मैनेजमेंट फंडा / बिना कार वाली कॉलोनी बन रहा है नया ट्रेंड!

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Feb 01, 2020, 12:13 AM IST

पुणे में औंध और इसके आसपास के इलाके के वरिष्ठ नागरिकों ने ‘राइट टू वॉक' नारे के बैनर तले एक मुहिम शुरू की है। उनकी मांग है कि सड़क किनारे के फुटपाथों को अतिक्रमण, कचरे और उन सारी बाधाओं से मुक्त किया जाए जो पैदल चलने वालों के लिए परेशानी बनते हैं। अब इस मुहिम को पूरे शहर में समर्थन मिल रहा है।

बहुत से दूसरे नागरिक आगे आकर पुणे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के सामने समस्या उठाकर समाधान मांग रहे हैं। यहां के सकाल नगर में रहने वाले 66-वर्षीय सीनियर सिटीजन मुकुंद पुराणिक पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया और उसके बाद लगातार प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के पीछे लगे रहे। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों तक फुटपाथों को खाली कराने की मांग पुरजोर तरीके से रखी।

कुछ 10 वरिष्ठ नागरिकों के एक समूह ने सुनिश्चित किया है कि अधिकारियों के साथ लगातार फॉलोअप करके कम से कम औंध में इस समस्या को कुछ हद तक हल किया जाए। स्वस्थ रहने के लिए बहुत से बुजुर्गों के लिए सुबह और शाम की सैर जरूरी होती है। हमारे देश के विभिन्न शहरों में इस तरह के कदम उठाने चाहिए, ताकि हम अपने लिए फुटपाथों को फिर से पा सकें।


सैन फ्रांसिस्को के कल्डसेक डेवलपर एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं और यह अमेरिका जैसे देश में अपनी तरह की पहली डेडिकेटेड, ‘कार- फ्री' आवासीय कालोनी विकसित कर रहे हैं। ‘वर्ल्ड्स फर्स्ट पोस्ट-कार डेवलपमेंट' नाम का यह प्रोजेक्ट इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। इसकी लागत करीब 140 मिलियन डॉलर है, जिसमें 16 एकड़ जमीन पर 636 मल्टी-फैमिली यूनिट्स में 1000 लोगों के लिए रहने की व्यवस्था होगी।

यहां किसी भी रहवासी को परिसर में कार लाने या पार्क करने की अनुमति नहीं होगी। सख्ती इतनी होगी कि वे आसपास के इलाके में कहीं अपनी गाड़ी पार्क नहीं कर पाएंगे। चूंकि पिछले एक दशक में परिवहन क्षेत्र में बहुत बदलाव आया है लेकिन इसमें कहीं भी रिअल एस्टेट का ध्यान नहीं रखा गया है, इसलिए कम्पनी इस अनूठे आइडिया को अमल में ला रही है।


यहां विकसित की जा रही सुविधाओं में सड़क के दूसरी ओर एक छोटा रेलवे स्टेशन, इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक, राइड शेयरिंग और कार शेयरिंग के लिए कुछ जगह छोड़ी जा रही है, वह भी केवल बाहर से आने वाले मेहमानों और कॉलोनी के कोने में बने मॉल, ग्रॉसरी स्टोर और कॉफी शॉप तक सामान लाने वाले वाहनों के इस्तेमाल के लिए होगी।

आमतौर पर रहवासियों के लिए सड़क में और पार्किंग बनाने में जमीन का बहुत बड़ा खर्च हो जाता है और यहां पर इसी की बचत करके रहने की जगह को बहुत बढ़ाया गया है। प्रोजेक्ट के को-फाउंडर्स का कहना है कि यहां आधी जमीन की लैंडस्कैपिंग की जाएगी, सबको खुले आंगन और हरियाली मिलेगी, और यह सब कुछ आमतौर पर बनाए जाने वाले शहरी आवासों की तुलना में तीन गुना होगी।


यहां पर स्वीमिंग पूल, जिम और आग सेंकने (फायर पिट) जैसी पारंपरिक सुविधाओं के लिए भी जगह होगी, और लक्जरी सुविधाएं जैसे प्लाजा, ग्रीन स्पेस, लोगों के लिए पार्क और एक अलग डॉग पार्क, और साथ- साथ काम करने की सोच के साथ शेयर्ड वर्किंग स्पेस भी होंगे। मेहमानों के लिए प्राइवेट गेस्ट सुइट्स होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि एक दंपति शायद ही कभी घर में बना एक्सट्रा बेडरूम इस्तेमाल करते हैं।

यह देखना दिलचस्प हैं कि कौन इन यूनिट्स को खरीदने के लिए आगे आए हैं। उधर, डेवलपर्स का कहना है कि जिन लोगों ने यहां सबसे पहले बुकिंग की है उनमें 30 साल की उम्र वाले युवा ज्यादा हैं और दिलचस्प रूप से उन्हीं को इस धरती पर कारों की संख्या बढ़ाने के लिए दोषी ठहराया जाता है। 

फंडा यह है कि  जीवन के हर क्षेत्र में नया सोचने का समय आ गया है। जिस जगह को हम "अपना घर" कहते हैं, वहां हम रहते कैसे हैं!

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