• Hindi News
  • Opinion
  • Cryptocurrency Should Be Locked By Strict Law, Many Crises Increased Due To Delay In Enforcement Of Law And Order On Crypto

विराग गुप्ता का कॉलम:सख्त कानून से क्रिप्टो करेंसी को लॉक किया जाए, क्रिप्टो पर कानून व्यवस्था लागू करने में हो रहे विलंब से बढ़े अनेक संकट

14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील - Dainik Bhaskar
विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील

तीस साल पहले अमेरिका में एमआईटी के कंप्यूटर वैज्ञानिक डेविड क्लार्क की चेतावनी अब क्रिप्टो करेंसी के संकट से सच साबित होने लगी है। टेक्नोलॉजी के दमखम और लालच की पिटारी से लैस क्रिप्टो की सुनामी के आगे भारत समेत दुनिया की सभी सरकारों का सिस्टम फेल सा दिख रहा है।

यूपीए शासन काल में रिजर्व बैंक ने क्रिप्टो के आसन्न संकट पर बैंकों, एनबीएफसी और पेमेंट सेवा कंपनियों को चेताया था, लेकिन अभी तक कानून नहीं बन पाया। लॉकडाउन की वजह से काम धंधा बंद होने से जब अर्थव्यवस्था निढाल हो गई, तब अधाधुंध रिटर्न के चक्कर में क्रिप्टो की गिरफ्त में करोड़ों लोग फंस गए और उनकी आड़ में इसके नियमन की मांग होने लगी।

बैंक से ब्याज, व्यापार, किराया और शेयर मार्केट आदि में मेहनत की कमाई पर लोगों को 4 से 15 फीसदी सालाना की आमदनी हो पाती है। लेकिन बिटकॉइन की कीमत में पिछले 11 साल में एक लाख गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है। कुछेक क्रिप्टो करेंसी में पिछले एक साल में ही 10 हजार गुना तक का रिटर्न मिला है।

भारत में रुपए का नियमन और नियंत्रण, अमेरिकी डॉलर जैसी मान्यता प्राप्त करेंसियों की तरह केन्द्रीय बैंकों के माध्यम से होता है। लीमन ब्रदर्स कांड के बाद सन 2008 में क्रिप्टो की आभासी करेंसी का उदय हुआ। इसमें मुनाफा कई अंकों में होने के बावजूद, अधिकृत जानकारी का स्तर लगभग शून्य है।

एलसाल्वाडोर और क्यूबा जैसे दो छोटे देशों की मान्यता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिप्टो के लिए कोई नियम, अथॉरिटी और सर्वर नहीं हैं। तकनीक, निवेश और स्वतंत्रता के लिहाज से क्रिप्टो की राइड रोमांचक है, लेकिन गैरकानूनी होने की वजह से इसके बड़े जोखिम हैं। मई 2021 में क्रिप्टो का मार्केट क्रैश होने से निवेशकों को 73 लाख करोड़ का चूना लगा। क्रिप्टो की कानूनी मान्यता नहीं होने से इसका इस्तेमाल डार्क नेट के माध्यम से होता है। इन खतरों के मद्देनजर ही चीन, रूस और तुर्की ने क्रिप्टो को पूरी तरह से बैन कर दिया।

क्रिप्टो के खतरनाक पहलुओं की एक बानगी कर्नाटक बिटकॉइन स्कैम से सामने आती है। 26 साल के हैकर श्रीकृष्ण रमेश ने बड़े पैमाने पर बिटकॉइन की चोरी करने के बाद सरकार को भी करोड़ों का चूना लगा दिया। ऐसे घोटालेबाजों की निगरानी करने वाली अमेरिकी सरकार की दी गई जानकारी के मुताबिक रमेश ने पुलिस, अफसरों और मंत्रियों को रिश्वत में बिटकॉइन दिया था। रमेश के तार साइबर अपराध, ड्रग्स, हवाला, मटका, सट्‌टेबाजी, काले धन और भ्रष्टाचार से जुड़े हैं।

पोर्नोग्राफी रैकेट से जुड़े शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा के खिलाफ दो हजार करोड़ से बड़े बिटकॉइन घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही है। आतंकवादियों के लिए तो क्रिप्टो एक वरदान सरीखा है। पिछले महीने संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्रिप्टो और ओटीटी पर चिंता जाहिर की थी। संविधान में अभिव्यक्ति की आज़ादी का हक है, इसलिए ओटीटी के नियमन में अनेक अड़चनें हो सकती हैं। लेकिन अनाधिकृत और गैरकानूनी क्रिप्टो को तो किसी भी कानून से संरक्षण नहीं मिल सकता।

कृषि कानूनों को सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से लागू किया था तो फिर क्रिप्टो जैसे मामलों पर विधायी विलम्ब क्यों होता है? फेसबुक के व्हिसलब्लोअर के खुलासे के अनुसार 2019 के आम चुनावों के पहले सोशल मीडिया कंपनियों ने एक संगठन के माध्यम से चुनाव आयोग को नियमों को धता बताकर स्वयंभू स्व-नियमन लागू करवा दिया था।

उसी तर्ज पर अब वही संगठन क्रिप्टो करेंसी के सेल्फ रेगुलेशन की अगुवाई कर रहा है। भारत में लॉबिइंग गैर कानूनी है। इसलिए क्रिप्टोकरंसी और विदेशी कंपनियों की सांठगांठ के फैलाव की गहन जांच हो तो डार्क-नेट के कारोबारियों का असली चेहरा उजागर होगा।

एलन मस्क जैसे पैरोकार, क्रिप्टो के तकनीकी और डिजिटल संपत्ति के आधुनिक पहलू पर जोर देते हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के अनुसार आमजन और अर्थव्यवस्था के लिए क्रिप्टो बेहद खतरनाक है। देश-विदेश में बिटकॉइन समेत सैकड़ों तरह की क्रिप्टो करेंसी चलन में हैं।

इनमें से सारी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के आधार पर काम करती है। इस तकनीक का मेडिकल साइंस, सरकारी सब्सिडी, शैक्षणिक सर्टिफिकेट और अंतरराष्ट्रीय पेमेंट समेत कई जगहों पर वैधानिक इस्तेमाल हो सकता है। लेकिन तकनीक की आड़ में गैरकानूनी क्रिप्टो को क्यों और कैसे संरक्षण दिया जा सकता है? अगर संपत्ति के लिहाज से देखें तो भी क्रिप्टो के पक्ष में दिए जा रहे तर्क खोखले हैं।

प्रॉपर्टी, जेवर, पेंटिंग, मशीन, शेयर, बांड और सरकारी करेंसी जैसी लाखों चीजों को संपत्ति माना जाता है। निवेश के मामलों में वारेन बफेट को मसीहा माना जाता है। उन्होंने किसी भी पैमाने पर क्रिप्टो को संपत्ति मानने से इनकार करते हुए इसे मरीचिका करार दिया। सिंगापुर के नियामक के अनुसार क्रिप्टो करेंसी का मूल्य अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्वों से नहीं जुड़ा, इसलिए यह खतरनाक है।

क्रिप्टो ना तो संपत्ति है और ना ही इसे कानून की मान्यता है। तो फिर क्रिप्टो के खरबों के कारोबार को इनकम टैक्स विभाग का अनुमोदन क्यों मिलना चाहिए? क्रिप्टो के कई कारोबारी तो यूनिकॉर्न का लाभ ले रहे हैं। गैरकानूनी झुग्गी वालों को भी प्रॉपर्टी बेचने के लिए कानून की मान्यता लेनी पड़ती है। लेकिन क्रिप्टो के कारोबारियों ने खुद ही नियामक और कानून बनकर, देश की सार्वभौमिकता को चुनौती दे डाली। अगर इस परंपरा को प्रश्रय मिला तो आगे चलकर हवाला, मटका, सट्‌टा, पोंजी स्कीम और खनिज माफिया के कारोबारी भी स्व-नियमन की व्यवस्था से अवैध आमदनी पर टैक्स देकर देश की प्रगति में योगदान का बड़ा दावा करेंगे।

संसद के शीत सत्र में क्रिप्टो पर बिल पेश होगा, लेकिन कानून बनाने और लागू करने में सरकार की स्थिति अजीब-सी हो गई है। भौतिक सम्पति नहीं होने पर भी निजी क्रिप्टो करेंसी को यदि संपत्ति के तौर पर वैधता प्रदान की गई तो फिर देश की सार्वभौमिकता के साथ अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर खतरे बढ़ जाएंगे। दूसरी तरफ यदि निजी क्रिप्टो बैन हुई तो करोड़ों निवेशकों का पैसा डूब सकता है।

काले धन के खात्मे के लिए नोटबंदी लागू कर दी गई थी। आम जनता की जान बचाने के लिए लॉकडाउन लगा दिया गया। तो अब देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए निजी क्रिप्टो करेंसी के कारोबार और इस्तेमाल के खिलाफ सरकार को ठोस कानून बनाकर उसे अविलम्ब लागू करना चाहिए। कुछ महीने पहले भारत में ई-रुपी डिजिटल करेंसी की लॉन्चिंग हुई थी। अब चीन की तर्ज पर भारत में भी सरकारी डिजिटल करेंसी को कानूनी वैधता प्रदान करके ब्लाकचेन टेक्नोलॉजी का देशहित में व्यापक इस्तेमाल होना चाहिए।

2021 में 73 लाख करोड़ रु. का चूना
लीमन ब्रदर्स कांड के बाद सन 2008 में क्रिप्टो की आभासी करेंसी का उदय हुआ। इसमें मुनाफा कई अंकों में होने के बावजूद, अधिकृत जानकारी का स्तर लगभग शून्य है। अल-साल्वाडोर और क्यूबा जैसे दो छोटे देशों की मान्यता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिप्टो के लिए कोई नियम, अथॉरिटी और सर्वर नहीं हैं। तकनीक, निवेश और स्वतंत्रता के लिहाज से क्रिप्टो की राइड रोमांचक है, लेकिन गैरकानूनी होने की वजह से इसके बड़े जोखिम हैं। मई 2021 में क्रिप्टो का मार्केट क्रैश होने से वैश्विक स्तर पर निवेशकों को 73 लाख करोड़ रु. का चूना लगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)