करंट इश्यू / जनकल्याण की राजनीति की जीत है दिल्ली का परिणाम

मुख्यमंत्री केजरीवाल का मास्टर-स्ट्रोक था फ्री व सस्ती बिजली। मुख्यमंत्री केजरीवाल का मास्टर-स्ट्रोक था फ्री व सस्ती बिजली।
X
मुख्यमंत्री केजरीवाल का मास्टर-स्ट्रोक था फ्री व सस्ती बिजली।मुख्यमंत्री केजरीवाल का मास्टर-स्ट्रोक था फ्री व सस्ती बिजली।

दैनिक भास्कर

Feb 11, 2020, 11:00 PM IST

दिल्ली विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के दोबारा सरकार में आने के कारण को समझना जरूरी है। इसमें राजनीतिक दलों ही नहीं, देश की जनता के लिए भी एक नया संदेश है। यह दल भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन की उपज है। आंदोलन के अस्थायी स्वरूप के कारण देश की जनता फिर से जाति, संप्रदाय और अन्य संकीर्ण भावनाओं में बहने लगी।

लिहाज़ा आप ने भी अपने को सिकोड़कर देश की राजधानी दिल्ली तक सीमित कर लिया। लेकिन, उसने कुछ क्षेत्रों में जिस तरह से काम किया, वह सबके लिए अनुकरण करने लायक है। 2015 में सत्ता में आने के बाद आप सरकार ने अपने 30,000 करोड़ के पहले बजट में एक तिहाई राशि शिक्षा के लिए और एक बड़ा अंश स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया।

2019 के बजट में दिल्ली के हर परिवार पर यह सरकार रोजाना 50 रुपए स्वास्थ्य के मद में खर्च करने लगी। इसके अलावा शिक्षा की गुणवत्ता इतनी अच्छी कर दी कि निम्न और मध्यम वर्ग महंगे प्राइवेट स्कूलों से अपने बच्चों का नाम कटवाकर  सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवाने लगा।

मुख्यमंत्री केजरीवाल का मास्टर-स्ट्रोक था फ्री व सस्ती बिजली। दिल्ली में दो वर्ग हैं, एक बेहद पैसे वाला छोटा वर्ग और व्यापक असंगठित क्षेत्र का निम्न एवं मध्यम वर्ग, जिसकी औसत आय 18,000 रुपए से कम है। उसके लिए अच्छी शिक्षा, मुफ्त चिकित्सा, मुफ्त बिजली व पानी अकल्पनीय राहत थी।

दिल्ली में मूल बाशिंदों के मुकाबले बिहार और आसपास के राज्यों से आए लोग और पहले से रह रहे पंजाबियाें की संख्या ज्यादा है, लिहाज़ा वोटर्स के लिए जातिवाद और सांप्रदायिकता लगभग नगण्य रही। दिल्ली में साक्षरता दर लगभग 90 प्रतिशत है और प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का तीन गुना और बिहार के मुकाबले सात गुना।

इस चुनाव परिणाम का संदेश यह है कि जैसे-जैसे प्रति व्यक्ति आय व साक्षरता दर और तर्क शक्ति विकसित होगी, वैसे-वैसे जातिवाद और संप्रदायवाद का बोलबाला भी कम होगा। वहीं, जनता राजनीतिक दलों को मजबूर करेगी जनकल्याण करने के लिए। राजनीतिक दलों के लिए भी ये नतीजे एक सीख हैं। सबसे बड़ी बात यह थी कि दिल्ली सरकार ने मुफ्त सुविधाएं देने के बावजूद अपने राजस्व को बढ़ाया। क्या केंद्र और अन्य राज्य सरकारें सीख लेंगीं? 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना