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थाॅमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:कोरोना के बीच 1.3 लाख इजरायली पर्यटक-निवेशक दुबई और अबुधाबी पहुंचे, क्या हम नए मध्य पूर्व का निर्माण होते देख रहे हैं?

10 महीने पहले
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थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार - Dainik Bhaskar
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार

वैश्विक महामारी के बीच कम से कम 1.3 लाख इजरायली पर्यटक-निवेशक दुबई और अबुधाबी पहुंचे। मुझे शुरू से ही यकीन रहा है कि इजराइल, यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान के बीच रास्ते खुलने से बड़ा बदलाव आएगा। हालांकि हम अभी शुरुआती दौर में ही हैं। फिर भी कुछ बड़ा होने की संभावना है।

इजरायल और मिस्र में शांति की स्थापना से इतर, इजरायल और लेबनान के ईसाइयों के संबंध, इजराइल और जॉर्डन के संबंध, जो पहले शीर्ष स्तर तक ही सीमित थे, अब पर्यटकों, छात्रों और कारोबार के माध्यम से निचले स्तर से चल रहे हैं।

दुबई और अबुधाबी में हिब्रू भाषा सिखाने वाले स्कूल में ऐसे अमीरातियों की भीड़ है, जो इजरायल में पढ़ना या बिजनेस करना चाहते हैं। इजरायल के मेकोरोट नेशनल वॉटर कंपनी ने बहरीन के साथ अपनी तकनीकें साझा करने की डील की है। और फिर 1.3 लाख इजरायली मेहमानों ने यूएई के पर्यटन उद्योग को तो बचाया ही है।

अगर अब्राहम समझौता आगे बढ़ता है और इजरायल और सऊदी अरब में सामान्यीकरण को भी शामिल किया जाता है, तो आधुनिक मध्यपूर्व के इतिहास में यह सबसे महत्वपूर्ण पुनर्संगठन होगा। इतिहासकार इतामार रैबिनोविख तर्क देते हैं कि ‘आज क्षेत्र में तीन गैर-अरब शक्तिशाली खिलाड़ी हैं, ईरान, तुर्की और इजरायल। तीनों ने अपने-अपने क्षेत्रीय आधार बना लिए हैं।

पहला, कतर के साथ तुर्की और उनके निकटवर्ती हमास, दूसरा सीरिया के साथ ईरान और उसके निकटवर्ती लेबनान, तीसरा इराक, यमन और इजरायल के साथ यूएई, बहरीन और अकथित रूप से सऊदी अरब व ओमान।’ वे कहते हैं कि इन तीनों आधारों के पारस्परिक प्रभाव ही आज मध्यपूर्व की राजनीति चला रहे हैं।

इजरायल के साथ यूएई के आने से 2 ईको सिस्टम साथ आ रहे हैं। इजरायल ऐसा समाज रहा है, जिसने कई साल तक पड़ोसियों की नफरत झेली और उसके पास तेल नहीं था। इसलिए उसने पानी, सौर ऊर्जा, सायबर, मिलिट्री, वित्त और कृषि जैसे क्षेत्रों में नवाचार अर्थव्यवस्था के जरिए खुद का वैश्विक प्रभाव बनाया। दूसरी तरफ यूएई दशकों तक तेल की प्रचुरता से अब तेल की कमी की ओर बढ़ रहा है। इजरायल की तरह नवाचार और आंत्रप्रेन्योरशिप आधारित ईको सिस्टम बना रहा है।

21वीं सदी के लिए यूएई की विकास की रणनीति है आधुनिकता का अरब मॉडल, एक विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था, वैश्वीकरण और अंतर-धार्मिक सहिष्णुता। यूएई अब भी पूर्णत: राजतंत्र है और बहुदलीय लोकतंत्र की उसकी योजना नहीं है। लेकिन वह बेहतर लैंगिक समानता, खुला शिक्षा तंत्र व धार्मिक बहुवाद चाहता है। यूएई के नए सामाजिक कानून इस दिशा में छलांग हैं।

उधर लेबनाई शिया अब रोज पूछ रहे हैं कि हम ईरान और हिजबुल्लाह जैसे उसके मिटते सहयोगियों के साथ क्यों रुके हैं, जो हमारे भविष्य को अतीत में दफना रहे हैं? यह ईरान और हिजबुल्लाह के लिए खतरनाक सवाल है। जहां तक सऊदी अरब का सवाल है, वह पहले ही इजरायल को अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दे रहा है।

लेकिन क्या वह यूएई का अनुसरण करते हुए इजरायल के साथ औपचारिक सामान्यीकरण करेगा? ऐसा हुआ तो यह इजराइली-अरब और यहूदी-मुस्लिम संबंधों के लिए बहुत बड़ी बात होगी। यह फैसला सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) का होगा। बाइडेन टीम अभी भी पता लगा रही है कि वह MBS से कैसे जुड़े, लेकिन अमेरिका, सऊदी अरब को फिलहाल सहयोगी मानना जारी रखेगा।

सऊदी को अब्राहम समझौते में शामिल करवाना उनकी सफलता सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका होगा। ऐसा हुआ तो उनकी भागीदारी इजरायली-फिलिस्तीनी दो-राज्य समाधान के लिए नई ऊर्जा पैदा कर सकती है, जो बदले में जॉर्डन और मिस्र के लिए इजरायल से संबंध सामान्य बनाना आसान कर सकता है। फिर आपके पास वाकई में एक नया मध्य पूर्व होगा।

मैं कुछ लोगों की इस चिंता का सम्मान करता हूं कि सऊदी अरब का इजरायल के साथ शांति स्थापित करना मोहम्मद बिन सलमान के लिए खोई प्रतिष्ठा पाने का साधन हो सकता है। लेकिन मैं नहीं मानता कि यह विरोध का कारण है। मध्य पूर्व में, बड़ा बदलाव अक्सर तब होता है, जब बड़े खिलाड़ी गलत कारणों से सही काम करते हैं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)