• Hindi News
  • Opinion
  • Column By Bibek Debroy And Aditya Sinha – Beneficial Use Of Ethanol In Fuel; Many Benefits Like Reduction In Petrol Prices, Benefits To Farmers And Reduced Carbon Emissions

बिबेक देबराॅय और आदित्य सिन्हा का कॉलम:ईंधन में एथेनॉल का इस्तेमाल फायदेमंद; पेट्रोल के दाम घटने, किसानों के लाभ और कार्बन उत्सर्जन कम होने जैसे कई फायदे

2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बिबेक देबराॅय (प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष) और आदित्य सिन्हा (अपर निजी सचिव, अनुसंधान) - Dainik Bhaskar
बिबेक देबराॅय (प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष) और आदित्य सिन्हा (अपर निजी सचिव, अनुसंधान)

वित्तीय मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 10 नवंबर को एथेनॉल की कीमत में मार्केटिंग वर्ष 2021-22 के लिए 1.47 रुपए का इजाफा किया है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाता है और गन्ने से भी इसका उत्पादन होता है। पेट्रोल में मिलाने के लिए शुगर मिल और डिस्टलरी से एथेनॉल खरीदने वाली इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियों को जीएसटी तथा परिवहन लागत भी वहन करनी होगी।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार ईंधन स्रोत के रूप में एथेनॉल को बढ़ावा दे रही है। कार्यक्रम के तहत ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। असम जैसे राज्य खुद की एथेनॉल नीति लाए हैं और ग्रीनफील्ड एथेनॉल उत्पादन औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए ओमएमसी को संयंत्र तथा मशीनरी की लागत की 20% तक सब्सिडी दे रहे हैं। एथेनॉल को बतौर ईंधन बढ़ावा देने के लिए चार मुख्य फायदे हैं।

(1) भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसलिए गन्ना किसानों को एथेनॉल-मिश्रित ईंधन से लाभ मिलेगा। भले ही चीनी की कीमतो में अस्थायी अस्थिरता रही हो, लेकिन पिछले एक दशक में कुल कीमत में कम ही बढ़ोतरी हुई। गन्ने की फसल पर रिटर्न अच्छा रहा है इसलिए किसान काफी गन्ना उगाते रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से भारत ने सरप्लस चीनी उत्पादन किया है।

साथ ही, भारत से चीनी निर्यात में तब तक स्पर्धा नहीं बढ़ेगी, जब तक सरकार निर्यात सब्सिडी नहीं देती। इस अतिरिक्त उत्पादन के कारण फसल की उचित कीमत पाना मुश्किल हो रहा है। अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतें भी कम होती हैं। इससे चीनी मिलों में नकदी की समस्या होती है और किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो पाता। दूसरी तरफ, चीनी की तुलना में एथेनॉल से वसूली तेजी से होती है। मिलें सीधे ओएमसी से अनुबंध कर सकती हैं, जिससे नकदी की समस्या हल हो जाएगी।

(2) भारत की तेल की 82% जरूरतें कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं। 2021 की पहली तिमाही में ही भारत के कच्चे तेल के निर्यात में 24.7 अरब डॉलर के साथ 190% का इजाफा हुआ। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने से कच्चे तेल की मांग घटेगी। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से सालाना 5 अरब डॉलर की बचत होगी।

भारत ने अब 2025 तक ई20 (20% एथेनॉल युक्त पेट्रोल) इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा है। केंद्र सरकार ने ओएमसी को सेंकड-जनरेशन एथेनॉल संयंत्रों में उत्पादित एथेनॉल की कीमत तय करने की छूट दी है। इससे ऑइल सेक्टर के सार्वजनिक उपक्रम भारत में आधुनिक बायोरिफाइनरी बना पाएंगे। एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ने के अलावा रोजगार भी बढ़ेगा, खासकर ग्रामीण भारत में।

(3) एथेनॉल युक्त ईंधन की औसत कीमत पेट्रोल से कम है। उदाहरण के लिए दो हफ्ते पहले ई85 ईंधन की कीमत फ्रांस में 58.59 रुपए थी। जबकि शुद्ध गैसोलिन 147 रुपए पर बिक रही थी। भले ही ये दरें फ्रांस की हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अगर हम भारत में ई20 इस्तेमाल करेंगे तो यह शुद्ध पेट्रोल से सस्ता पड़ेगा।

(4) एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और यह एक नवीकरणीय ईंधन है। चूंकि एथेनॉल के अणु में ऑक्सीजन होता है, इससे वाहन के इंजन द्वारा बेहतर कंबस्शन होता है। यह दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह भारत की पेरिस जलवायु समझौते और कॉप26 प्रतिज्ञाओं के अनुसार कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने में भी मदद करेगा। दुर्भाग्य से कॉप26 में जारी हुई इंटरनेशन एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में परिवहन के लिए ईंधन ही मांग में बायो-ईंधन की लागत महज 3% है। भारत द्वारा एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से यह आंकड़ा भविष्य में बढ़ेगा।

अब एथेनॉल के ज्यादा शुद्ध मिश्रणों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे ई80, ई85 और यहां तक कि ई100 (यानी 100% शुद्ध एथेनॉल) पर भी। वर्तमान में, भारतीय बाजारों में उपलब्ध कारों के इंजन मामूली अंशों के साथ भी एथेनॉल इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। इसके लिए गाड़ियों में फ्लेक्स-फ्यूल (मिश्रण वाले ईंधन) से चलने वाले इंजन होने चाहिए।

इस स्वच्छ ईंधन प्रौद्योगिकी को अपनाने के भारत के प्रयास में ऑटोमोबाइल उद्योग एक प्रमुख साझेदार होगा। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय परिवहन मंत्रालय देश में ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन बनाना अनिवार्य करने की प्रक्रिया में है। यह सभी के लिए अच्छा होगा क्योंकि इससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमत कम होगी और किसानों को फसल का समय पर भुगतान हो सकेगा।

भारत ब्राजील को देखे, जो एथेनॉल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। वह पहले ही अनिवार्य कर चुका है कि देश में बेचे जा रहे ईंधन में 27.5% एथेनॉल होना चाहिए। इसके अलावा, यह अमेरिका को एथेनॉल निर्यात भी करता है। भारत भविष्य में एथेनॉल का एक प्रमुख निर्यातक बनने का लक्ष्य भी रख सकता है।

(ये लेखकों के अपने विचार हैं)