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के. विजय राघवन कॉलम:अधिकतम टीकाकरण से सर्दी-खांसी जैसा हो जाएगा कोरोना, जागरूकता ही अब भी बचाव है

4 महीने पहले
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के. विजय राघवन, प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर, भारत सरकार - Dainik Bhaskar
के. विजय राघवन, प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर, भारत सरकार

कोरोना ने पूरी दुनिया में कहर बरपा रखा है, जिससे स्वास्थ्य, आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल मची हुई है। महामारी के दूसरे वर्ष में, लोग आश्वासन चाहते हैं कि सबसे बुरा समय समाप्त हो गया है और जल्द ही सामान्य स्थिति बहाल हो सकती है। टीकों ने हमें और दुनिया को एक सुरक्षा का भाव दिया है। टीके अब सभी के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन सामान्य जीवन के करीब पहुंचने के लिए मास्क, दूरी व वेंटिलेशन को सख्ती अपनाना होगा।

अधिकतम लोगों के टीकाकरण के बाद महामारी सामान्य सर्दी या फ्लू जैसी बीमारी में बदल जाएगी। इस साल के अंत के आसपास पूर्ण टीकाकरण होगा। लेकिन, उससे पहले ही हम अपना सामान्य जीवन पा सकते हैं, अगर कुछ महत्वपूर्ण कोविड-उपयुक्त कदमों का पालन करें और इसमें दूसरों की भी मदद करें।

इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के हमारे रोडमैप को समाज के चार वर्गों की पूर्ण भागीदारी और नेतृत्व की आवश्यकता है। ये है, भारत सरकार, राज्य सरकारें, सोशल मीडिया सहित मीडिया और हम सभी लोग। सबसे जरूरी है कि घरों, गांवों, कस्बों, जिलों, राज्यों और पूरे देश में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता आए और हम झूठ और अफवाहों से बचे रहें।

हमारे आस-पास कुछ ही लोगों को टीका लगेगा, तो बाकी के बिना टीका वाले लोगों में वायरस को फैलने का भरपूर मौका मिलेगा। इसलिए पूर्ण टीकाकरण होना चाहिए। हमारे देश में टीकाकरण की दर में वृद्धि हुई है, यदि हम प्रतिदिन 60 लाख से अधिक खुराक की दर को जारी रखें, तो वर्ष के अंत तक या अगले वर्ष की शुरुआत में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य व्यक्ति पीछे न छूटे।

मैं दो उदाहरण देता हूं। सीएमसी, वेल्लोर ने 21 जनवरी 2021 और 30 अप्रैल 2021 के बीच अपने 84.8% कर्मचारियों का टीकाकरण किया। पूरी तरह से टीका लगाए गए कर्मचारियों में संक्रमण का जोखिम गैर-टीकाकृत कर्मचारियों की तुलना में काफी कम पाया गया। दो खुराक के साथ अस्पताल में भर्ती होना, ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता और आईसीयू में भर्ती होना कम हो गया।

संक्रमण को रोकने में टीकाकरण का सुरक्षात्मक प्रभाव 65% था। साथ ही इससे अस्पताल में भर्ती होना 77%, ऑक्सीजन की आवश्यकता 92% और आईसीयू में प्रवेश की आवश्यकता 94% कम हुई। फोर्टिस सी-डॉक सेंटर, नई दिल्ली के 123 कर्मचारियों के टीकाकरण के बाद के अध्ययन में पाया गया कि वहां संक्रमण हल्का या बिना लक्षण वाला रहा। यानी टीके काम करते हैं। हम टीकाकरण के बाद भी संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन टीका हमारी रक्षा करता है और बीमारी की गंभीरता को कम करता है।

मास्क का उपयोग, वेंटिलेशन सुनिश्चित करना और दूरी बनाए रखना जरूरी है। मास्क अच्छे से पहनने पर संक्रमण की आशंका 80% तक कम हो सकती है। अच्छा वेंटिलेशन भी संक्रमण की आशंका कम करेगा। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि उच्च गुणवत्ता वाले मास्क सभी के लिए उपलब्ध हों। साथ ही घरों और कार्यस्थलों को हवादार करने के लिए छोटे एग्जॉस्ट फैन का उपयोग किया जाए।

सभी तक वैक्सीन पहुंचाना मुख्य रूप से केंद्र और राज्य सरकार का काम है। टीके स्वीकार करना और टीका लगवाना हमारा काम है। मिलकर हम इस महामारी को समाप्त कर सकते हैं और हम अपने जीवन का पुनर्निर्माण कर सकते हैं और अपने स्वास्थ्य की देखभाल कर सकते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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