मैनेजमेंट फंडा / बुढ़ापे में पैसा नहीं ‘साथी' चाहिए



Dainik Bhaskar

Oct 19, 2019, 01:19 AM IST

77 वें जन्मदिन के ठीक एक हफ्ते बाद जब अमिताभ बच्चन के बीमार होने की अपुष्ट खबरें आईं तो इस महानायक से जुड़ी कईं यादें ताजा हो गईं। हजारों हाथ सलामती की प्रार्थना-दुआ में उठ गए। ये दुआएं ही इस भरोसे को पुष्ट करती हैं कि जिंदगी में खूब धन-संपदा के बावजूद ऐसे शुभचिंतक लोग होना कितना जरूरी है जो मुश्किल वक्त में आपके लिए खड़े हो सकें, क्योंकि पैसा सिर्फ अस्पताल का बिल चुकाने में ही काम आएगा। और यही सोचकर मेरे मन में जो पहला विचार आया वह एक चुटकुले के रूप में था - एक क्रूर चुटकुला। और वह कुछ ऐसा था: ‘एक बुजुर्ग अमीर आदमी ने अपनी पहली पत्नी की मौत के कई वर्षों के बाद दोबारा शादी की। दूसरी पत्नी सुंदर और काफी युवा थी।

 

शादी के दिन, उसके एक जिज्ञासु मित्र ने पूछा ‘तुमने ऐसा क्या कहा कि भाभीजी ने तुम्हारा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया?’ वह बोला ‘मैंने अपनी उम्र के बारे में झूठ बोला।’ मित्र ने अपनी आंखें झपकाईं और चेतावनी देते हुए कहा ‘ओह, क्या वही पुरानी तरकीब आजमाई? इस बार अपनी उम्र कितनी कम बताई? तुमने सचमुच ही 45 साल कहा होगा ना? पर, ध्यान रखो इस बार तुम पकड़े जाओगे क्योंकि तुम अब ज्यादा के दिखने लगे हो।’ यह सुनकर वह बुजुर्ग दुल्हा मुस्कुराया और कहने लगा ‘नहीं दोस्त, मैं कभी नहीं पकड़ा जाऊंगा, क्योंकि मैंने इस बार उम्र 45 नहीं, 90 साल बताई है!’ इस चुटकुले को पढ़कर आप जो कुछ समझे हों, लेकिन मेरी समझ यह है कि, वह बुजुर्ग आदमी बड़ी गंभीरता से अपनी जिंदगी के आखिरी वर्षों में एक साथी चाहता था और इससे फिर एक बार सिद्ध होता है कि- शुभचिंतक लोग, पैसों से ज्यादा जरूरी होते हैं। अगर आपको अभी भी यकीन नहीं हो रहा हो तो जिंदगी के  इन दो सच्चे उदाहरणों को पढ़ लीजिए जो अभी कुछ दिन पहले के ही हैं।


उदाहरण 1:  बीते 4 अक्टूबर के दिन, जब पुलिसकर्मी मुंबई के गोवंडी इलाके में ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवा बैठे एक भिखारी बिरजू चंद्र आजाद की टूटी-फूटी एक कमरे वाली झुग्गी में घुसे, तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अगले 8 घंटे इसी बदबूदार और गंदी जगह में बिताने पड़ेंगे! वह भिखारी अपने पीछे न सिर्फ एक वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड और आधार कार्ड छोड़कर गया था, बल्कि उसके ठिकाने से 8.77 लाख रुपए के फिक्स डिपॉजिट के कागजात और 1.5 लाख रुपए के सिक्कों से भरा बोरा मिला, जिन्हें गिनने में पूरे 8 घंटे का समय लगा! इतने वर्षों में किसी ने उसकी खैर-खबर नहीं ली थी लेकिन जब पुलिस ने मीडिया में हकीकत बताई तो पांच लोग उसके रिश्तेदार बनकर पहुंच गए और वे सभी उसका अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार थे ताकि उसकी जमा पूंजी पर हड़प सके! पुलिस ने उनसे वही कहा जो उसे कहना था - ताकि असली रिश्तेदारों की पहचान हो सके।


उदाहरण 2:  अगर आप इस भिखारी वाली कहानी को खारिज भी कर दें, तो आपको निखिल झवेरी की कहानी जरूर जाननी चाहिए, जिनका इसी बुधवार को निधन हो गया। दक्षिण मुम्बई में 200 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक झवेरी की जब मौत हुई तो उसके सिराहने कोई अपना नहीं था। दो बार के तलाकशुदा झवेरी पाम बीच स्कूल के प्रोप्रायटर और प्रिंसिपल थे, जो अब बदहाल पड़ा है। लेकिन, मुंबई के मलाबार हिल्स पर जिस प्लॉट पर यह बना है उसकी कीमत 200 करोड़ रुपए है और इसी इलाके में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राज्यपाल का आवास भी है। झवेरी का अपनी दूसरी पत्नी से एक बेटा है और जनवरी 2005 में उनका तलाक हो गया था। 2009 में झवेरी हटिंगटन नामक बीमारी के शिकार हो गए, जो एक न्यूरोलॉजिकल विकार है और यह तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। जब उनका उपचार चल रहा था, तो उनकी पहली पत्नी दीप्ति पांचाल ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर इस 200 करोड़ की प्रॉपर्टी पर अपना दावा ठोंक दिया।

 

झवेरी की दूसरी पत्नी के बेटे रेयान ने, अपनी सौतली मां दीप्ति के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी और उस पर पिता के फर्जी दस्तखत करने का आरोप लगाया। इस बीच झवेरी दिसंबर 2013 में अपनी बहन के पास रहने चले गए और बाद में वहां से गुमशुदा हो गए। कुछ समय बाद पुलिस ने उन्हें एक विक्षिप्त की तरह पाया और एक आश्रय घर में भेज दिया। जनवरी 2014 में पहली बार उनकी पहचान निखिल विट्‌ठलदास झवेरी के रूप में हुई और उन्हें जैन हॉस्पिटल में इलाज के लिए भेज दिया गया जहां वे 2017 तक रहे। बाद में कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें जेजे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां बुधवार के दिन बढ़ते बिल और नितांत एकाकीपन के साथ वे दुनिया से विदा हो गए।
फंडा ये है कि जब उम्र पक जाएगी तो बैंक और बोरों में भरा पैसा किसी काम नहीं आएगा- फिर ये वो अपने ही होंगे जो आपकी जिंदगी में रंग भरेंगे, खुशियां लाएंगे और जब जरूरत होगी तो ये शुभचिंतक ही आपके लिए दुआ करेंगे।

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