मैनेजमेंट फंडा / जरूरी है खेती में टेक्नोलॉजी के साथ कई तरीके अपनाना

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Jan 15, 2020, 12:24 AM IST

आज की कहानी वैसे शुरू होती है, जैसे हम पोते-पोतियों को कहानियां सुनाते हैं। कुछ ऐसे, ‘एक बार एक गांव में एक राजा रहता था….!’


तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में 45,000 की आबादी वाला शहर थुरईयुर है। इसके ज्यादातर लोग खेती करते हैं। यहां धान और मक्के की खेती ज्यादा होती है। अभी शहर की अर्थव्यवस्था कृषि और गहनों पर आधारित है। इसमें हैंडलूम कारीगरों की वजह से बदलाव आया है। बिजली से चलने वाले करघे आने से पारंपरिक हथकरघा का महत्व कम होने लगा है। हालांकि हैंडलूम अभी भी मुख्य पेशों में से एक है। 


यहीं रहते हैं नवीन, जिन्होंने अपने घर से 50 किलोमीटर दूर तिरुचिरापल्ली के बिशप हेबर कॉलेज से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स और एमफिल डिग्री हासिल की है। उन्होंने केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद से प्रशिक्षण भी लिया है, जिससे उन्हें अपनी 24 एकड़ जमीन को विकसित करने की प्रेरणा मिली।

पानी, बिजली और मजदूरों की कमी के कारण 2010 में नुकसान झेलने के बाद नवीन ने एक साल के लिए काम-काज बंद कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि आगे बढ़ने के लिए टेक्नोलॉजी के साथ अलग-अलग तरीकों या विधियों को अपनाना ही एकमात्र रास्ता है। 


उन्होंने खेत में बाड़ा लगाने से शुरुआत की और फिर पशुपालन, टिकाऊ कृषि के प्रयोगों और विभिन्न फसलों के लिए इकाईयां बनाईं। पशुपालन इकाई में मुर्गीपालन, मछलीपालन, मधुमक्खी पालन और दुधारु जानवरों के लिए जगह है। फार्म में भेड़ की नई नस्ल नारी-सुवर्णा भी है, जिसे महाराष्ट्र के फलटण में निंबकर एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है।


फिर उन्होंने दो एकड़ जमीन पर मियावाकी वृक्षारोपण किया है, जिसमें हर प्लॉट पर पांच तरह के पौधे लगाए हैं। मियावाकी जंगल बड़े होने पर घने होते हैं, लेकिन यहां पेड़ों के बीच जगह छोड़ी गई है ताकि प्रकृति अध्ययन भी किया जा सके। सिंचाई के लिए नवीन बोरवेल और पंपिंग सिस्टम्स का इस्तेमाल कर खेत के सूखे क्षेत्रों में बने टैंक में पानी भरते हैं। रेनवॉटर हारवेस्टिंग, ड्रिप इरिगेशन जैसी विधियों और रेन गन स्प्रिंक्लर सिस्टम जैसे तरीकों ने सीमित संसाधनों में भी बेहतर काम करने में मदद की है।


‘नवीन गार्डन’ नाम का यह मॉडल फार्म आज धान, मक्का, मूंगफली, अनार, यूकेलिप्टस और चारे वाली फसलें उगाता है। इसका अनार के बेहद घने 3500 पेड़ों वाला बाग तमिलनाडु में अपनी तरह सबसे बड़ा बाग है। खेती के विभिन्न तरीकों के इस्तेमाल से यह कृषि विज्ञान केंद्र, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक और जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के कृषि विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण केंद्र बन गया है।

तमिलनाडु वेटेनरी एंड एनिमल साइंसेस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ब्लड सैंपल और डीएनए फिंगर प्रिंटिंग के जरिए जेनेटिक मेकअप की पुष्टि करने लिए यहां आते रहते हैं। नवीन गार्डन आस-पास के शैक्षणिक संस्थानों के लिए ‘कृषि-पर्यटन’ का ठिकाना बन गया है। यहां आने वाले बच्चे प्रकृति के संरक्षण का महत्व समझते हैं।

देश-विदेश के शोध छात्र और वॉलंटियर यहां खेती-किसानी वाले जीवन का अनुभव करने आते हैं। नवीन का एनजीओ ग्लोबल नेचर फाउंडेशन (2011 में स्थापित) पर्यावरण और संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं का समायोजन करता है। यह कृषि में शोध को भी स्पॉन्सर करता है। 


पिछले साल फाउंडेशन के समर्थकों ने बेंगलुरु में भी ‘रूट्स एंड फ्रूट्स’ नाम से ब्रांच ऑफिस खोला है, जिसका उद्देश्य युवाओं को ईको-फ्रेंडली और सामाजिक रूप से जिम्मेदार जीवनशैली के प्रति संवेदनशील बनाना है। नवीन 2012 से गोरैया संरक्षण परियोजना भी संभाल रहे हैं, जिसके तहत विभिन्न जगहों पर 500 घोंसले वाले डिब्बे लगाए गए हैं।

फंडा यह है कि  इस तेजी से बदलती दुनिया में केवल खेती का बिजनेस नहीं किया जा सकता। एक कारगर इकाई बनाने के लिए इसमें दो या इससे ज्यादा चीजों को जोड़ना होगा। साथ ही बिना टेक्नोलॉजी के इसमें बने रहना संभव नहीं है।

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