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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:वर्तमान में अस्पताल के गलियारों में गूंजता है...वादे भुला दें, कसम तोड़ दें, वो हालत पर अपनी हमें छोड़ दें

3 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

अस्पताल, डॉक्टर व नर्स पर किताबें लिखी गई हैं और फिल्में बनी हैं। अस्पताल प्रबंधन एक स्वतंत्र शाखा है। योग्य और समर्पित डॉक्टर होने के बाद भी त्रुटिपूर्ण प्रबंधन सब कुछ बिगाड़ देता है। लोभ लालच हर किले में सेंध मार देता है। कोई आश्चर्य नहीं कि ए. जे. क्रोनिन के लिखे लिखें उपन्यास का नाम ही ‘द सिटाडेल’ है जिसकी प्रेरणा से विजय आनंद ने ‘तेरे मेरे सपने’ नामक फिल्म बनाई थी।

ज्ञातव्य है कि लेखक क्रोनिन स्वयं डॉक्टर थे। सॉमरसेट मॉम ने उपन्यास और नाटक लिखे हैं। उनका उपन्यास ‘ऑफ ह्यूमन बॉन्डेज’ आत्म कथात्मक कृति मानी जाती है। शेरलॉक होम्स की रचना करने वाले सर आर्थर कॉनन डॉयल भी डॉक्टर रहे हैं। कुछ डॉक्टरों ने शरीर और रोग विज्ञान की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद केवल लेखन किया है। पुणे के डॉक्टर जब्बार पटेल ने लता मंगेशकर द्वारा पूंजी निवेश करने पर ‘जैत रे जैत’ नामक फिल्म बनाई थी।

किसी विज्ञापन फिल्म में अभिनय करने वाले डॉक्टर से उसका प्रैक्टिस करने का अधिकार छीन लिया जाता है। पारंपरिक बात है कि डॉक्टर हिपोक्रेटिस शपथ लेता है कि वह रोगियों में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। व्यक्तिगत रिश्ते नातों से परे जाकर सर्जन का चाकू चलता है। अगर रोगी ने कभी उसका अहित भी किया है तो वह बदले की भावना से काम नहीं करेगा।

हिपोक्रेटिस शपथ डॉक्टर के लिए बाइबिल में वर्णित ‘दस धर्मादेश’ की तरह होती है। इस परंपरा का प्रारंभ ग्रीक से हुआ। प्रदर्शन के समानांतर मंच पर प्रस्तुत रचना में अहंकारी सर्जन पैथोलॉजी विभाग में रपट आने का इंतजार नहीं करते हुए शल्य चिकित्सा प्रारंभ कर देता है, रोगी मर जाता है।

सर्जन की शिष्या रही सहायक अपने गुरु की शिकायत करती है। उस पर दबाव बनाया जाता है पर वह अडिग बनी रहती है। जुगाड़ू सर्जन किसी तरह स्वयं को निर्दोष घोषित कराने की कवायद करता है। एक शाम जब वह घर लौटता है तो उसकी पत्नी शयनकक्ष का दरवाजा बंद कर देती है। यह कार्य एक थप्पड़ की तरह गूंजता है।

इस विषय से प्रेरित अनेक फिल्में बनी हैं। खाकसार की ‘शायद’, श्रीधर की ‘दिल एक मंदिर’, असित सेन की शर्मिला टैगोर और राजेश खन्ना अभिनीत ‘सफर’ के एक गीत की पंक्ति है ‘आंचल का तेरे है तार बहुत, कोई चाक जिगर सीने के लिए सीने के लिए, जीवन से भरी तेरी आंखें मजबूर करें जीने के लिए’ अंग्रेजी भाषा में ‘कोमा’ और ‘आइलेस इन गेजा’ यादगार फिल्में बनी हैं।

हिरानी की ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ और ‘लगे रहो मुन्ना भाई के दशकों पूर्व किशोर कुमार अभिनीत फिल्म ‘धोबी डॉक्टर’ बनी थी। भविष्य में महामारी पर लिखे इतिहास में डॉक्टरों का परिश्रम और उनकी शहादत स्वर्ण अक्षरों में अंकित की जाएगी।

डॉक्टर का बीमा कराया जाता है उसके द्वारा की गई कथित त्रुटि पर कंपनी हर्जाना चुकाती है। कंपनी गहन छानबीन करती है उसके अपने जासूस भी होते हैं। सुलगती सरहदों पर तैनात सैनिकों की तरह देश के भीतर रोग से लड़ने वाले डॉक्टरों का भी आदर किया जाना चाहिए। सैनिक और सिपाही को बुलेट प्रूफ जैकेट दिया जाता है परंतु डॉक्टर के पास कोई जिरहबख्तर नहीं होता।

प्राय: देखा गया है कि मरीज के रिश्तेदार डॉक्टरों को पीट देते हैं। समाज में हिलोरें लेती हिंसा की लहर अब अस्पताल के किनारे से टकरा रही है। बुरहानपुर स्थित ‘ऑल इज वेल’ अस्पताल में तथाकथित निम्न वर्ग की महिलाओं को भरपूर प्रशिक्षण देकर इस काम के लिए तैनात किया गया है।

महिला पर हाथ उठाने पर गैर जमानती गिरफ्तारी की जा सकती है। बेचारे निरीह पुरुष की रक्षा का दायित्व महिला ही निर्वाह करती है। माना जाता है कि संगीत द्वारा भी उपचार किया जा सकता है। संगीत से पौधों में शीघ्र बढ़त होती है। राग और रोग का संबंध पुराना है परंतु व्यवस्था की भैंस के सामने बीन बजाना बेअसर होता है।