएं



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Dainik Bhaskar

Aug 27, 2019, 12:22 AM IST

देश के सबसे गरीब, विकास के पैमाने पर सबसे पीछे और भ्रष्टाचार में अव्वल राज्य बिहार से खबर आई है कि एक व्यक्ति 31 साल से दो विभागों में तीन सरकारी पदों पर नौकरी कर रहा है, वेतन पा रहा है और पदोन्नति भी हासिल करता रहा है। यह राज न खुलता तो अगले कुछ साल में रिटायर होकर वह तीनों जगह से पेंशन भी लेकर सुख -चैन की नींद सोता।

 

भला हो केंद्र की नई नीति का जिसके तहत देश के हर राज्य में सरकारी नौकरी में लगे हर व्यक्ति को आधार से लिंक कर उसका ब्योरा हासिल किया जा रहा है, जब सुरेश राम नामक इस इंजीनियर का ब्योरा लिंक पर जुड़ा तो पता चला कि इसी नाम और इसी चेहरे का व्यक्ति दो जगहों पर पंजीकृत है।

 

अन्य ब्योरे जैसे पैन कार्ड, हाईस्कूल प्रमाण-पत्र भी सामान पाए गए। तब राज खुला कि सिंचाई विभाग और निर्माण विभाग (दोनों मोटी कमाई वाले माने जाते हैं) में इस व्यक्ति ने 1988 और 1989 में नियुक्ति पाई और तब से अब तक इसकी पोस्टिंग कई बार अलग-अलग एक-दूसरे से दूर  जिलों में हुई। इस व्यक्ति के गैरकानूनी ‘टैलेंट’ से ज्यादा यह घटना इस बात की तस्दीक करती है कि दशकों से प्रशासनिक उनींदापन और भ्रष्टाचार इस राज्य को किस तरह खोखला कर रहे हैं। क्या एक व्यक्ति 100 किलोमीटर दूर के दो जिलों में एक ही समय में दो जगहों पर सारे दिन और 31 साल लगातार उपस्थित रह सकता है?

 

 

इस घटना से क्या इस राज्य में यह आरोप सिद्ध नहीं होता कि रसूखदार शिक्षक दशकों तक अपने स्कूल नहीं जाते और उनकी जगह वेतन का मात्र एक-चौथाई पैसा लेकर कोई अन्य शिक्षित बेरोजगार व्यक्ति बच्चों को पढ़ाता है (या उन नौनिहालों का भविष्य बर्बाद करता है)? क्या यह सच नहीं कि इस गोरखधंधे में हेडमास्टर से लेकर शिक्षा विभाग का पूरा अमला लिप्त है? क्या यह सच नहीं कि सजा की दर इस राज्य में सबसे कम (मात्र 8.9 प्रतिशत) है, जबकि बेहतर शासित केरल में यह 91 प्रतिशत है? अगर यही है ‘सुशासन’ दो संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम को विकास की परिभाषा बदलनी होगी।

 

शायद यही वजह है कि राज्य के हाजीपुर जिले में परित्यक्ता मां द्वारा अपनी दो बेटियों को बेचने की खबर आई, क्योंकि उसे लगा कि बच्चियों को कम से कम रोटी तो मिलेगी ही। सुरेश तो पकड़ा गया, लेकिन शायद शासन में बैठे लोगों के अपराध दशकों तक पता नहीं चल पाएंगे। 
 

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