मैनेजमेंट फंडा / नई चमक के साथ वापस आ रही हैं पुरानी चीजें



management funda: old things are coming back with new shine
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management funda: old things are coming back with new shine

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Jul 13, 2019, 12:24 AM IST

सम्पूर्ण स्वास्थ्य के मार्केट में नया ट्रेंड चल रहा है, जिसमें ‘सेहतभरे अमृत रूपी पेय’ के बहाने यह दावा किया जा रहा है कि इससे आपकी ज़िंदगी पटरी पर लौट आएगी। फूड फेस्टिवल अब गुजरे कल की बात है। नया चलन वेलनेस फेस्टिवल का है! हाल ही में ऐसा एक फेस्टिवल दिल्ली में आयोजित किया गया था। मेरी नज़र में ऐसे आइडिया कई असंगठित बाजारों से उभर रहे हैं। क्या आपको सुबह की सैर के समय बगीचे के बाहर खड़ा जूस वाला याद है? समय के साथ ऐसे ही प्रयोगों ने आज सेहतमंद पेय पदार्थों का बड़ा बाजार खड़ा कर दिया है।


विशाखापट्‌टनम के 25 वर्षीय चिट्‌टम सुधीर भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिन्होंने अपने सबसे पसंदीदा नाश्ते इडली को नया रूप देकर बाजार में जगह बनाई है। दिलचस्प यह है कि उन्होंने ऐसा अनूठी पैकेजिंग और स्वाद के दम पर किया। उसकी इडली एक तरह की पत्तल में लिपटी मिलती है, जो छोटे-छोटे डंठल से साल के पेड़ के 6-8 पत्तों से बनती है।

 

आप उसे कोई ऐसा बेरोजगार आदमी मत समझिएगा, जो पेट भरने के लिए ऐसा कर रहा है। वह स्टार्टअप का फाउंडर है और कृषि अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट है, लेकिन उसने गरीब आदमी के इस खाने का अनोखे तरीके और स्वाद के साथ पूरी तरह से कायाकल्प करने की ठानी। उसके इस वेंचर का नाम है ‘वसना पोली’ और यह कई फिटनेस प्रेमियों, मेडिकल प्रेक्टिशनरों और कॉलेज के छात्रों के लिए नियमित आमद की जगह बन गई है।

 

विशाखापट्‌टनम में हर सुबह 7 बजे के बाद उनके इडली पार्सल के काउंटर पर लोग उमड़ने लगते हैं। इनमें से अधिकांश उनके नियमित ग्राहक हैं। लोगों की पसंद का कारण यह भी है कि उनकी इडली कई तरह के अनाज से बनी होती है और इनकी बाजरा प्रजाति के मोटे अनाज की कई किस्मे हैं जैसे रागी, ज्वार, बाजरा, कंगनी, सनवा,  आरिका, सामा और चेना।


चूंकि बाजरा प्रजाति के ये अनाज एंटी-ऑक्सिडेंट, विटामिन, मिनरल्स और रेशों से भरपूर होते हैं, इसलिए हर दिन सुबह और शाम को चार किस्मों की इडली बनाई जाती है, इनमें रागी वाली इडली हमेशा बनाई जाती है। सुधीर बीच-बीच में किस्मों को बदलकर संतुलन बनाए रखते हैं और साथ ही यह भी समझाते हैं कि इन अनाजों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने से इनकी बनी इडली खाने से डायबिटीज में खून में इंसुलिन काबू में रहता है।


उनकी इडली की सामग्री और पैकेजिंग के साथ-साथ आकार भी एकदम अनूठा है। जी हां, अमूमन इडली गोला होती है, लेकिन उनकी इडली आइस्क्रीम की तरह तिकोनी होती है और इन्हें मूंगफली, अदरक और कुंदरु या टेंडली की चटनी के साथ परोसा जाता है। इडली को बनाने का तरीका भी उनके वेंचर को सबसे अनूठा बनाता है।

 

सबसे पहले इडली के घोल को पत्तल में लपेटा जाता है और फिर आग पर एक बर्तन में रखकर भाप में पकाया जाता है। अफ्रीका और चीन के बाद भारत में 80 लाख टन से ज्यादा बाजरा प्रजाति वाली फसलों की पैदावार होती है। लेकिन हाल के समय में ही इस तरह के मोटे अनाज को नया स्वरूप मिलने लगा है। और सुधीर जैसे विनम्र लोग अपने विनम्र तरीके से इस तरह के अनाजों को बढ़ावा देने में लगे हैं।

 

उनका पार्सल काउंटर सुबह चार घंटे (7 से 11 बजे) और शाम को 6 घंटे (5 से 11 बजे) तक खुला रहता है। वे 2016 से ही बाजरे पर अपनी रिसर्च कर रहे हैं। शुरू में उसने परिवार में ही अपने प्रयोगों को आजमाया लेकिन, उन्होंने उसे नकार दिया। इसके बाद सुधीर ने आदिवासियों के साथ काम करके पारम्परिक बाजरे की फसल पर अध्ययन किया और अपनी पत्तों वाली मोटे अनाज की इडली बनाने के लिए गुंटूर के आचार्य एनजी रंगा कृषि विश्वविद्यालय के साथ भी भागीदारी की।

 

फंडा यह है कि आसपास बदलती जरूरतें देखें और कदम उठाइए, संभव है कि आप उनका कायाकल्प कर दें व पुराने को नय़ा करने वाले ट्रेंड सेटर बनकर उभरें।

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