संपादकीय / पाबंदियों को आज़ादियों की दरकार और हमारा कानून



editorial: rights of women and our laweditorial: rights of women and our law
X
editorial: rights of women and our laweditorial: rights of women and our law

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 12:11 AM IST

यह देश जिसने धार्मिक सद्भाव को अपने संविधान में जगह दी है, वहां महिलाओं की पुरुषों के साथ मस्जिदों में एंट्री से जुड़ी एक हिंदू की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यदि कोई मुसलमान इसकी मांग करेगा तो ही सुनवाई होगी।

 

धर्म पर राजनीति करने का खास शगल रखने वाला हमारा देश आज़ादी के 72 सालों बाद भी यदि औरतों के लिए हक की मांग कर रहा है तो वह है मस्जिद-मंदिरों में जाने की। मस्जिद में जाने की याचिका लगाने वाले कोई और नहीं बल्कि केरल हिंदू महासभा के लोग हैं। वही केरल जहां सबरीमाला में महिलाओं के आने का विरोध हिंदू ही कर रहे थे। वैसे, देखा जाए तो अभी सबरीमाला का विवाद बस थमा ही है, सुलझा नहीं। मंदिर दोबारा खुलते ही विवादों की फाइल भी फिर खुल जाएगी। फिर कोई महिला मंदिर में घुसने की कोशिश करेगी। फिर कोई उसे रोकेगा।

 

अफसोसजनक तो यह है कि जो महिला सबरीमाला में दर्शन कर पाई, अब उसे अपने परिवार से बेदखल कर दिया गया है। उसे जान से मारने की धमकियां मिली हैं और वह किसी शेल्टर होम में रहने को मजबूर है। हमारे देश में यह सब उसी दौरान हो रहा है, जब हज पर इस साल पहली बार 2000 से ज्यादा महिलाएं बिना किसी पुरुष रिश्तेदार के जा रही हैं। गौरतलब है कि इसी साल अकेली महिलाओं के हज पर जाने पर लगे बैन को हटाया गया है।

 

अब तक महिलाएं किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ ही हज पर जा पाती थीं। यह वह देश है जो हज पर अकेले जाने की पाबंदियों को हटाने पर खुश हो जाता है, जबकि ट्रिपल तलाक का मामला उठे तो अभी तक संसद में हंगामा ही होता है। क्यों देश में महिलाओं के विकास की जगह धर्म के मामलों में ही उनके हक-हुकूक अहम माने जाते हैं।

 

क्यों नहीं हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि देश की महिलाओं को धार्मिक हक से पहले उसके स्वास्थ्य से जुड़े हक मिलने चाहिए, संघर्ष पहले उन्हें भरपूर पोषण और बेहतर इलाज के लिए होना चाहिए। धार्मिक आजादी थोड़ी कम भी मिली तो क्या, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं कम मिलने से उसकी जान को खतरा है। यह हमारी राजनीति कब समझेगी? वरना हमारा ही देश है जहां नुसरत ने मांग भरी और मंगलसूत्र पहन लिया तो मसला बन गया। राजनीति की कहानियां इसी सिंदूर जैसे लाल रंग से कही जाने लगीं, गुस्से और वैमनस्य से लबरेज।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना