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अजय पीरामल का कॉलम:एजुकेशन-इनोवेशन मिल जाएं तो हमें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा, देश की रीढ़ 4.25 करोड़ उद्यमी हैं, जिनके पास नई सोच है

6 महीने पहले
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अजय पीरामल चेयरमैन पीरामल ग्रुप - Dainik Bhaskar
अजय पीरामल चेयरमैन पीरामल ग्रुप

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में प्रत्येक भारतीय को पिछले सात दशकों में हुई सामाजिक-आर्थिक प्रगति पर गर्व करना चाहिए। संशयवादियों को विश्वास नहीं था कि भारत आगे बढ़ सकेगा या एक डोर में बंधा रह पाएगा। पर भारत ने इन चुनौतियों को ताकत में बदला और आज हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से हैं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। हमने सर्विस इकोनॉमी में ताकत विकसित की है। लेकिन हम सभी के लिए कुछ सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को देखना महत्वपूर्ण है, जिन पर विकास के लिए ध्यान देने की आवश्यकता है।

कोई पीछे न रह जाए : विकासोन्मुख विकास के लिए सरकार ने एक के बाद एक नीतिगत उपाय किए हैं। 112 एस्पिरैशनल डिस्ट्रिक्ट इसका उदाहरण हैं कि कैसे स्वदेशी चीजों पर ध्यान केंद्रित कर और सूचकांकों में सुधार कर सामाजिक-आर्थिक प्रगति को पिछड़े तबके तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

नीति आयोग के जरिए सरकार ने इन एस्पिरैशनल डिस्ट्रिक्ट को बदलने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिन्होंने प्रमुख सूचकांकों में अब तक धीमी प्रगति दिखाई है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जटिल जनसांख्यिकीय, भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को संबोधित करना है। लोकल प्लेयर्स और सरकार के बीच हाइपर-लोकल सहयोग का उद्देश्य समुदायों की शक्ति का लाभ उठाकर बड़े पैमाने और गति से व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना है।

शिक्षा व इनोवेशन भविष्य की बुनियाद: भारत ने 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होने के लक्ष्य के आधे रास्ते को पार कर लिया है। लक्ष्य को प्राप्त करने और आगे बढ़ने के लिए अब भविष्य के लिए टैलेंट पूल बनाने के लिए शिक्षा पर जोर देना महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) प्रारंभिक से उच्च शिक्षा की ओर सही दिशा में एक कदम है।

एनईपी का लक्ष्य 2040 तक शिक्षा प्रणाली को बदलना और इसे न केवल वर्तमान विकास उद्देश्यों बल्कि भविष्य के लक्ष्यों के अनुरूप बनाना है। यह फ्रेमवर्क शिक्षा के प्रति समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता को पहचानता है, जहां व्यावसायिक व शैक्षणिक विषयों के बीच कोई अलगाव नहीं है। व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा में लाना जरूरी है क्योंकि व्यावसायिक कौशल से युवा रोजगार और उद्यमशीलता के अवसरों के लिए तैयार होंगे।

भारत उद्यमियों का देश है और मेरा मानना है कि शिक्षा के माध्यम से मजबूत नींव बनाने से उद्यमशीलता को और बढ़ावा मिलेगा। हमारे स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है और हमने कई भारतीय स्टार्ट-अप को यूनिकॉर्न बनते देखा है। इस इकोसिस्टम को भारत में और नीचे लाने की जरूरत है, जहां टियर 2 और 3 कस्बे और शहर हैं। हमें माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइज की भावना को भौगोलिक क्षेत्रों में बढ़ावा देना और उन्हें प्रोत्साहित करना होगा। इसमें टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभाने वाली है।

आज बैंक और एनबीएफसी डिजिटल और भौतिक मॉडल के मिले-जुले प्रयासों से अंदरूनी इलाकों तक पहुंचने में सक्षम हैं। ये न केवल उत्पादों-सेवाओं की उपलब्धता, बल्कि उद्यमों के लिए आवश्यक पूंजी भी सुनिश्चित करते हैं। एमएसएमई सेगमेंट में वृद्धि से रोजगार पैदा होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। देश की सबसे बड़ी ताकत उसके उद्यमियों की सरलता और उनकी मजबूत इच्छाशक्ति है। देश की रीढ़ 4.25 करोड़ उद्यमी हैं, जो अपने व्यवसायों को बढ़ाने के लिए नए-नए तरीके खोज रहे हैं।