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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:अभिनय की लंबी पारी खेलने के बाद फिर खेती कर रहे हैं वाकई धरतीपुत्र धर्मेंद्र, अपराजेय योद्धा हैं

2 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

आज अभिनेता धर्मेंद्र का जन्मदिन है। गौरतलब है कि धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के फगवाड़ा में हुआ था। उनके पिता अत्यंत अनुशासित स्कूल शिक्षक थे। धर्मेंद्र को फिल्म देखने का जुनून था और पकड़े जाने पर वे अपने पिता से मार खाते थे। बड़े भाई अजीत सिंह उनके फिल्म देखने के लिए पैसे देते थे और मार खाने से भी बचाते थे। अजीत ने धर्मेंद्र को मुंबई जाकर सपना पूरा करने के लिए प्रेरित किया। फिर क्या था धर्मेंद्र मुंबई आए और वहां मारिया गेस्ट हाउस में रुके। दरअसल, मुंबई में बांद्रा के मारिया गेस्ट हाउस में संघर्षरत कलाकार रहते थे।

एक दिन धर्मेंद्र स्टूडियो के चक्कर लगा-लगाकर थके मांदे गेस्ट हाउस लौटे। उन्हें बड़ी भूख लगी थी परंतु जेब खाली थी और भूख से हालत खराब थी। तब एक साथी ने उन्हें पेट भर भोजन करवाया। बहरहाल, संघर्षों के बाद धर्मेंद्र को फिल्मों में कुछ छोटी भूमिकाएं मिलीं। बिमल राय की नूतन अभिनीत फिल्म ‘बंदिनी’ में उन्हें चरित्र भूमिका मिली। निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी ने धर्मेंद्र को ‘हम भी तेरे दिल भी तेरा’ में नायक की भूमिका दी। फिल्म को आंशिक सफलता मिली। धर्मेंद्र ने सितारा बनने के बाद हिंगोरानी की कई फिल्मों में मुफ्त में ही काम किया।

विख्यात फिल्म ‘शोले’ की कथा तो वैसे डाकू गब्बर सिंह और संजीव कुमार की थी परंतु धर्मेंद्र, अमिताभ को उसमें महत्व मिला। फिल्म में जया बच्चन, हेमा मालिनी नायिकाएं रहीं। ‘शोले’ के लिए बेंगलुरु के निकट गांव का सेट लगाया गया था। फिल्म इतनी हिट हुई की बाद में उस लोकेशन को निर्देशक रमेश सिप्पी के सरनेम सिप्पी नगर के नाम से जाना गया और वह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी रहा। बहरहाल, धर्मेंद्र ने फिल्म जगत में लंबी पारी खेली है। उन्होंने सफलता मिलने के बाद एक भव्य बंगले का निर्माण किया।

गृह प्रवेश के अवसर पर जब राज कपूर ने उनसे पूछा कि भवन कितना भव्य तब धर्मेंद्र कहा कि पाजी 25 मंजरिया बिछ सकती हैं। ज्ञातव्य है कि पंजाब में खाट को मंजरी कहते हैं। अत: धर्मेंद्र ने अपने भोलेपन को सदा बनाए रखा है। ज्ञातव्य है कि धर्मेंद्र ने अपने प्रोडक्शन में बनाई गई फिल्म ‘सोचा ना था’ में भाई अजीत सिंह के पुत्र अभय देओल को अवसर दिया। फिल्म के निर्देशन का मौका इम्तियाज अली को मिला। इस फिल्म को आंशिक सफलता मिली। इम्तियाज अली ने इसी कथा में थोड़ा फेरबदल करके करीना कपूर व शाहिद कपूर अभिनीत सफल फिल्म ‘जब वी मेट’ बनाई।

गौरतलब है कि धर्मेंद्र के भतीजे अभय देओल, संयुक्त परिवार से अलग एक फ्लैट में रहते हैं। उनकी विचार प्रक्रिया परिवार में सबसे अलग है। धर्मेंद्र ने अपने पुत्र सनी देओल को राहुल रवैल के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बेताब में प्रस्तुत किया। ‘बेताब’ सफल रही, राहुल ने सनी के साथ ‘अर्जुन’ बनाई। राजकुमार संतोषी की मीनाक्षी शेषाद्री अभिनीत फिल्म ‘दामिनी’ में भी सनी ने महत्वपूर्ण पात्र अभिनीत किया था।

एक दौर में धर्मेंद्र ने बेतहाशा शराब पी है। लेकिन विगत कुछ वर्षों से उन्होंने शराब से तौबा कर ली है। पहले उन्होंने जितनी शराब पी थी अब विगत वर्षों से उतना मट्ठा पी रहे हैं। क्योंकि यकृत को अवसर दिया जाए तो वह स्वयं को ठीक करने वाला अंग है। धर्मेंद्र ने मुंबई से पुणे जाने वाले मार्ग के निकट लगभग सौ एकड़ का फार्म हाउस बनाया हुआ है।

आजकल वे अधिकतर समय अपने फार्म हाउस में बिताते हैं। पंजाब का किसान पुत्र अभिनय की लंबी पारी खेल कर फिर खेती कर रहा है। पंजाब के किसान अलग मिट्टी से बने होते हैं। इसलिए वहां का किसान धरती पुत्र होते भी एक योद्धा है। धर्मेंद्र अपने पोते को अभिनय का दूसरा अवसर देना चाहते हैं। कथा और निर्देशक की तलाश जारी है। वैसे धर्मेंद्र का विशाल बंगला नए कलाकारों का गेस्ट हाउस मारिया बन चुका है। वाकई, धरतीपुत्र धर्मेंद्र, अपराजेय योद्धा हैं।