करंट इश्यू / सवाल युद्ध के भय का नहीं मानव सोच के पतन का है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प - फाइल फोटो। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प - फाइल फोटो।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प - फाइल फोटो।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प - फाइल फोटो।

दैनिक भास्कर

Jan 09, 2020, 12:19 AM IST

1973 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने कहा था, ‘मैं अपने कार्यालय जाकर केवल एक फोन उठाऊंगा और अगले 25 मिनट में सात करोड़ लोग मर चुके होंगे।’ करीब 47 साल बाद वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया है, ‘अमेरिका ने हाल ही में दो ट्रिलियन डॉलर (भारत के आठ साल के बजट के बराबर) खर्च कर दुनिया के बेहतरीन हथियार लिए हैं और अगर ईरान कोई दुस्साहस करता है तो कुछ ब्रांड न्यू और खूबसूरत हथियार बिना किसी हिचक के भेज देंगे।’

आज कोई एक ट्रम्प विश्व-शांति को खतरे में डालने जा रहा है। भारत में डर से सेंसेक्स एक दिन में करीब 800 पॉइंट गिर जाता है। हजारों साल पहले हम जंगल से निकले, मैदान में खेती की, जानवर की सवारी से सुपरसोनिक जहाज तक आए, शिक्षा ली, नैतिक मूल्यों और धर्म की स्थापना की, समाज-व्यवस्था के लिए कानून और राज्य बनाया। ऐसा लगा कि समय के साथ केवल मानव ही एक ऐसा प्राणी है, जो दुनिया का वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी बेहतर बनाता है।

समाजशास्त्र मानता है कि इसी योग्यता के कारण हम वापस आदिम सभ्यता की ओर नहीं जाएंगे, क्योंकि हमने बेंजामिन फ्रेंक्लिन पैदा किया, जिन्होंने बिजली का आविष्कार किया और हमने गांधी पैदा किया, जिन्होंने विश्व शांति में अहिंसा की एक नई सीख दी।

लेकिन, 25 वर्ष के ही अंतराल के बाद हम दो विश्व युद्धों में कीड़े-मकोड़ों की तरह मरने लगे और फिर एक संयुक्त राष्ट्र संघ बनाया जो दो देशों या देश समूहों के बीच विवाद सुलझता है, दुनिया में विकास करता है और मानव ही नहीं जीवमात्र के कल्याण के लिए काम करता है।

लेकिन, अब यह संस्था भी बांझ दिखाई दे रही है। आज दुनिया जिस स्थिति में है, उससे लगता है कि उत्तरोत्तर बेहतरी की सोच के साथ मनुष्य बर्बादी के तत्व भी बोता जाता है। यानी या तो जिसे हम बेहतरी कह रहे हैं, वह गलत है या फिर हमने उसके साथ अपरिहार्य रूप से विद्यमान बर्बादी के बीज को निकालने के प्रभावी संस्थागत इंतजाम नहीं किए हैं।

वरना कोई निक्सन 25 मिनट में करोड़ लोगों को मारने का अहंकार कैसे पालता या कोई ट्रम्प आज किसी देश में नरसंहार के लिए ब्रांड न्यू बर्बादी के खिलौने भेजने का घटिया ट्वीट करने की हिमाकत कैसे करता? आज मानव विकास की परिभाषा बदलनी होगी, ताकि कोई एक व्यक्ति 700 करोड़ की दुनिया के लिए खतरा न बने।  

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