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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:झूठ वही बोल सकता है जिसकी याददाश्त तेज हो, वरना पकड़ा जाएगा, सच बोलने पर याद नहीं रखना पड़ता- कब क्या बोला था

5 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

सत्य अकेला चलता है। उसे कभी किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन झूठ को कई बातों का सहारा लेना पड़ता है। इसीलिए कहावत बन गई कि एक झूठ के पीछे कई झूठ बोलने पड़ते हैं। यजुर्वेद में लिखा है- ‘लोकं पृण छिद्रं पिण।’ तुम विश्व की रिक्तता को पूर्ण कर दो और छिद्रों को भर दो। रिक्तता को भरो अपने सद्कार्यों से और छिद्रों को भरो सत्य से। आजकल लोग उल्टा कर रहे हैं। अपनी कुटिलता से रिक्तता को भरते हैं और झूठ से छिद्रों को पूरा कर रहे हैं।

जैसे हमारे शरीर में रोएं के छिद्र होते हैं, ऐसे ही बारीक छिद्र रिश्तों के भी हैं। हर रिश्ते में बहुत सूक्ष्म छिद्र हैं और हमने उनमें ज्यादातर बार झूठ भर रखा होगा। आज घरों में जो वैक्यूम आ गया है उसकी भरपाई हम कुटिल निपुणता और अपनेपन के अभिनय से करते हैं। तो झूठ बोलने के मामले में अपने आप को एक बात समझाइए कि हमारी स्मृति बहुत कमजोर है, इसलिए झूठ नहीं बोल पाएंगे।

झूठ वही बोल सकता है जिसकी याददाश्त तेज हो। वरना पकड़ा जाएगा। सत्य बोलने का सबसे बड़ा फायदा है यह याद नहीं रखना पड़ता कि कब क्या बोला था। झूठ को याद रखना पड़ता है। यह भी सोचने का विषय है कि कम पढ़े-लिखे लोगों के मुकाबले ज्यादा शिक्षित लोग अधिक झूठ बोलते हैं। झूठ एक आयोजन है, सत्य एक सामान्य घटना है।

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