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कोरोना से घर के वातावरण को प्रभावित न होने दें

5 महीने पहलेलेखक: एन. रघुरामन
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प्रतीकात्मक फोटो।

मुंबई में पश्चिम रेलवे ने एक प्रयोग शुरू किया है, जिसके परिणामस्वरूप कोरोना वायरस (COVID-19) को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है। सोमवार से वे पिछले एक महीने में चीन, फ्रांस, जर्मनी, ईरान, इटली, दक्षिण कोरिया और स्पेन में यात्रा कर चुके यात्रियों की स्क्रीनिंग करेंगे। अगर उनमें कोरोना के लक्षण दिखते हैं, तो वे मौके पर ही उन यात्रियों के ट्रेन टिकट रद्द कर देंगे। मुंबई सेंट्रल डिवीजन को मुंबई नागरिक प्राधिकरणों से यात्रियों की एक सूची मिली है, जिसमें उन सभी यात्रियों के नाम हैं जो 15 फरवरी तक सूचीबद्ध देशों से आए हैं। रेलवे इस डेटा का उपयोग यह पता लगाने के लिए करेगा कि क्या लिस्ट में दिए गए यात्रियों में से किसी ने ट्रेन टिकट बुक किया है। रेलवे सूत्रों से बात करके न्यूज चैनलों ने बताया कि ‘लंबी दूरी की ट्रेन के लिए चार्ट कम से कम चार घंटे पहले तैयार किया जाता है। इतना समय ट्रेनों में सवार जोखिम वाले यात्रियों की पहचान करने के लिए पर्याप्त है। सभी टिकट-चेकर्स को निर्देश दिया गया है कि अगर उन्हें कोई भी ऐसा यात्री दिखे, जिसमें कोरोना वायरस के लक्षण हों, तो उस यात्री का टिकट उसी वक्त रद्द करना होगा।’ यह खबर मुझे मेरे एक पड़ोसी के बेटे ने बताई, जो अभी 7वीं कक्षा में पढ़ता है। वो अपने चाचा (अप्रैल में विदेश से आने वाले हैं) को लेकर पूरे परिवार के साथ गर्मियों में रेल यात्रा करने के लिए तैयार था। जब मैंने उससे पूछा कि उसे यह खबर कहां से मिली तो उसने भोलेपन से बताया ‘टीवी से’! वह वायरस के फैलने के कारण चिंतित नहीं था, क्योंकि उसे इसकी ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन वह इसलिए चिंतित था, क्योंकि उसकी गर्मी की छुट्टी बर्बाद हो रही है। बच्चों द्वारा टीवी पर देखे जाने वाले समाचार पर नजर रखना माता-पिता की जिम्मेदारी है, ये बच्चे के दिमाग पर गहरे असर और घबराहट का कारण बन सकता है। इस संक्रमण के डर से युवाओं में चिंता बढ़ती जा रही है। महत्वपूर्ण यह है कि छोटे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को इससे बुरी तरह से प्रभावित होने से बचाना होगा। वर्तमान स्थिति के कारण पहले ही दुनियाभर में कई सार्वजनिक स्थानों और सामाजिक समारोहों को बंद कर दिया गया है, साथ ही 31 मार्च तक कई भारतीय शहरों में स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं। कुछ राज्यों ने सार्वजनिक सभाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। हाई सोसाइटी ने अपने बच्चों को सोसाइटी के भीतर पार्क और खेल के मैदान में भेजना बंद कर दिया है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि हाल के दिनों में कौन-कौन विदेश यात्रा करके आया है। ऐसी स्थितियों में बच्चे 31 मार्च या जब तक स्थितियों पर कुछ स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक 24 घंटे, सातों दिन के लिए घर में बंद हैं। उन बच्चों पर बोरियत पहले से ही सवार हो गई है जो लगातार टीवी देख रहे हैं। बाल विशेषज्ञ का मानना है कि बच्चे अपने आसपास की चीजों को लेकर दिमाग पर बड़ा प्रभाव अनुभव करते हैं। इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी है कि बच्चों के आसपास बेहतर वातावरण बनाए रखें। उन पर कोरोना वायरस की जरूरत से ज्यादा जानकारी का बोझ न डालें। माता-पिता बच्चों को सोशल मीडिया या टीवी के समाचार देखने से रोकने के साथ अलग-अलग तरह की गतिविधियों में व्यस्त रखने का प्रयास करें। बच्चों को केवल जरूरी जानकारी ही दी जाए। सोशल मीडिया पोस्ट्स के शोर के लगातार संपर्क में आना उचित नहीं है, क्योंकि इससे चिंता पैदा हो सकती है। कुछ स्कूलों ने पहले से काउंसलर की आंतरिक टीम को रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दोबारा स्कूल खुलने पर छात्रों के मन में उठने वाले किसी भी तरह के प्रश्न का समाधान करने की योजना है। फंडा यह है कि  बच्चों के दिमाग पर कोरोना वायरस के डर के असर को कम करने के लिए उनसे अलग-अलग संवाद और चर्चा करने की जरूरत है, ताकि घर पर सकारात्मक वातावरण बना रहे।

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