मैनेजमेंट फंडा / इंसानी इंटेलीजेंस बनाम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस



एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Oct 05, 2019, 01:43 AM IST

"वि षय जब अतिक्रमण और अवैध निर्माण की पहचान करने का हो तो एक नगर निगम के अधिकारी से ज्यादा जानकारी किन्नरों के पास होती है’। गुरुवार को मुम्बई में की गई यह कठोर टिप्पणी किसी साधारण व्यक्ति की नहीं, बल्कि बाम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की बेंच ने की है। यह बेंच एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें देश के कई नगरीय निकायों ने अवैध निर्माणों को हटाने में अपनी अक्षमता जताई थी जो पहले से भरी शहरी आबादी के बीच खड़े हो गए हैं और इन निकायों में देश का सबसे अमीर निकाय बृहन्मुम्बई म्यूनिसिपल कार्पोरेशन (बीएमसी) भी शामिल है।


मुम्बई में अतिक्रमण और अवैध निर्माणों की पहचान को लेकर कोर्ट ने बीएमसी को उपलब्ध डेटा का इस्तेमाल न करने पर फटकार लगाते हुए कहा कि, आपको इंसानी इंटेलीजेंस पर भरोसा करना चाहिए, जैसे कि किन्नर को लीजिए जो कि बच्चे के जन्म और शादी जैसे किसी मंगल उत्सव पर सीधे घर पहुंच जाते हैं जबकि आपके अधिकारियों को तो इसके बारे बहुत बाद में पता चलता है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि देश में डेटा की कोई कमी नहीं है, और आप बिजली आपूर्ति करने वाली कम्पनी के डेटाबेस से यह क्यों नहीं पता करते कि किसी इलाके में कितने नए कनेक्शन दिए गए हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि ‘जहां चाह होती है, वहां राह भी निकल जाती है।’  इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि ‘एक सब्जीवाले या लॉन्ड्रीवाले तक को आपके अफसर से ज्यादा जल्दी पता चल जाता है कि किस बिल्डिंग में, कौन नया आदमी रहने आया है।’  


जनवरी में महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह मुम्बई के छोटे इलाके वडाला से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रही है, जिसमें यहां के सभी निर्माणों की सैटेलाइइट मैपिंग और सभी संपत्तियों की जिओ-टैगिंग की जाएगी। इसके बाद इस मॉडल को पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा। बीएमसी के लिए वरिष्ठ वकील अनिल साखरे ने बताया कि नागपुर स्थित महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर इसके लिए एक प्रोग्राम तैयार कर रहा है जिसकी प्रति वार्ड लागत 50 लाख रुपए आएगी। अकेले मुम्बई शहर में ऐसे म्यूनिसिपल वार्डों की संख्या 24 है, जिनके लिए कुल 227 कार्पोरेटर्स चुने जाते हैं।


चीफ जस्टिस ने पुलिस विभाग की ओर इशारा करते हुए सवाल किया कि, जब एक साधारण पुलिसकर्मी भी खुफिया जानकारी जुटा लेता है और जनसंख्या की गणना में भी हर एक व्यक्ति के बारे में सभी जरूरी जानकारियां दर्ज की जाती हैं, तो आप उनका इस्तेमाल क्यों नहीं करते?’ जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सबसे बड़े नगरीय निकाय की आलोचना यह कहते हुए की कि, आप पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर निर्भर है और इंसानी इंटेलीजेंस का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि, भारत में डेटा का अकाल नहीं पड़ गया है, क्योंकि हर बार जिम्मेदार लोग फिर से डेटा जमा करने की बात कहते हैं, आप हर बार एक नई कहानी शुरू करते हैं, जबकि आपको एक कॉमन पूल बनाकर डेटा को अन्य जिम्मेदार विभागों के साथ साझा करना चाहिए।’


और, न्यायमूर्ति  बिल्कुल ठीक कह रहे थे। एक बार जरा पुणे के ट्रैफिक विभाग की की पहल को देखिए, जिसमें सड़क पर रेंगते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ‘ट्रैफ वॉच' नाम के एक वेब पेज की मदद ली जा रही है। यह पेज बहुत इंट्रेेक्टिव है। यह शहरवासियों को जोड़ने का टूल है, जो ग्राउंड लेवल से डेटा जमा करता है, और इसका लक्ष्य ट्रैफिक से जुड़ी उलझनों को सुलझाना है। खाली पार्किंग स्लॉट और काम नहीं कर रहे सिग्नलों समेत कई ऐसी चीजे हैं जिनकी जानकारी इस वेब पेज को बहुत उपयोगी बनाकर आम पुणेकरों की यात्रा और जिंदगी को आसान बना देती हैं।

 

वर्तमान में इस वेब पोर्टल पर लोग कई तरह की शिकायतें दर्ज कराते हैं और इसके जरिए उनका समाधान किया जाता है जो कि एक तरह से इसकी उपयोगिता का प्रमाण भी है। अब तक आम शहरियों से करीब 10,000 परेशानियों को जमा किया गया है, जिसमें ट्रैफिक जाम, फुटपाथ का न होना या अधूरा होना, अतिक्रमण, अवैध बैनर प्रमुख हैं और इन्हें पुणे की 265 जगहों से जमा किया गया है। डेटा जमा करने का यह काम हर दिन बिना किसी रुकावट के किया जाता है। जी, हां टेक्नोलॉजी बहुत जरूरी है, लेकिन जब तक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से अपने आप सबके हित के फैसले न लेने लग जाए, हमें इंसानी इंटेलीजेंस की मदद से वर्तमान सिस्टम का बैकअप लेते रहना होगा। ऐसा होने पर टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल भी होगा और उसका अधिकतम फायदा भी मिलेगा।

 

फंडा यह है कि अगर तुरंत नतीजे चाहिए तो जीरो से शुरू करके ब्रांड न्यू डेटा को जमा करने में समय खर्च करने से अच्छा है कि जो डेटा उपलब्ध है, उसी का सही विश्लेषण करके व्यवहारिक समाधान ढूंढ़े जाएं।

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