मैनेजमेंट फंडा / पैरेंटिंग 3.0 को समझने और अपनाने का वक्त आ गया

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

Jan 31, 2020, 12:51 AM IST

आपको वह खबर याद होगी जिसमें लग्जरी में जीने वाले अपने इकलौते बेटे को असल जिंदगी दिखाने के लिए एक गुजराती कारोबारी ने कोच्चि भेज दिया था, जहां उसे बिना पहचान दिखाए एक महीने अपने दम पर गुजर-बसर करना था। यह व्यापारी सूरत की 6000 करोड़ की डायमंड इंडस्ट्री का मालिक है और दुनिया के 71 देशों में उनका कारोबार चलता है।

उनका 21 साल का बेटा द्रव्य ढोलकिया 2016 में जब अमेरिका से एमबीए कर रहा था और छुट्टियों में भारत आया था, तभी उसने पिता की चुनौती स्वीकार की और सिर्फ तीन जोड़ी कपड़े और सिर्फ 7000 रुपए लेकर कोच्चि पहुंच गया। हम सब जानते हैं कि कैसे इस लड़के ने दिन गुजारे, कहां सोया, कहां काम किया और क्या खाया-पीया? जबकि उसे मलयालम भाषा का एक शब्द भी नहीं आता था। यह पैरेटिंग 2.0 का एक उदाहरण है, क्योंकि हम भारतीय अपने बच्चों को ‘आंचल की छांव’ में छिपाकर रखते हैं और उन्हें जिंदगी की सच्चाइयों से रूबरू नहीं कराते।


अब, मॉस्को के मिखाइल फ्रिडमैन का उदाहरण लेते हैं जो हमें 2.0 से आगे 3.0 पैरेंटिंग सिखाता है। मिखाइल 13.7 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। इन्होंने अपने बेटे को पहले से बता दिया है कि वे अपनी संपत्ति परोपकार के लिए दान कर देंगे।

इसलिए उनके बेटे अलेक्जेंडर फ्रिडमैन ने अपने स्कूल की पढ़ाई के दिनों में ही यह समझ लिया था कि उसे विरासत में पिता की दौलत नहीं मिलेगी। मिखाइल अल्फा ग्रुप के संस्थापकों में से एक हैं जो उन्होंने अपने दो साथियों जर्मन खान और एलेक्सी कुजुमिचेव के साथ मिलकर कम्युनिस्ट शासन के अंतिम दिनों में शुरू किया था।


आज रूस के इस अरबपति का 19 साल का बेटा मॉस्को के बाहरी इलाके में 500 डॉलर महीने किराए वाले दो कमरों के फ्लैट में रहता है। लंदन हाई स्कूल से पिछले साल ग्रेजुएट करने के बाद वह खुद अपना बिजनेस कर रहा है और काम पर जाने के लिए सब-वे ट्रेन का इस्तेमाल करता है। पांच महीने पहले जूनियर फ्रिडमैन ने सिर्फ पांच कर्मचारियों के साथ डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी एसएफ डेवलपमेंट शुरू की थी और वर्तमान में इसकी कमाई 4,05,000 डॉलर है।

उसका दूसरा कारोबार मॉस्को के रेस्तरांओं में हुक्का प्रॉडक्ट पहुंचाना भी है। इसके अलावा ‘ब्लॉगरपास’ के नाम से  एक ऑनलाइन मार्केटिंग फर्म है जो अगले महीने शुरू होने वाली है। वह दावा करता है कि ‘मैं जो खाता हूं, जहां रहता हूं, जहां सोता हूं और जो कुछ पहनता हूं वह सब कुछ मैंने खुद कमाया है।’


जूनियर फ्रिडमैन अपने पिता के हस्तक्षेप के बिना अपने दम पर जिंदगी से दो-दो हाथ कर रहा है, हालांकि उसे पिता के संपर्कों का फायदा मिल रहा है। उसकी कंपनी एसएफ डेवलपमेंट अन्य ग्राहकों के अलावा उसके पिता की रिटेल शॉप पर भी प्रोडक्ट पहुंचाती है। वह कहता है कि मेरे पिता के मैनेजर मेरे सामान को सिर्फ इसलिए अपनी अलमारियों में नहीं रखेंगे, क्योंकि मैं उनका बेटा हूं। मेरे प्रोडक्ट में इतना दम होना चाहिए।

 
कारोबार में लगे भारतीय पैरेंट्स अमूमन बच्चों को अपनी ही कंपनियों में काम करने देते हैं और फिर उन्हें कारोबार की बारीकियां सिखाते हैं। इसके अलावा विश्वस्तर पर, कुछ ऐसे भी हैं, जो यह मानते हैं कि उनकी विरासत बच्चों को ही मिलनी चाहिए। सीनियर फ्रिडमैन को रूस में सबसे कठोर कारोबारियों में से एक के रूप में जाना जाता है।

जब मीडिया ने उनके बेटे से यह सवाल पूछा कि आपने अपने पिता से क्या सबक सीखा? इस पर बेटे का जवाब था, ‘मैं अपने कारोबार को पिता की तरह आक्रामक और पारदर्शी तरीके से चलाना चाहता हूं। मेरे पिता ने मुझसे हमेशा यह कहा है कि तुम्हें हर प्रोजेक्ट में पार्टनर रखने चाहिए। अगर तुम कुछ कमाना चाहते हो, तो तुम्हें उसे साझा करने में भी सक्षम होना चाहिए।’

फंडा यह है कि  नए जमाने के माता-पिता के लिए पैरेंटिंग 3.0 अपनाने और अपने बच्चों को जिंदगी की कठोर सच्चाई से सामना कराने का वक्त आ गया है।

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