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चेतन भगत का कॉलम:अगर कोई युवा क्वाइट-क्विट कर रहा है तो सीनियर्स उसे एवरेज समझेंगे

10 दिन पहले
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चेतन भगत, अंग्रेजी के उपन्यासकार - Dainik Bhaskar
चेतन भगत, अंग्रेजी के उपन्यासकार

क्वाइट क्विटिंग ने इधर अनेक कामकाजी लोगों का ध्यान खींचा है। इसका मतलब है अपने जॉब में कम से कम काम करना, जितने प्रयासों की आवश्यकता है उससे कम प्रयास करना और उतना ही करना जितने की आपसे उम्मीद की जाती है। पांच बजे लैपटॉप बंद कर देना और ऑफिस से निकलते ही दिमागी और भावनात्मक रूप से उससे अलग हो जाना। सॉरी बॉस, मेरा हो गया। तो हमारा समाज अब इस मुकाम पर आ गया है, जिसमें नौजवानों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि वे खुद को काम में पूरी तरह से झोंक न दें।

आखिर वर्क-लाइफ बैलेंस को गड़बड़ाने और सेहत को दांव पर लगाने से क्या फायदा, जब आपको बदले में ज्यादा कुछ नहीं मिलने वाला? यकीनन, हमें सैलेरी की जरूरत है, जिसके लिए जॉब करना पड़ता है, लेकिन उसके लिए ज्यादा मेहनत क्यों करें? वैसे थ्योरिटिकली बात करें तो ऊपर दिए तर्कों में कुछ तो सच्चाई है। लेकिन अफसोस कि क्वाइट क्विटिंग व्यावहारिक नहीं। अगर कोई युवा क्वाइट-क्विट कर रहा है तो उसके सीनियर्स उसे औसत क्षमताओं वाला, प्रेरणाशून्य और निष्क्रिय समझेंगे। ये उसके लिए अच्छी बात नहीं होगी।

अगर आप क्वाइट क्विंटिंग कर रहे हैं तो आपके सीनियर्स को पता चल जाता है, वे आपको उसके आधार पर जज करते हैं और यह आपके करियर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। लेकिन इससे पहले कि हम क्वाइट क्विटिंग पर और बातें करें, एक दूसरे पहलू पर भी विचार कर लेना दिलचस्प होगा। एक कम्पनी के फाउंडर और सीईओ ने लिंक्डइन पर पोस्ट लिखते हुए युवाओं से आग्रह किया कि वे कड़ी मेहनत करें, जो कि क्वाइट क्विटिंग का पूरी तरह से विपरीत होगा।

मैं यहां उनकी पोस्ट जस की तस प्रस्तुत कर रहा हूं : ‘अगर आप 22 साल के हैं और जॉब में नए-नए आए हैं तो खुद को काम में झोंक दीजिए। अच्छा खाइए और फिट रहिए, लेकिन कम से कम 4-5 वर्षों तक दिन में 18 घंटे काम करने की तैयारी रखें। मैं अनेक ऐसे युवाओं को देखता हूं, जो इस बात से कंविंस हो चुके हैं कि उन्हें वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना चाहिए, परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, तरोताजा होकर ही काम पर लौटना चाहिए वगैरा वगैरा। ऐसा नहीं कि इन सब चीजों का महत्व नहीं है।

इनका महत्व है, लेकिन कॅरियर की इतनी शुरुआत में नहीं। शुरू में तो आपको काम की ही पूजा करनी चाहिए, फिर चाहे वह कोई भी काम हो। आप अपने करियर के पहले पांच सालों में जो मुकाम बनाते हैं, वह पूरे जीवन आपके काम आता है। तो रैंडम रोना-धोना मत कीजिए। दमखम दिखाइए और काम में जुट जाइए।’ वॉव, दिन में 18 घंटे काम! उत्साही सीईओ महोदय का कहना है कि अच्छा खाएं और फिट रहें लेकिन 18 घंटे काम करें।

सर, दिन में 24 घंटे होते हैं, जिनमें से कोई 18 घंटे काम करेगा तो बाकी के छह घंटों में वह कैसे अच्छा खा लेगा और तंदुरुस्त रह सकेगा? तब घर के कामकाज करने और रिलेशनशिप वगैरा की बात तो रहने ही दें। वैसे एक कर्मचारी को कितने घंटे सोना चाहिए? दो घंटे? यह सच है कि युवाओं को कड़ी मेहनत करनी चाहिए, लेकिन किस चीज के लिए? क्या आप अपने जीवन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मेहनत करते हैं? क्योंकि जीवन का मतलब केवल करियर नहीं होता।

इसमें हेल्थ और रिलेशनशिप्स भी शामिल हैं। हेल्थ तब होगी, जब आप खूब सोएंगे, कसरत करेंगे और पोषक आहार लेंगे। रिलेशनशिप्स का मतलब है दोस्तों, परिवार, अहम लोगों के साथ समय बिताना। अगर आप फिटनेस, नींद, भोजन और रिलेशनशिप्स में दिए समय को जोड़ लें तो आपके पास दिन में औसतन 10-12 घंटे का ही समय बचेगा, फिर आप चाहे कितने ही सुपर हार्ड वर्कर क्यों न हों। लेकिन अगर आप एकाग्रता से काम करते हैं तो उतना भी काफी है।

मनुष्यों को 18 घंटे काम करने की जरूरत है भी नहीं। वास्तव में बहुतेरे लोगों के लिए छह से आठ घंटे फोकस्ड होकर काम करना ही कठिन है। तो मेहनत जरूर करें, लेकिन मनुष्य के शरीर और दिमाग की जितनी क्षमताएं हैं, उनके भीतर ही। यह भी याद रखें कि क्वाइट-क्विटिंग जैसी चीजें लम्बे समय के लिए आपके काम नहीं आएंगी। अगर आप इसके बारे में सोच रहे हैं तो सम्भव है कि या तो आपको अपना काम पसंद नहीं है या आप अपने काम के माहौल के साथ सहज नहीं।

तब समस्या का बेहतर समाधान क्वाइट क्विट के बजाय क्वाइट वर्क होगा। क्वाइट वर्क यानी वह काम, जो आप अपने करियर और जीवन को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं। इसमें नया जॉब ढूंढना, नेटवर्किंग करना, कहीं और जाकर पढ़ाई करना, बिजनेस प्लान बनाना और हर वो चीज करना शामिल है, जो आपको अपने मौजूदा काम की झंझट से बाहर ले जाए। क्वाइट वर्क का मतलब है अपनी सिचुएशन बदलने के लिए इतनी खामोशी से काम करना कि आपके आसपास किसी को भनक तक न लगे।

क्योंकि आप अब भी अपना मौजूदा काम अच्छे से कर रहे होते हैं, भले ही वह आपको पसंद न हो। भीतर ही भीतर आप जानते हैं कि यह कुछ समय के लिए है। आप क्वाइट वर्क अपने हालात को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। हम अकसर अपने जीवन में उन हालात के बंधक बनकर रह जाते हैं, जिन्हें पसंद नहीं करते। हम में इतना धैर्य होना चाहिए कि उनसे बाहर आने के लिए काम करते हुए उनका सामना करते रहें। क्वाइट क्विटिंग करके काम में नाम खराब करना तो कोई समाधान नहीं है।

मामूली कामकाजी व्यक्ति क्या करे?
तो क्या आज के बिजनेस-ऑनर्स कर्मचारियों से यह उम्मीद करने लगे हैं कि वे 18 घंटे काम करेंगे? जहां एक तरफ कम से कम काम करने की वकालत करने वाले क्वाइट-क्विटर्स हैं तो दूसरी तरफ 18 घंटे काम की मांग करने वाले और रैंडम रोना-धोना पर ऐतराज़ जताने वाले भी हैं। ऐसे में एक मामूली कामकाजी व्यक्ति क्या करे? जैसा कि अकसर होता है, यहां भी दोनों अतियां गलत हैं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)