संपादकीय / ऐसे तो शायद ही सरकारी आंकड़ों पर भरोसा रहेगा

There is hardly any confidence in government data
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There is hardly any confidence in government data

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 12:47 AM IST

जब सर्वे सरकार के मनमाफिक नहीं तो अधिकारी कहते हैं लाभार्थियों (यानी गरीबों) ने ‘और लाभ के लिए’ झूठ बोला। लेकिन, सीएजी की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि स्वयं सरकारें झूठ बोलती हैं। एनएसएस की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अभी भी एक-चौथाई ग्रामीण भारत शौचालयों से वंचित हैं। उधर सरकार के स्वच्छता विभाग का मानना है कि जिन ग्रामीणों से यह सवाल किया जाता है वे अक्सर ज्यादा सरकारी मदद के लिए झूठ बोलते हैं।

एनएसएस ने भी इस बात को माना है। अगर यह सच है तो देश में शायद ही किसी सरकारी योजना की जमीनी हालत का पता चल पाएगा, क्योंकि लालच में लोग गरीबी और अभाव को बढ़ा-चढ़ाकर बताएंगे और अगर नहीं भी बताया तो सरकार उसे ख़ारिज कर देगी।

अगर उपभोग आधारित सर्वे हो तो सरकार का यह आरोप समझा जा सकता है कि गरीब दूध, दाल या अनाज के रोजाना उपभोग का आंकड़ा गलत देकर अपने को गरीब बता सकता है, लेकिन सरकारी मदद से बने शौचालय तो सर्वे करने वाला अपनी आंख से देख सकता है, फिर यह विरोधाभास क्यों? वैसे यह आम शिकायत है कि मात्र 12 हज़ार रुपए में शौचालय नहीं बन सकता, लिहाज़ा लाभार्थी पैसे पाने के लिए ढांचा खड़ा कर देते हैं जो कुछ दिनों में गिर जाता है या शौच के लायक नहीं रहता।

सरकारी आंकड़े में वह शौचालय बना रहता है। उधर सीएजी रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु के सरकारी आंकड़े पिछले पांच साल से कम करके बताए जा रहे हैं। इस संवैधानिक संस्था ने पाया कि सबसे बड़ी आबादी वाले इस राज्य में सरकारी अस्पताल में मृत पैदा हुए बच्चों की संख्या लगभग 40% कम बताई जा रही है। मुद्दा यह नहीं है कि किसके शासनकाल में इन कृत्यों को अंजाम दिया गया। सीएजी ने यह भी पाया कि 86% मरीजों को पांच मिनट से भी कम समय में जांच करके भेज दिया जाता है।

इसका नतीजा यह होता है कि जब केस बिगड़ जाता है तो मरीज के परिवार वाले उसे मजबूर होकर महंगे निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारें स्वास्थ्य के मद में सबसे कम खर्च कर रही हैं। उस पर से अगर ये तथ्य भी छिपाने लगी हैं तो इन राज्यों के 32 करोड़ लोगों और हर साल करीब 50 लाख नवजातों का भविष्य कितना अंधकारमय होता होगा, यह समझना मुश्किल नहीं है। 

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