मैनेजमेंट फंडा / घर में आप और आपके बच्चे कैसे जागते हैं?

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Feb 15, 2020, 12:24 AM IST

आपको टूथपेस्ट के एक विज्ञापन का वो हीरो याद है, जिसकी स्वीटहार्ट पिछली रात टेनिस में हार जाने और रैकेट टूटने के कारण उदास है और हीरो उसे खुश करने की कोशिश करता है। वह तुरंत ब्रश करने की कोशिश करती है और अचानक बहुत एक्टिव हो जाती है। उस एड के इस सीन का प्रतीकात्मक मतलब है कि टूथपेस्ट सुस्ती हटा देता है और शरीर नए दिन की नई चुनौतियों के लिए नई ऊर्जा से भर जाता है। मैं नहीं जानता कि इसके पीछे कोई विज्ञान है या नहीं, लेकिन मुझे अमेरिका के ‘प्लॉस वन’ जर्नल में एक शोध के बारे में पढ़ने को मिला।

इसके एक लेख के मुताबिक सुरीला अलार्म सुबह की सुस्ती दूर कर सकता है और हमारी सजगता या सतर्कता बढ़ा सकता है। जी हां, यह हमें उन ध्वनियों पर ध्यान देने की सलाह देता है, जो हमें रोजाना उठाती हैं। अमेरिका की आरएमआईटी यूनिवर्सिटी द्वारा किया गया अध्ययन बताता है कि सुरीले अलार्म सतर्कता का स्तर सुधार सकते हैं, जबकि कर्कश अलार्म सुबह सुस्तीपन या मदहोशी बढ़ा सकते हैं।

वैज्ञानिकों को लगता है कि आप खुद को जगाने के लिए रिदम और मैलोडी का जो मिश्रण चुनते हैं, उसके कुछ जटिल नतीजे होते हैं। अध्ययन कहता है कि यह उन लोगों के लिए खासतौर पर जरूरी है जो सुबह उठकर ऐसे कामों पर जाते हैं, जिनमें ज्यादा सतर्कता की जरूरत होती है। जैसे फायर ब्रिगेड में काम करने वाले या पायलट।


इससे मुझे मेरे बचपन के दिन याद आ गए, जब मेरे माता-पिता मुझे बहुत धीरे-धीरे उठाते थे। वास्तव में मेरे पिता, जो हमेशा मुझसे कठोर आवाज में बात करते थे, वे भी अपनी आवाज को थोड़ा धीमा और मधुर कर बोलते थे, ‘बेटा उठ जाओ, देर हो रही है।’ मुझे यह सुनना बहुत अच्छा लगता था। जब भी मुझे और प्यार-दुलार पाना होता था, मैं रजाई में और अंदर घुस जाता था, उन सर्दियों के दिनों में जो मार्च में होली तक चलती थीं।

पिताजी थोड़ी देर ये लाड़-दुलार जारी रखते थे, लेकिन वे जल्दी में होते थे, क्योंकि उन्हें रेलवे स्टेशन जाना होता था, चूंकि उन दिनों रिजर्वेशन काउंटर सुबह 7 बजे खुल जाते थे। फिर पिताजी के नहाने जाने पर ये काम मेरी मां संभालती थीं। वे इसमें कुछ विशेषण जोड़ देती थीं। जैसे ‘मेरा बहादुर बच्चा उठ जा’ और ‘मेरा मेहनती बेटा’ आदि। ‘मेहनती’ शब्द मेरे कानों को किसी संगीत की तरह लगता था। इससे मैं रजाई के आराम से बाहर निकलकर घर के लिए दूध लाने की अपनी जिम्मेदारी के लिए तैयार हो जाता था, जैसे ये मेरे परिवार के लिए मेरा सबसे बड़ा योगदान हो। 


उन दिनों सरकारी बूथ से दूध की बोतलें लाना मेरी ड्यूटी थी। आपको वो नीली या लाल धारियों वाली, एल्युमिनियम के ढक्कन वाली दूध की बोतलें याद हैं? साइकिल पर इन बोतलों को लाने के लिए बहुत सतर्क रहना पड़ता था। एक हाथ से साइकिल का हैंडल और दूसरे हाथ से बोतलें संभालनी पड़ती थीं, क्योंकि जाते समय तो बोतलें खाली और लौटते हुए भरी हुई रहती थीं।

खासतौर पर तब, जब खराब सड़क पर साइकिल चलानी हो। बूथ पर मौजूद व्यक्ति किनारों से टूटी हुई या दरार वाली खाली बोतलें नहीं लेता था, जबकि मेरे जैसे बच्चे को देखकर खुद चुपके से दरार वाली बोतलें देने की कोशिश करता था। ऐसी बोतलों को लेने से इनकार करने के लिए सतर्क रहना जरूरी था।

हालांकि, मेरे माता-पिता को आज की रिसर्च के बारे में कोई अंदाजा नहीं था, लेकिन वे तब एक बात जानते थे कि अगर हम हमारे बच्चों को सतर्क-सजग और ऊर्जावान रखना चाहते हैं तो उन्हें ऐसे शब्दों से उठाना होगा जो उन्हें सुरीले संगीत जैसे लगें। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि कर्कश ‘बीप-बीप’ वाली अलार्म टोन उठने के बाद चलने में भ्रमित और दिमाग की गतिविधियों को अस्त-व्यस्त कर सकती है।

फंडा यह है कि  अगर आप परिवार को खुश रखना चाहते हैं और उन्हें सुरीली मधुर आवाज से जगाना चाहते हैं, तो सुबह का अलार्म तय करना होगा।

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