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महाभारत-2019 / नागरिकता साबित नहीं कर सके बांग्लादेशियों को मिल सकता है कामगार का दर्जा



mahabharat 2019 Government will provide relief to Bangladeshi
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mahabharat 2019 Government will provide relief to Bangladeshi
  • केंद्र सरकार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स से बाहर हुए लोगों को बड़ी राहत देने की रणनीति बना रही
  • जो नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे, सरकार उन्हें वर्क परमिट जारी कर देश निकाला से बचने का रास्ता मुहैया कराएगी

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2018, 07:17 AM IST

संतोष कुमार, नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि के मद्देनजर केंद्र सरकार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (एनआरसी) से बाहर हुए बंग्लादेशियों/लोगाें को बड़ी राहत देने की रणनीति बना रही है। रजिस्टर से बाहर हुए जो लोग नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे, सरकार उन्हें वर्क परमिट जारी कर देश निकाला से बचने का रास्ता मुहैया कराएगी। लिस्ट में मुस्लिमों के साथ 13 लाख हिंदू भी हैं, जिनकी नाराजगी लोकसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।

 

शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है कि एनआरसी में नहीं आने वाले लोगों को एक झटके में अधिकार छीनकर वापस भेज दिया गया तो मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी छवि कमजोर होगी, क्योंकि उन्हें हाल ही में सिओल पीस प्राइज मिला है। बांग्लादेश से बॉर्डर एग्रीमेंट के जरिए बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश भी हुई है। आतंकवाद के खिलाफ विश्व में उन्होंने आवाज बुलंद की है। ऐसे में कई दशक से भारत को अपना घर बना चुके लोगों पर कार्रवाई होती है तो संदेश जाएगा कि भाजपा की वैचारिक कट्‌टरता के कारण मोदी सरकार ने इतना सख्त कदम उठाया है।

 
सूत्रों के मुताबिक एनआरसी में बाहर छूटे 40 लाख लोगों में से 27 लाख मुस्लिम और 13 लाख हिंदू हैं। लेकिन अंतिम सूची में एनआरसी में 10 लाख का आंकड़ा और जुड़ सकता है। अगर बाकी 30 लाख लोग विदेशी घोषित होते हैं तो भी उनके पास विदेशी ट्रिब्यूनल में जाने का अधिकार होगा। अभी यह मसला बेहद पेचीदा है, क्योंकि दशकों से रह रहे लोगों के पास जमीन, घर, राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसी सुविधाएं हैं। किस नियम के तहत उनकी इन चीजों को कब्जे में लिया जाएगा और उसका क्या होगा, इन पेचीदगियों पर तस्वीर साफ नहीं है।

 

यही वजह है कि वोटर लिस्ट से घुसपैठियों के नाम तत्काल नहीं कट पाएंगे, लेकिन मसले पर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण जरूर होगा लेकिन हिंदू वोटर के प्रभावित होने से असम के पड़ोसी राज्य प. बंगाल में भाजपा की सीटें बढ़ाने की मंशा पर पानी फिर सकता है। एनआरसी तैयार करने में परोक्ष रूप से जुड़े भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चूंकि लिस्ट में मुस्लिम-हिंदू दोनों हैं और सबको वापस भेजना पड़ा तो असम की तीन लोकसभा सीटों और करीब 22 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम प्रभाव पहले से भी ज्यादा हो जाएगा। गृह-मंत्रालय ने घुसपैठियों के मामले के विशेषज्ञ संजोय हजारिका के सुझाव पर प्रस्ताव तैयार किया है।

 

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने प्रस्ताव को पीएमओ से साझा भी किया है। प्रस्ताव के मुताबिक 40 लाख से अधिक लोग जो रजिस्टर से बाहर हैं उनमें से ज्यादातर अपनी नागरिकता के लिए संबंधित दस्तावेज जमा कर चुके हैं। इसके बावजूद अनुमान है कि लगभग 5 से 7 लाख लोग अपनी नागकिरता साबित करने से वंचित रह सकते हैं।  वर्क परमिट व्यक्तिगत रूप से जारी नहीं कर समूह में जारी किया जाएगा। समूह में 10 से 20 लोगों को रखने का प्रस्ताव है। समूह में ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा, जो असम में किसी जगह एक साथ काम कर रहे हैं।

 

काम करने वाले लेबर भी हो सकते हैं और खुद का व्यवसाय करने वाले भी। हालांकि वर्क परमिट जारी करने से पहले ऐसे लोगों के बारे में स्थानीय पुलिस से पता किया जाएगा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है। आपराधिक रिकॉर्ड वालों को डिपोर्ट किया जा सकता है। 


गृह-मंत्रालय के एक आला अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक संजोय हजारिका की सिफारिश के मुताबिक बहुत से घुसपैठिये ऐसे हैं जो सिर्फ रोजगार की तलाश में आए हैं। इन्हें वर्क परमिट जारी करने में दिक्कत नहीं है। हालांकि वर्क परमिट पाने वाले नागरिकों को घर या संपत्ति खरीदने और वोट देने का अधिकार नहीं होगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जो भारत के नागरिक नहीं हैं वह अपनी ओर से पहल कर संबंधित जिले के रजिस्ट्रार ऑफिस में आवेदन करें कि वह भारत के नागरिक नहीं है और उन्हंे वर्क परमिट जारी किया जाए।

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