सेकंड आर्टिकल / अब बुनियादी बाजार सुधारों से खेती के संकट का समाधान

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 12:52 PM IST



solution to the crisis of farming with basic market reforms
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solution to the crisis of farming with basic market reforms
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  • कीमतों में अस्थिरता आज किसान की सबसे बड़ी चिंता है

जब हम किसानों को उपज को सड़कों पर फेंकते देखते हैं तो हममें से कई सोचते हैं कि किसान किसी तरह का सरकारी पैकेज चाहते हैं ताकि वे संकट से उबर सकंे। लेकिन जमीनी स्थिति एकदम अलग हो सकती है। कीमतों में अस्थिरता आज किसान की सबसे बड़ी चिंता है। प्राय: उन्हें उपज की लागत भी नहीं मिल पाती।

 

हर साल भारत में 5 करोड़ टन आलू का उत्पादन होता है। आलू उगाने का क्षेत्र 2016-17 से 2017-18 में 11.74 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 17.86 लाख हैक्टेयर हो गया है। यह संबंधित वर्षों में रबी फसलों का क्षेत्र 10.3 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 15.7 लाख हैक्टेयर होने का नतीजा है। रबी फसलों में आलू अधिक होने से दिसंबर-जनवरी में कीमत गिर जाती है। आलू की बुवाई खरीफ में स्थानांतरित करना समस्या का एक समाधान हो सकता है। लेकिन, 2017-18 में मध्य प्रदेश और कर्नाटक में आलू का रकबा मानसून में देरी के कारण क्रमश: 11 और 16 फीसदी गिरा है। यही पर संरचनात्मक सुधार आते हैं। जलसंकट से निपटने के लिए हाइड्रोजेल जैसी टेक्नोलॉजी में समाधान खोजा जा रहा है। यह लंबे समय तक पानी व पोषक तत्वों को अवशोषित करके रख सकता है और पौधे को जलसंकट से निपटने में मदद कर सकता है।


फसलों के चरम सीजन में बुनियादी ढांचा एक और मुद्‌दा बन जाता है। उपज खाली करने के लिए ट्रकों की लंबी कतार, मजदूरों की उपलब्धता, एप्रोच रोड का बंद होना आदि बाजार व्यवस्था की खामियां हैं। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक आंशिक रूप से शहरी थोक रिटेल बाजार में प्रति वर्ग मीटर स्थान में 10-15 मीट्रिक टन उपज हैंडल करने की क्षमता होनी चाहिए। हमारे यहां वास्तविकता इस मानक से बहुत नीचे है। कृषि संकट के समाधान में अब बुनियादी ढांचे के इन पहलुओं पर विचार हो रहा है।


इजरायल द्वारा कृषि में किए इनोवेशन को अपनाने की पहल हो रही है। इजरायल ने समुद्री जल से नमक निकालने और पानी की रिसाइक्लिंग संबंधी टेक्नोलॉजी पर बहुत निवेश किया है। मानसून के देरी से आने और शुष्क जमीन के दोहन में इससे मदद मिल सकती है। इजरायल ने आलू के लिए सुनियोजित ढंग से निर्यात बाजार खड़ा किया है। अभी यह आलू की 40 फीसदी उपज निर्यात कर देता है, जबकि भारत आलू की उपज का बहुत छोटा हिस्सा श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, सेशल्स जैसे देशों को भेजता है। हाल ही में केंद्र सरकार ने भारत से कृषि उत्पादों के निर्यात के नियमों में बदलाव किया है। इससे मध्य-पूर्व के देशों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उनके साथ व्यापार में बढ़ोतरी होगी। आलू के निर्यात को लेकर इसी तरह की सुविचारित रणनीतियों पर आगे विचार चल रहा है, जिससे घेरलू बाजार पर दबाव कम होगा।

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