मैनेजमेंट फंडा / ‘आइसक्रीम’ जैसी पिघलती जिं़दगी पर ‘चेरी’ लगा दें!

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Apr 16, 2019, 12:51 AM IST



Put 'cherry' on melting life like 'ice cream'!
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बीते गुरुवार नितिन और नीता जबाक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में दो हफ्ते की हॉलीडे ट्रिप खत्म करके फ्लाइट पकड़ने वाले थे तो उदास महसूस कर रहे थे। उनका मन था कि कुछ और दिन रुक जाएं, लेकिन मुंबई के कल्याण स्थित उनके ‘सिटी क्रिटिकेयर’ हॉस्पिटल में मरीजों को उनका इंतजार था, जहां लौटकर इन दोनों डॉक्टरों को अपने काम में जुट जाना था। उन्हें पर्थ से सिंगापुर होते हुए मुंबई लौटना था।


सिंगापुर एयरलाइन की उनकी फ्लाइट ने 11 अप्रैल की रात 9 बजकर 10 मिनट पर उड़ान भरी। फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया के आसमान में करीब 35 हजार फीट की ऊंचाई पर थी, तभी रात के 10:30 बजे पायलट की अनाउंसमेंट से उनकी नींद खुल गई। फ्लाइट में 63 साल की ऑस्ट्रेलियन यात्री एनी को अचानक बहुत पसीना आने लगा और वे बेहोश हो गईं। पायलट कह रहा था कि फ्लाइट में मौजूद जो भी डॉक्टर हों, वे मदद के लिए आगे आएं। दोनों डॉक्टर ये सुनते ही सक्रिय हो गए। उन्होंने एनी को सीपीआर (कार्डियो पल्मनरी रेसुसिटेशन) देना शुरू किया, जिससे वे होश में आ गईं। लेकिन, उसकी नब्ज अभी भी बहुत धीमी थी, डॉक्टरों ने ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए एनी को ऑक्सीजन सपोर्ट लगाया। उन्हें आशंका थी कि एनी को हृदय संबंधी कोई समस्या थी। डॉक्टरों ने उन्हे सबलिंग्युअल सॉर्बिट्रेट, एस्पिरिन दी और उनकी जीभ के नीचे ग्लिसरिल ट्राइनाइट्रेट का स्प्रे भी किया ताकि उनकी धमनियां फैल जाएं और रक्त प्रवाह में कोई बाधा न आए। प्लेन का क्रू न सिर्फ उन्हें आवश्यक चीजें उपलब्ध करवा रहा था, बल्कि उसी समय करीब 300 परेशान यात्रियों को शांत रखने के लिए भी मेहनत कर रहा था।


रात के 12:30 बजे पायलट ने फ्लाइट को लौटाकर उलुरु एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करने का प्रस्ताव रखा। उलुरु मध्य ऑस्ट्रेलिया के अंत में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। केबिन क्रू आपस में बात करने लगा कि अगर इमरजेंसी लैंडिंग होगी तो बाकी के 300 यात्रियों को बहुत परेशानी होगी। उन्हें रात में होटल में रखना होगा और अगले दिन दूसरी फ्लाइट से भेजने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। हालांकि, वे एक जान बचाने के लिए इस परेशानी को उठाने के लिए भी तैयार थे। निर्णय जल्द से जल्द लिया जाना था, क्योंकि फ्लाइट इंटरनेशनल एयर स्पेस में प्रवेश कर रही थी, जहां पहुंचने के बाद एविएशन इंडस्ट्री के प्रोटोकॉल बहुत ज्यादा बदल जाते हैं। 


चूंकि फ्लाइट में आईसीयू के ज्यादातर उपकरण और इलाज के लिए जरूरी दवाइयां मौजूद थीं, इसलिए डॉक्टर दंपती ने मरीज का इलाज फ्लाइट में ही जारी रखने का निर्णय लिया। सिर्फ एक मोबाइल टॉर्च की रोशनी में उनके हाथ में एक विशेष आईवी लाइन इंजेक्ट करना बहुत कठिन था। लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ नीता को बच्चों की मुश्किल से मिलने वाली नसों में आईवी लाइन इंजेक्ट करने का अनुभव था, इसी कारण वे पहले ही प्रयास में एनी के शरीर में आईवी लाइन इंजेक्ट करने में सफल रही। पूरे सफर के दौरान वे दोनों एक दूसरे के मिले-जुले कौशल से एनी की जान बचाने में सफल रहे, उनके प्रयासों से रात के 2:30 बजे सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट पहुंचने से काफी पहले ही एनी की हालत में सुधार आ चुका था। एनी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां पता चला कि वे हिपोक्सिया से जूझ रही थी। इसमें मरीज के शरीर को आवश्यक ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। 


जैसे एक आइसक्रीम में चेरी लगा देने से वह ज्यादा सुंदर और स्वादिष्ट बन जाती है, उसी तरह डॉक्टर दंपती की आइसक्रीम जैसी छुट्टियां सिंगापुर एयरलाइन के स्टाफ और यात्रियों द्वारा उन्हें दिए गए स्टैंडिंग ओवेशन (चेरी) की वजह से एक न भूलने वाली यात्रा बन गई। डॉक्टर दंपती इस शनिवार को भारत लौटे हैं।

 

फंडा यह है कि  ज़िंदगी भी आइसक्रीम जैसी है। इस पर चेरी लगाते रहे ताकि यह सुंदर, स्वादिष्ट बन सकें। यानी कुछ ऐसा करें जो बाकी लोग दूसरों के लिए नहीं कर पा रहे। 
 

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