एक्सपर्ट व्यू / 2022 की तैयारी के लिए 2019 में रियल एस्टेट को तेजी देगा ई-कॉमर्स का विस्तार

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 05:24 PM IST


Expansion of e-commerce this year will boost real estate
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Expansion of e-commerce this year will boost real estate
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  • 2022 तक सबके लिए आवास के विज़न के कारण रियल एस्टेट पर खास फोकस होगा

वर्ष 2022 में स्वतंत्रता की 75वीं सालगिरह होगी और तब देश जी-20 के शिखर सम्मेलन का मेजबान भी होगा। यह न्यू इंडिया को दुनिया के सामने पेश करने का महत्वपूर्ण मौका होगा। इसमें 2022 तक सबके लिए आवास के विज़न के कारण रियल एस्टेट पर खास फोकस होगा।

 

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8.2 फीसदी की चार साल की सबसे ऊंची दर से वृद्धि करने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में धीमी पड़कर 7.1 फीसदी से बढ़ी। इसमें रियल एस्टेट का बहुत महत्व है, क्योंकि 2017 में अर्थव्यवस्था में इसका योगदान 6 से 7 फीसदी रहा और 2025 तक इसका योगदान 13 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2025 तक यह सेक्टर 650 अरब डॉलर का हो जाएगा और 2028 आते-आते 850 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। 


विदेशी निवेश की दृष्टि से देखें तो वैश्विक रैंकिंग में लगातार सुधार से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और निर्माणाधीन इन्वेस्टमेंट ग्रेड रियल एस्टेट का मूल्य 2012 की चौथी तिमाही के 174 अरब डॉलर से बढ़कर 2018 की दूसरी तिमाही में 243 अरब डॉलर हो गया है।

 

सेक्टर की वृद्धि में रहवासी, व्यावसायिक और रिटेल ये तीन मुख्य असेट क्लास हैं, जो मुख्य रूप से योगदान दे रही हैं। देश के कुल रियल एस्टेट विकास में रहवासी सेगमेंट का योगदान करीब 80 फीसदी है। नए साल में स्टार्टअप और ई-कॉमर्स के कारण व्यावसायिक रियल एस्टेट के क्षेत्र में ग्रेड ए ऑफिस स्पेस के लिए बहुत संभावनाएं हैं। कुल ऑफिस स्पेस मार्केट 75 अरब डॉलर का है। इसमें से 30 अरब डॉलर का बाजार रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) के जरिये दोहन के लिए मिल सकता है। इसी तरह रिटेल मॉल्स में भी 16 अरब डॉलर मूल्य का स्पेस मार्केट है। इसमें भी  5 अरब डॉलर का मार्केट आरईआईटी के जरिये दोहन के लिए उपलब्ध हो सकता है।


आईटी पार्क भी रियल एस्टेट की वृद्धि में योगदान देंगे। निवेशकों में खरीदने की बजाय कमर्शियल स्पेस किराए पर लेने का रुझान रेंटल्स सेक्टर की वृद्धि का प्रमुख कारक होगा। मेट्रो शहरों में शैक्षिक संस्थानों की बढ़ती संख्या के कारण स्टुडेंट हाउसिंग में तेजी आएगी, जिस पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। वेयरहाउसिंग भी ऐसा सेक्टर है, जिसमें मांग में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है।

 

इसके पीछे  ई-कॉमर्स में हो रहा विस्तार है। अब एफडीआई नीति को उदार बनाए जाने के बाद नए साल में वेयरहाउसिंग इंडस्ट्री में मांग और भी बढ़ेगी। नए साल में रियल एस्टेट (रेग्यूलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट और जीएसटी कानूनों के फायदे मिलने लगेंगे और स्थिति काफी कुछ स्थिर हो जाएगी। इससे आवासों की बिक्री में तेजी और नए प्रोजेक्ट लॉन्च होने शुरू हो गए है। जैसा कि हमने पिछले माह की समीक्षा में देखा था, गैर-बैंकिंग फाइनेंशिल कंपनियों में नकदी का मुद्दा समस्या बना हुआ है। उम्मीद तो है कि इस साल के उत्तरार्द्ध में यह समस्या सुलझ जाएगी।

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