करंट इश्यू / गलत प्रतिमान बनाकर समाज को बेहतर नहीं कर पाएंगे

फोर्ब्स 2019 की भारत के 100 सेलिब्रिटीज की लिस्ट में पहले स्थान पर विराट कोहली, दूसरे पर अक्षय कुमार और तीसरे स्थान पर सलमान खान हैं फोर्ब्स 2019 की भारत के 100 सेलिब्रिटीज की लिस्ट में पहले स्थान पर विराट कोहली, दूसरे पर अक्षय कुमार और तीसरे स्थान पर सलमान खान हैं
X
फोर्ब्स 2019 की भारत के 100 सेलिब्रिटीज की लिस्ट में पहले स्थान पर विराट कोहली, दूसरे पर अक्षय कुमार और तीसरे स्थान पर सलमान खान हैंफोर्ब्स 2019 की भारत के 100 सेलिब्रिटीज की लिस्ट में पहले स्थान पर विराट कोहली, दूसरे पर अक्षय कुमार और तीसरे स्थान पर सलमान खान हैं

दैनिक भास्कर

Dec 27, 2019, 12:36 AM IST

किसी भी समाज में प्रतिमान (आइकॉन) बनाए जाते हैं। ये प्रतिमान हमें उसी जैसा बनने को प्रेरित करते हैं। अगर, हमने जाने-अनजाने में गलत प्रतिमान बनाए तो हमारा समाज उसी के अनुरूप ढलने लगता है। फोर्ब्स ने विगत सप्ताहांत में हर साल की तरह भारत के 100 सेलिब्रिटीज के नाम और उनकी रैंकिंग दी है।

ध्यान रहे कि ये सेलिब्रिटीज आय और प्रिंट तथा सोशल मीडिया पर उनकी प्रसिद्धि के पैमाने पर तय किए जाते हैं। इस लिस्ट में शीर्ष पर अधिकांशतः फ़िल्मी दुनिया या क्रिकेट के खिलाड़ी हैं। मसलन विराट कोहली ने इस बार सलमान को पीछे छोड़ दिया है, नंबर 2 पर अक्षय कुमार हैं और टॉप टेन में आलिया और दीपिका क्रमशः 8वें और 10वें स्थान पर।

चयन का आधार ही स्पष्ट करता है कि अगर देश में किसी टैक्सी ड्राइवर ने टैक्सी में छूट गया लाखों रुपए से भरा सूटकेस उसके मालिक तक पहुंचाया या किसी वैज्ञानिक ने नई खोज की या फिर किसी अफसर ने राजनीतिक दबाव के आगे न झुकते हुए तबादला स्वीकार किया, लेकिन दुष्कर्म की शिकार गरीब युवती की शिकायत पर किसी बड़े राजनेता के खिलाफ केस दर्ज किया तो वह सेलेब्रिटी नहीं होगा, क्योंकि ऐसे कामों से आय तो बढ़ती नहीं है।

दूसरा, जो यह सब करता है, वह दिनभर सोशल मीडिया पर नहीं रहता। आपने कभी एक सब्जी बेचने वाले गरीब के बच्चे को जिले में भी सेलिब्रिटी बनते देखा है, जो सिविल सर्विसेज एग्जाम में टॉप कर आईएएस बना या आईआईटी की कठिन एग्जाम में टॉप टेन में रहा? लेकिन, उसी मुहल्ले के एक कक्षा 8 के बच्चे को टीवी के डांस कम्पटीशन में आने पर उसे कंधे पर उठाने का विजुअल अखबरों और चैनलों में देखा होगा।

इसका नतीजा यह होता है कि जब मां-बाप बच्चे को शाम को पढ़ने को कहते हैं तो बेटा उन्हें यह सोचकर देखता है कि ‘तरक्की तो कमर नचाने से होती है। और शायद इसी तरह की सोच के शिकार हो हम सब खूंखार अपराधी को भी चुनाव दर चुनाव वोट देते हैं, यह सोचकर कि गुंडा तो है, लेकिन ‘अपनी बिरादरी की शान है’ या ‘वह गुंडा तो है, लेकिन गरीबों से नहीं अमीरों से पैसा वसूलता है’।

आज जरूरत है कि बाजार की ताकतों के वश में होकर गलत प्रतिमान न बनाएं, बल्कि बच्चों के भविष्य के लिए समाज में ईमानदारी और सकारात्मक पहल करने वालों को अपना प्रतिमान बनाएं, ताकि भारत एक बेहतर समाज बन सके।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना