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घुसना आसान है, बने रहना बहुत मुश्किल

10 महीने पहलेलेखक: एन. रघुरामन
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इस शनिवार की रात एक्टर अक्षय कुमार रोहित शेट्‌टी की फिल्म ‘सूर्यवंशी’, जो अभी रिलीज होनी है, को प्रमोट करने के लिए कपिल शर्मा के टीवी शो में पहुंचे थे। अपने चिरपरिचित अंदाज में कपिल ने उनकी खिंचाई करते हुए पूछा- आपकी हर फिल्म बॉक्स ऑफिस कलेक्टर रही है, लेकिन इस फिल्म से आप कितना कलेक्ट कर रहे हैं? यह एक सीधा सवाल था, लेकिन अक्षय ने पूरी विनम्रता से जवाब दिया- ‘चल जाना चाहिए’, साथ ही जोड़ा- बॉलीवुड में घुसना आसान है, लेकिन लंबे समय तक वहां टिके रहना सबसे मुश्किल चैलेंज है। उनका यह बयान पूर्ण सत्य है। और सिर्फ बॉलीवुड ही क्यों, हर पेशे की सच्चाई यही है। 13 साल की आशी हंसपाल को ही लें, जो पुरुष वर्चस्व वाले मोटरस्पोर्ट में अपना दम दिखा रही हैं। लोग उनसे पूछते हैं- इतनी छोटी उम्र में पेशेवर तौर पर रेस कैसे लगाती हैं। नेशनल कार्टिंग 2019 सीजन में पांच पोडियम फिनिश के लिए उन्हें हाल ही में फेडरेशन ऑफ मोटर स्पोर्ट्स क्लब्स ऑफ इंडिया के सालाना अवॉर्ड्स में ‘आउटस्टैंडिंग विमेन इन मोटरस्पोर्ट्स-2019’ से नवाजा गया है। आशी के पिता एक रैली ड्राइवर रहे हैं। करीब एक साल पहले आशी ने शौक के तौर पर मोटरस्पोर्ट शुरू किया। बीते नौ महीनों में ही यह जुनून बनकर उभरा और आशी को पेशेवर रास्ते पर ले गया। बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल, मुंबई की छात्रा आशी को इस छोटी उम्र में भी अच्छी तरह पता है कि दिमाग को शांत कैसे रखना है और रेसिंग ट्रैक पर उतरते वक्त आक्रामकता कैसे लानी है। क्या आपको पता है कि एक्सीलेटर पर पैर रखने से पहले उसे किस चीज का डर सताता है- लोगों का। रेस के पहले प्रतिभागियों को शांत रखने के लिए आमतौर पर परिवार साथ होते हैं, लेकिन आशी को यह पसंद नहीं, क्योंकि लोग काफी सवाल पूछते हैं। सलाह देते हैं और बातें ही करते रहते हैं, इसलिए रेस पूरी होने तक उसे लोगों से दूर रहना ही पसंद है, ताकि उसका दिमाग शांत बना रहे। इसे ‘कंडीशनिंग’ कहते हैं, जो कई सीनियर आजमाते हैं, लेकिन एक 13 साल की बच्ची का ऐसा करना वाकई काबिले तारीफ है। आप जानते हैं वह कितना व्यस्त रहती है? इस साल वह 25 प्रतियोगिताओं  में हिस्सा लेगी, जिसमें नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप भी शामिल है। हालांकि, उसका सपना है फॉर्मूला वन। याद रखें ‘कंडीशंड लोग’ कुछ उसूलों और अनुशासन के दम पर ऐसा कर पाते हैं। जैसे अक्षय कुमार एक साल में चार-पांच फिल्में कर लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो चार साल में एक ही फिल्म करते हैं। एक और इंसान हैं, 58 साल के सुनील शेट्‌टी, जिनकी मैं कद्र करता हूं। हिंदी फिल्मों में भले अब उनका वह मुकाम न रहा हो, लेकिन दक्षिण में वह नाम कमा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने दो फिल्मों में रजनीकांत के साथ स्क्रीन शेयर किया। जल्द ही वह मोहनलाल की एपिक पीरियड वॉर फिल्म में भी नजर आएंगे। जब सेहत की बात हो तो दक्षिण की युवा पीढ़ी स्वस्थता और अनुशासन के लिए सुनील का सम्मान करती है। हिंदी फिल्मों में अक्षय और दक्षिण की फिल्मों में सुनील में एक बात एक समान है, दोनों को ही दमदार पुलिसवालों के रोल मिलते हैं। दोनों एक वक्त में कई फिल्में करते हैं, लेकिन कभी शिकायत नहीं करते। अगर सुनील लिगामेंट जख्मी होने के बावजूद 17 फिल्में करते हैं तो अक्षय ‘सूर्यवंशी’ और एक एड फिल्म की शूटिंग के लिए बाइक से दो सेट पर जाते थे, वह भी बगैर कुछ खाए। खास बात यह है कि दोनों निर्माताओं को यह भनक भी नहीं लगने देते कि उन्होंने पूरे दिन कुछ नहीं खाया है। इसे कहते हैं समर्पण, आप जिस मुकाम पर हैं, वहां बने रहने के लिए बहुत ही जरूरी है समर्पण। जानते हैं सुनील को अपने बेटे अहान, जो मिलन लूथरिया की ‘आरएक्स100’ की रीमेक से फिल्मों में कदम रखने वाले हैं, के लिए क्या चिंता सताती है? पिता को लगता है कि बेटा सफलता को तो पचा लेगा, लेकिन असफलता से कैसे निपटेगा। फंडा यह है कि आप जहां हैं, वहां बने रहने के लिए आपको कुछ उसूल, अनुशासन, दिनचर्या अपने जीवन में उतारनी होगी। क्योंकि किसी भी इंडस्ट्री में घुसना आसान है, लेकिन वहां बने रहना बहुत मुश्किल है।

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