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मैनेजमेंट फंडा / हर घर को ‘स्मार्ट होम' बनाना अगला बड़ा बिजनेस है



Smart Home Making Next Big Business
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Smart Home Making Next Big Business

  • आईआईटी दिल्ली के छात्र प्रांजल के आविष्कार से तीन कमरों के घर को स्मार्ट होम में तब्दील करने में केवल 65 हजार रुपए का खर्च आएगा

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 12:39 AM IST

आजकल हमारे घर में कई तरह के रिमोट मौजूद हैं, जिस वजह से हम में से बहुत से लोगों को कई बार इस बात की शंका होती है कि कहीं हमने किसी डिवाइस को चालू तो नहीं छोड़ दिया। खासतौर पर तब, जब हम किसी पार्टी में या थिएटर जाने के लिए घर से बाहर निकलते हैं। हमेशा हमारा मन यह आता है कि काश हम एक बार फिर घर जाकर चेक कर सकते कि हमने सभी उपकरणों को बंद कर दिया है, खासतौर पर बिजली की ज्यादा खपत करने वाले उपकरण जैसे-गीजर।

 

साथ ही हमने कई बार, खासकर सर्दियों में यह भी महसूस किया है कि गीजर के शेड्यूलिंग फीचर की मदद से हम इसे पहले से ही चालू करके रख दें, ताकि जब हम जागें या काम से घर लौटें तो हमें पानी गर्म मिले। अगर बुजुर्ग हैं तो बार-बार उपकरणों को चालू या बंद करने के लिए उठना दर्दनाक होता है। इसके अलावा अगर छुट्टियों पर हैं तो  बिजली के कारण होने वाली दुर्घटना का डर छुट्टियों के मजे को पूरी तरह से बर्बाद कर सकता है।
अगर आप सोच रहे हैं कि किस बड़े शहर में और कौन-सी कीमत पर इस तरह की समस्या का समाधान मिलेगा, तो जवाब सुनकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे! राजस्थान के कोटा में रहने वाले प्रांजल कचोलिया अपने तीन कमरों के एक साधारण फ्लैट को स्मार्ट होम में बदलना चाहते थे। एक ऐसा स्मार्ट घर, जिसमें लगाए गए उपकरणों को दुनिया के किसी भी कोने से सिर्फ मोबाइल फोन से कंट्रोल किया जा सके। इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय उत्पाद के लिए मार्केट रेट पर उन्हें जो कोटेशन मिला उसमें 18 लाख रुपए का खर्च बताया गया।
आईआईटी दिल्ली के तीसरे वर्ष के छात्र प्रांजल को यही लगा ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स(इंटरनेट नियंत्रित)'  के सिद्धांत पर आधारित इतनी महंगी टेक्नोलॉजी भारत में कोई आम आदमी कैसे अपनाएगा? इसीलिए 18 महीने पहले उन्होंने चार लोगों की एक टीम बनाई और इस दिशा में रिसर्च शुरू की। वे अपने परिवार और परिचितों को अपने संभावित उत्पाद की क्षमता को समझाने में सफल रहे और उन्होंने शोध व अनुसंधान के लिए पर्याप्त धन भी जुटा लिया। रिसर्च के दौरान उन्होंने सुनिश्चित किया कि वे कम लागत वाले अच्छी गुणवत्ता के इंडस्ट्रियल-ग्रेड कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करेंगे, जो ज्यादा टिकाऊ होंगे लेकिन, इनका इस्तेमाल स्मार्ट होम के लिए पहले नहीं किया गया।

सौभाग्य से उन्हें सफलता मिली और पांच महीने पहले ही वे एक पूरी तरह से इनोवेटिव डिजाइन लेकर आए। इस मॉड्यूल का नाम उन्होंने ‘ईडन स्मार्ट होम्स' रखा है और पिछले पांच महीनों से वे अपने उत्पादों का कोटा, जयपुर और दिल्ली में परीक्षण कर रहे हैं।
इस मॉड्यूल को किसी भी स्विचबोर्ड के पीछे रखा जा सकता है और ये घर के वाई-फाई राउटर से जुड़ा होता है। इस तरह इसे स्मार्टफोन की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए एक अमेजन सर्वर खरीदा है। एक बार जब स्मार्टफोन के जरिए कोई कमांड भेजी जाती है तो मॉड्यूल स्विचबोर्ड के साथ मिलकर काम करता है। हर स्विचबोर्ड का एक मॉड्यूल होता है और प्रांजल के पास एयर-कंडिशनर और गीजर जैसे बिजली की ज्यादा खपत करने वाले उपकरणों के लिए अलग मॉड्यूल है।

इस आविष्कार के बाद अब तीन कमरों के घर को स्मार्ट होम में तब्दील करने के लिए 65 हजार रुपए से ज्यादा का खर्च नहीं हो सकता, जबकि बंगलों के लिए कस्टमाइज किए मॉड्यूल थोड़े अलग होते हैं। इस उत्पाद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें इस्तेमाल सामग्री वायरलेस हैं, जिसका मतलब है कि अब आपको पूरे घर में तार डालने की और एक्सटर्नल हब लगाने की भी जरूरत नहीं है, जो बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड में जरूरी होता है।
स्टार्ट-अप टेक्नोलॉजी का हिस्सा होने के नाते उन्होंने इसके लिए पेटेंट दर्ज कराया है। इस उत्पाद की एक खास बात यह भी है कि हाई-वोल्टेज में उतार-चढ़ाव होने पर यह फ्रीज हो जाता है और पूरे घर में बिजली की आपूर्ति को काट देता है, जिसे कोई भी मुख्य इलेक्ट्रिकल बोर्ड पर स्विच दबाकर दोबारा चालू कर सकता है।

प्रांजल फिलहाल बड़े बिल्डरों के साथ काम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन, वे देशभर में विस्तार के लिए निवेशकों को अपने साथ जोड़ने की इच्छा भी रखते हैं। फंडा यह है कि स्मार्ट होम का निर्माण अगला बड़ा बिज़नेस नहीं है बल्कि मौजूदा घरों को स्मार्ट होम में बदल देना ही बड़ा बिज़नेस है।

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