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लेफ्टि. जनरल एसए हसनैन का कॉलम:दुश्मनों की अवधारणाएं और सिद्धांत बदल रहे हैं, भारत अब ‘5जी’ युद्ध के लिए खुद को तैयार करने पर जोर दे

18 दिन पहले
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लेफ्टि. जनरल एसए हसनैन, कश्मीर में 15वीं कोर के पूर्व कमांडर - Dainik Bhaskar
लेफ्टि. जनरल एसए हसनैन, कश्मीर में 15वीं कोर के पूर्व कमांडर

युद्ध के साधनों में बदलाव हो रहा है और विरोधियों के दृष्टिकोण तथा सिद्धांत बदल रहे हैं। वहीं तकनीक में भी तेजी से विकास हो रहा है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान फिफ्थ जनरेशन वारफेयर (5जीडब्ल्यू, युद्ध की पांचवीं पीढ़ी) जीतेगा, लेकिन यह नहीं बताया कि किससे? भारत 80 के दशक से फोर्थ जनरेशन वारफेयर (4जीडब्ल्यू) के छद्म संघर्ष का सामना कर रहा है, पहले पंजाब और फिर जम्मू-कश्मीर में। फिर भी इस अवधि में, 1980 से 2021 के बीच भारत सात-आठ बार पारंपरिक सीमापार युद्ध के नजदीक पहुंचा। अब दिलचस्प बहस छिड़ी है कि क्या पारंपरिक संघर्ष अब भी भारत के लिए खतरों में एक महत्वपूर्ण है या क्या भविष्य में 4जीडब्ल्यू और 5जीडब्ल्यू संघर्ष हावी होंगे।

फिलहाल दुनिया युद्ध की चौथी से पांचवीं पीढ़ी में जा रही है। 4जीडब्ल्यू ने युद्ध और राजनीति, योद्धा और नागरिक के बीच के अंतर को धुंधला किया। इसकी आसान परिभाषा में ऐसे युद्ध शामिल हैं, जिनमें बड़े प्रतिभागियों में कोई एक देश नहीं, बल्कि हिंसक गैर-राष्ट्र कर्ता हैं। जैसे 80 के दशक में हुआ सोवियत-अफगान युद्ध अफगानिस्तान में कई देशों के हजारों इस्लामी योद्धाओं ने लड़ा। ‘गैर-राष्ट्र कर्ताओं’ का इस्तेमाल कर छद्म युद्ध की अवधारणा से राष्ट्र को खंडन करते रहने में मदद मिलती है। यही तरीका विभिन्न प्रयोजक राष्ट्रों ने चेचन्या, बोसनिया और जम्मू-कश्मीर में अपनाया।

5जीडब्ल्यू का अर्थ है धारणाओं और जानकारी का युद्ध। इसमें हिंसा इतने गोपनीय तरीके से फैलती है कि शिकार को पता भी नहीं चलता कि वह युद्ध का शिकार है या हार रहा है। यही गोपनीयता 5जीडब्ल्यू युद्धों को सबसे खतरनाक बनाती है। दरअसल 5जीडब्ल्यू सूचना क्रांति का नतीजा है। जब वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किए गए मनोवैज्ञानिक संदेश के माध्यम से दिमाग तक पहुंचना और पूरी आबादी के मानस को बदलना इतना आसान हो जाता है, तो संघर्ष में शामिल एक पक्ष अपने कथानक को लक्षित आबादी के मन तक पहुंचा देता है।

सैनिक, पुलिसकर्मी, नौकरशाह, छात्र, मीडिया, महिलाएं और समाज के अन्य विविध वर्ग सभी अलग-अलग तरीकों से शिकार होते हैं। यह सब संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति से सामने आया है, जहां जनसंचार माध्यम सक्षम करने वाले और मुकाबला करने में मदद करने वाले, दोनों हैं। जो पक्ष पहल करता है, जनसंचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है और फेक जानकारी की शक्ति जानता है, वही जीतता है।

भारत के विरोधी, पाकिस्तान और चीन की ऐसे युद्ध में महारत मानी जाती है। पाकिस्तान की एजेंसी इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) को 5जीडब्लूय के प्रायोजक के रूप में पहचाने जाने पर बहुत गर्व है। भविष्य में एलओसी पर पाकिस्तान की गतिविधियां सीमित रहेंगी लेकिन 5जीडब्ल्यू में निवेश कहीं ज्यादा होगा।

यह संयोग नहीं कि चीन ने भी बहुत पहले सूचना को हथियार बनाने में निवेश शुरू कर दिया था। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी में तेजी से वृद्धि की संभावना देखते हुए चीन ने ‘तीन युद्धों’, मीडिया, कानूनी और साइबर युद्ध की रणनीति अपनाते हुए इस बदलाव में भारी निवेश किया। हालांकि एक गलतफहमी है कि चीन आगे से सभी संघर्षों के समाधान के लिए सिर्फ यही रणनीति अपनाएगा।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने तेजी से समुद्री क्षमता के साथ-साथ रॉकेट और मिसाइल तथा पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करते हुए आधुनिकीकरण किया है। यह भेड़िया योद्धा कूटनीति, आक्रामक राजनीतिक मुद्रा और कानूनी युद्ध के जरिए विभिन्न अवधारणाओं को अपना रहा है। फिलहाल चीन की उपलब्धि यह है कि वह अपने विरोधियों को यह एहसास नहीं होने देगा कि वह किस प्रकार के युद्ध को अपना रहा है। भारत के साथ वह सीमा पर तनाव के पारंपरिक खतरे के साथ 5जीडब्ल्यू की मिश्रित रणनीति अपना रहा है।

हालांकि हमने विरोधियों के 4जीडब्ल्यू के प्रयासों के खिलाफ अच्छा काम किया है, लेकिन भारत में पीढ़ीगत बदलाव अभी भी शुरुआती स्तर पर हैं। भारत के कूटनीतिक समुदाय के लिए इसपर बहस करने का यही सही समय है ताकि भारत की प्रतिक्रिया तय की जा सके। इसमें सूचना क्षेत्र पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)