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  • Column By Pt. Vijayshankar Mehta Close Your Eyes And Take A Deep Breath In The Time Of Anger, Then The Energy Emanating From The Cells Will Flow Towards Peace And You Will Get Rid Of Anger.

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:क्रोध के समय आंख बंद करके गहरी सांस लें तो कोशिकाओं से निकलने वाली ऊर्जा शांति की तरफ बहेगी और क्रोध का विसर्जन कर लेंगे

8 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

हर व्यक्ति हर काम या तो आजीविका के लिए कर रहा है या प्रतिस्पर्धा या मकसद भोग होता है। सब इन तीनों के पीछे लगे हैं। गीता में संकेत आया है कि इन तीनों में जब बाधा आती है तो क्रोध आ जाता है। लाख कसम खाओ, रोज संकल्प लो पर क्रोध है कि छूटता ही नहीं।

क्रोध के मूल में अहंकार है और यह अहंकार हमारी कोशिकाओं से उसकी शक्ति लेकर वेग बनाकर क्रोध के रूप में फेंक देता है। कोशिकाओं में कुछ शक्ति के कोष भी हैं जो सामान्य रूप से निष्क्रिय पड़े रहते हैं, पर तीन अवसरों पर सक्रिय हो जाते हैं- जब भोग में डूबते हैं, क्रोध में या शांति में डूबना चाहते हैं। उसी के अनुसार यह शक्ति देने लगते हैं और शक्ति जहां से आती है वो हैं कोशिकाएं।

मनुष्य के भीतर लगभग 30 लाख करोड़ कोशिकाएं हैं। सब अपना काम कर रही हैं। इसलिए क्रोध के समय आंख बंद करके गहरी सांस लें तो कोशिकाओं से निकलने वाली वही ऊर्जा शांति की तरफ बहेगी और क्रोध का विसर्जन कर लेंगे। इसलिए इस कोशिका से निकलने वाले प्रवाह का स्वाद-रूप बदलना है, क्रोध गुलाम हो जाएगा।