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अभिषेक तैलंग का कॉलम:इंटरनेट का भविष्य ‘वेब 3.0’ शुरू मेटावर्स बदलेगा शॉपिंग का ट्रेंड; भविष्य में हैकिंग से भी राहत मिलेगी

13 दिन पहले
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अभिषेक तैलंग, टेक गुरु और यूट्यूबर - Dainik Bhaskar
अभिषेक तैलंग, टेक गुरु और यूट्यूबर

कोरोनाकाल के पिछले दो सालों में जीवन बहुत बदल गया है। ऑफिस, अब हमारे घर में है। जरूरी चीजें, इंटरनेट क्लाउड में और मेटावर्स में डुबकी लगाने की तैयारियां शुरू होने लगी हैं। साल 2022 में भी टेक्नोलॉजी के ऐसे कई ट्रेंड्स देखने को मिलेंगे, जो हमारे लिए भविष्य की राह आसान करेंगे। 80 के दशक से आज तक इंटरनेट ने लंबा सफर तय किया है। आज से 20 साल पहले तक इंटरनेट नोटिस बोर्ड की तरह था, जहां से सिर्फ जानकारी मिलती थी।

जानकारी देने वाले से बातचीत का जरिया नहीं था। मौजूदा इंटरनेट ‘वेब 2.0’ है, जहां जानकारी मिलती भी है और आप जानकारी देने वालों से बातचीत भी कर सकते है। यहां वक्त काटना मजेदार भी है और इंटरनेट के आम यूजर को अपनी पहचान भी मिली है। पर इंटरनेट के इस स्वरूप को काफी हद तक गूगल, फेसबुक (मेटा) जैसी कंपनियां ही नियंत्रित करती हैं। आप और हम नहीं। इंटरनेट पर मौजूद डाटा इन्हीं चुनिंदा कंपनियों के सर्वर पर होता है और इंटरनेट का तो एक ही नियम है, ‘जिसका डाटा, उसकी भैंस’, लेकिन ये तस्वीर जल्द ही बदलेगी और शुरुआत 2022 से होगी।

इंटरनेट के भविष्य या ‘वेब 3.0’ की शुरुआत हो चुकी है। इसे दुनिया डिसेंट्रलाइज़्ड-वेब (विकेंद्रित) के नाम से भी बुलाती है। ब्लॉकचैन से क्रिप्टोकरेंसी चलती है, वही टेक्नोलॉजी ‘वेब 3.0’ की नींव होगी। ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी में कोई भी डाटा, किसी एक यूजर के कंप्यूटर या किसी एक कंपनी के सर्वर पर नहीं होता, बल्कि दुनियाभर के लाखों-करोड़ों कंप्यूटर्स में थोड़ा-थोड़ा बंटा होता है।

ठीक उसी तरह ‘वेब 3.0’ में भी इंटरनेट कुछ चुनिंदा सर्वर से नहीं बल्कि दुनिया भर में इंटरनेट से जुड़े हर डिवाइज़ की मदद से चलेगा। जिससे मौजूदा वक्त में इंटरनेट को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश में जुटी कंपनियों का वर्चस्व खत्म होगा और इंटरनेट सही मायने में ‘लोकतांत्रिक’ बनने की ओर चल पड़ेगा। ‘वेब 3.0’ की एक और खूबी होगी कि इसे हैक कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। क्योंकि हैकर्स को एक छोटा-सा डाटा चुराने के लिए दुनिया भर के लाखों कंप्यूटरों को एक साथ हैक करना पड़ेगा।

2021 के खत्म होते-होते टेक्नोलॉजी की दुनिया से ताल्लुक रखने वालों ने एक नया शब्द सीखा-‘मेटावर्स’। हममें से ज्यादातर लोगों के लिए मेटावर्स समझना वैसा ही है, जैसे 80 के दशक से पहले इंटरनेट था। फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां मेटावर्स को वैसा समझाना चाहती है जैसे मार्वल की फिल्मों में आयरनमैन कमाल दिखाता है। 2022 और आने वाले कई सालों तक मेटावर्स हमारे जीवन का हिस्सा रहेगा।

सबसे ज्यादा असर गेमिंग की दुनिया में देखने को मिलेगा, जहां अब वर्चुअल, ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी टेक्नोलॉजी का सही मायने में उपयोग हो सकेगा। वहीं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी मेटावर्स धीरे-धीरे छाएगा। ऑनलाइन शॉपिंग का तरीका बदल जाएगा। आप वेबसाइट पर ही कपड़ों का ट्रायल ले सकेंगे, चीजें खरीदने से पहले वर्चुअली उन्हें परख सकेंगे। साथ ही मेटावर्स पर ट्रेनिंग, जॉब इंटरव्यूज़ जैसी चीजें भी होंगी, जिससे कॉर्पोरेट सेक्टर में भी इसके कई इस्तेमाल होंगे।

क्रिप्टोकरेंसी अब कोई नई बात नहीं रही। हम में से कई लोग इस भविष्य की कुंजी में निवेश कर रहे हैं या करना चाहते हैं। यहां भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए और निवेश करना सिखाने के लिए कई एपनुमा कोचिंग इंस्टीट्यूट खुल गए हैं। जिससे आप अपने स्मार्टफोन के ही जरिए क्रिप्टोकरेंसी खरीद और बेच सकते हैं।

2022 में क्रिप्टोकरेंसी के क्षेत्र में जो सबसे बड़ी बात होगी वो ये कि भारतीय सरकार क्रिप्टोकरेंसी के बारे में क्या और किस तरह के नियम-कानून लेकर आती है। 2021 में भी सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन के लिए कदम आगे बढ़ाए, लेकिन रेगुलेशन की तरफ असली दौड़ तो 2022 में ही होगी। ऐसा लग रहा है कि सरकार भी क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को पूरी तरह से नकार नहीं रही है। इसीलिए सरकार क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से पहले, नियम-कायदों का खाका तैयार करना चाह रही है। जो एक नजर से अच्छा कदम भी होगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)