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मैनेजमेंट फंडा / हर किसी का एड्रिनलिन हार्मोन अलग होता है



Dainik Bhaskar

Apr 12, 2019, 01:21 AM IST

अगर क्रिकेट मैच देखना आपको अगले दिन की जरूरत का एड्रिनलिन हार्मोन (शरीर में उत्साह जगाने वाला केमिकल) देता है, तो बुधवार की रात आपके लिए यादगार रही होगी, जब आईपीएल में मुंबई इंडियन्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच हुए मैच को देखकर आप निश्चित रूप से सोफे से लगभग गिरने वाले होंगे, क्योंकि मुंबई के कप्तान कीरोन पोलार्ड ने असंभव को संभव बनाते हुए 3 चौके और 10 छक्के मारकर कठिन लक्ष्य का पीछा कर रही अपनी टीम को जिता दिया!

 

याद कीजिए कि त्रिनिदाद के खिलाड़ी पोलार्ड की रन-वर्षा पर आप कैसे चीख रहे थे, हो सकता है आपको चेतावनी मिली हो कि, ‘चीखो मत और टीवी का वॉल्यूम कम करो!’ ऐसा इसलिए है कि जो आवाज परिजनों को परेशान कर रही थी, वही आपको अपनी जरूरत का एड्रिनलिन प्रदान कर रही हो।  हालांकि, ऐसा भी होता है कि कई बार आवाज के कारण ही नींद आती है- सुनने में अजीब लगता है, पर सच है? अगर आप एक मुंबईकर हैं और लोकल ट्रेन में सफर करते हैं, तो आपको इस दावे पर शंका नहीं होगी, क्योंकि आप रोज ही देखते होंगे कि यात्री लोकल में बैठते हैं और जैसे ही ट्रेन चलती है तो ट्रैक से आने वाली आवाज को सुनकर ही वे नींद के आगोश में चले जाते हैं। जिन्हें मुंबई लोकल का अनुभव नहीं लिया है, उनके लिए ये दो कहानियां उपयुक्त होंगी।

 

कहानी 1:  यह एक प्रचलित प्राचीन उपचार पद्धति है, जो बचपन में कोई ट्रॉमा झेल चुके लोगों के लिए कारगर होती है। इसमें आपको आंखें बंद करके साउंड हीलिंग स्टूडियो में लेटना या फिर कुर्सी पर बैठना होता है। स्टूडियो में उपचार ले रहे व्यक्ति के आसपास विशेष प्रकार के तिब्बती कटोरे (सिंगिंग बाउल) रख दिए जाते हैं। जब इस कटोरे पर माया धामी जैसे प्रोफेशनल हीलर, जिनका ऋषिकेश में अपना स्टूडियो है, एक उपयुक्त दबाव के साथ चोट करते हैं तो निकलने वाली ध्वनि और कम्पन वहां उपचार ले रहे व्यक्ति के शरीर को भेदती है और निष्क्रिय पड़ी कोशिकाअों को सक्रिय कर देती है। यह मस्तिष्क तरंगों को शिथिल कर देता है और इससे वह अधिक सक्रिय अवस्था (बीटा) से सपनों वाली शिथिल अवस्था (अल्फा) में चला जाता है। पहली बार इस तरह का सेशन लेने वाले लोग इस उपचार और म्यूजिक थैरेपी को लेकर थोड़े संशय में हो सकते हैं। लेकिन अधिकांश हीलर कहते हैं कि दोनों में फर्क हैं और केवल मरीज ही अनुभव कर सकता है कि उसे किस प्रकार की हीलिंग मिली। सामान्य लोगों के लिए यह एक मसाज कराने जैसा अनुभव है, जो तरो-ताजा महसूस कराने जितना एड्रिनलिन मुहैया कराता है।

 

कहानी 2: छुटि्टयां सिर्फ आराम फरमाने और सेल्फी उतारने के लिए नहीं होती, क्योंकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी यात्रा के साथ एक बड़ा उद्देश्य लेकर चलते हैं। मेरे एक डॉक्टर मित्र इस बार लोकसभा चुनाव में अपना वोट डालने के बाद परिवार के साथ उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों की सैर पर जाएंगे जहां चिकित्सा सुविधाएं दुर्लभ हैं। वहां पर वे स्थानीय लोगों की चिकित्सा समस्याओं को चिह्नित करेंगेे। परिवार स्थानीय लोगों के साथ उन्हीं के घरों में रहेगा, पाक कला सीखेगा और संस्कृति समझकर उनकी जीवनशैली को जानेगा, साथ ही आस-पास के दर्शनीय स्थानों की सैर भी शामिल होगी। दूसरों के लिए कुछ करने के जज्बे से उन्हें जरूरत का एड्रिनेलिन मिलेगा।
मुझे ध्यान है कि 2017 में हैदराबाद की एक कम्पनी “ऑफबीट ट्रैक्स्र’ ने एक उद्देश्य के साथ पर्यटन सेवा की शुरुआत की थी। इसमें अमेरिका के 14 नागरिक लद्दाख के चंगटांग की ट्रिप पर गए थे और उन्होंने वहां के 10 दूरस्थ गांवों में सोलर पैनल लगाए थे। ये जगह अपनी पश्मीना बकरियों  के लिए मशहूर है और यहां साल के 300 दिन सूरज चमकता है फिर अधिकांश समय तापमान जीरो डिग्री के आसपास बना रहता है।

 

फंडा यह है कि   अपनी पसंद से हर कोई अलग-अलग कामों से अपना एड्रिनलिन पा सकता है, हमें बस उसकी कद्र करना सीखना चाहिए।

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