साधना शंकर का कॉलम:कोरोना की दूसरी लहर आम आदमी में छिपे हीरो को सामने लाई, इसके बादल छंटने पर यही नेकी याद रखी जाएगी

5 महीने पहले
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साधना शंकर, लेखिका - Dainik Bhaskar
साधना शंकर, लेखिका

देश में कोविड महामारी की भयावहता के बीच लोगों का एक-दूसरे को सहारा और मदद की अनगिनत कोशिशें देखने को मिलीं। चाहे वो सोशल मीडिया के जरिए हो, संस्था के माध्यम से या व्यक्तिगत रूप से, देश में कोविड की दूसरी लहर आम आदमी में छिपे हीरो को सामने लाई है। जब ये बादल छटेंगे, तब ये नेकी ही हम सब याद रखेंगे।

अगर कोई व्यक्ति और उसके अपने स्वस्थ हैं, तो नेमत ही है पर डर, बेबसी की भावना स्वस्थ लोगों को भी परेशान कर रही है। ये सवाल पीछा कर रहा है कि ‘मदद के लिए क्या मैं कुछ कर सकता हूं?’ इसका अहसास होना जरूरी है कि हम सब जहां भी हैं, अपना योगदान दे सकते हैं।

पहला और सबसे जरूरी योगदान तो हम खुद की देखभाल और कोविड अनुकूल व्यवहार करके दे सकते हैं। ये कहना आसान है, करना मुश्किल। लॉकडाउन और कर्फ्यू से हम थक गए हैं। हम बस बाहर जाना चाहते हैं, फिर जीना चाहते हैं। पर जब तक जरूरी न हो, कृपया मत निकलें। जाना ही पड़े तो डबल मास्क के साथ दूरी बनाए रखें। अभी कोविड से लड़ने में सबसे जरूरी योगदान होगा कि जहां तक हो, कोशिश करें कि बीमार न पड़ें।

विज्ञान की सुनें और उसकी राह पर चलें। रोकथाम उपाय के तौर पर सोशल मीडिया पर आने वाली हर चीज न आजमाएं। जो डॉक्टर कहें उसी पर ध्यान दें। ख्यात डॉक्टर्स टीवी पर मिथकों और अफवाहों पर लोगों को आगाह कर रहे हैं। वे यह मरीजों की देखभाल के बाद कर रहे हैं। हमें उनकी सलाह पर ध्यान देने और पालन करने की जरूरत है।

गिव (दान करें)- आज के समय में यही इकलौता जीवट शब्द है। जहां भी, जैसे भी कर सकें, दान करें- समय, पैसा, रक्त, भोजन, कपड़े, ज्ञान और सहानुभूति। आपके आस-पास ज्यादा जद्दोजहद करते कम भाग्यशाली लोग होंगे, उन तक पहुंचें। अकेले रहने वाले लोगों का फोन पर हालचाल लेना भी मदद का तरीका है। टीके के लिए ऑनलाइन पंजीयन में लोगों का मार्गदर्शन करें। मदद करने के अंतहीन रास्ते हैं- बस कर दीजिए।

खबरें और तस्वीरें साझा करने में व्यक्तिगत स्तर पर हम सबको जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। फेक न्यूज फैलाने का माध्यम न बनें, यदि किसी पोस्ट की सत्यता पर संदेह है तो उसे शेयर करने से बचें। ये हल्के में लेने वाला मामला नहीं है, जो बीमार हैं और उनकी देखभाल करने वाले लोगों के लिए गलत सूचना जीवन और मृत्यु का सवाल हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर हम सभी को एक और लहर के लिए तैयार रहना होगा और हर व्यक्ति को अपने अंदर बीमारी से लड़ने की ताकत पैदा करनी होगी। कसरत करें, संतुलित खाएं, एक रूटीन बनाएं, योग करें, अपनी रुचि का काम करें और सबसे जरूरी लोगों से जुड़े रहें।

अगर इस लहर ने हमें कुछ सिखाया है, तो वो ये है कि लोग ही मदद का सहारा हैं- जिन्हें आप जानते हो या नहीं। जब हममें से हर कोई कोशिश करेगा, तभी बीमारी से लड़ने की राह आसान होगी।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)