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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:हीरा मिट्टी से अपना रंग और आकार ग्रहण करता है, वैचारिक संकीर्णता मिट्टी से भी झूठ बुलवाने का प्रयास करती है

6 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

यूरोप में स्थित बेल्जियम की आबादी लगभग 1 करोड़ 25 लाख है। इनमें से 30% लोगों ने कहा है कि वे नास्तिक हैं। अनेक लोग अपने अंधविश्वास को आस्था समझने लगते हैं और कुरीतियों को परंपरा मानते हुए संस्कार कहने लगते हैं। वैचारिक संकीर्णता को घायल कर दिया गया है। बेचारी कुचले हुए सांप की तरह हो गई है, जिसके शरीर में कभी-कभी लहर उठती है।

ज्ञातव्य है कि राजनीतिक स्वतंत्रता मिलने के पश्चात संविधान बनाते समय कुछ सदस्य धर्मनिरपेक्षता को मूल अधिकार में शामिल नहीं करना चाहते थे। उन्होंने सदियों से चली आ रही है जातिप्रथा की दुहाई दी। पंडित नेहरू ने अनेक शहरों में भाषण दिया और धर्मनिरपेक्षता को संविधान में मूल अधिकार के रूप में शामिल करने के लिए एक तरह से जनमत संग्रह करके धर्मनिरपेक्षता को संविधान में उचित स्थान दिलाया। आज वही धर्मनिरपेक्षता समाज से नदारद हैं।

हीरों को केंद्र में रखकर काल्पनिक कथाएं लिखी गई हैं, फिल्में बनी हैं। भरत भाई शाह ने एक दौर में अनेक फिल्मों में पूंजी निवेश किया था। ओ.हैनरी की कथा ‘डायमंड नेकलेस’ में एक विवाहित जोड़ा आपने अमीर मित्र से हीरे का हार एक विवाह समारोह में भाग लेने के लिए उधार मांगता है। उत्सव की भागमभाग में हार चोरी चला जाता है। वे चुपचाप शहर छोड़कर चले जाते हैं।

वर्षों आधा पेट रहकर दिन-रात परिश्रम करके धन कमाते और बचाते हैं। चोरी गए हार जैसा हार खरीदकर लौटते हैं। अपने अमीर मित्र को उसकी अमानत सौंपते हैं। मित्र उन्हें बताता है कि वह हार नकली था। अगर वे उससे बात करते तो वे बरसों की मेहनत और फांकाकशी से बच जाते।

इयान फ्लेमिंग की जेम्स बांड श्रृंखला में एक फिल्म का नाम था ‘डायमंड आर फॉरएवर’। उपन्यास में हीरो के लिए खुदाई करने वाले मजदूरों की व्यथा-कथा के साथ हीरा व्यापार और उसके मूल्य निर्धारण के विषय में रोचक जानकारी भी दी गई है, जिसका उल्लेख फिल्म में नहीं है। हरीश शाह ने हीरा चोरी पर ‘शालीमार’ नामक फिल्म बनाई थी, जिसमें भारत और हॉलीवुड के कलाकारों ने अभिनय किया था।

आर.डी बर्मन ने मधुर संगीत दिया था। एक गीत में शामिल शब्द ‘झींगालाला’ लोगों की बातचीत में शामिल हो गया। हीरों की चोरी पर ‘ग्रैंड स्लैम’ नामक रोचक फिल्म के अंत में चोरी गए बहुमूल्य हीरे वहां पहुंच जाते हैं, जहां से चुराए गए थे। ‘महाभारत’ में नितीश भारद्वाज ने श्री कृष्ण की भूमिका अभिनीत की थी। उनकी पत्नी ने शोध करके ‘डायमंड्स ऑफ इंडिया’ किताब लिखी।

हीरा खरीदने वाले की कुंडली में संकेत होता है कि हीरा उसका हित या अहित करेगा। इस तरह की मान्यता उन्होंने गढ़ी है, जो बिना परिश्रम किए इस तरह की झूठी बातों से धन कमाते हैं। बहरहाल कोहिनूर पर सबसे अधिक कथाएं लिखी गई हैं। कोहिनूर आज भी ब्रिटिश संग्रहालय में सुरक्षित रखा है।

19वीं सदी में लिखा गया उपन्यास ‘मूनस्टोन’ में भारत के गुलामी के दौर में एक मूर्ति से जबरन हथियाया गया हीरा अफसर अपने साथ इंग्लैंड ले आया। उस मंदिर के पुजारी, हीरे की वापसी के लिए लंदन पहुंच जाते हैं। एक पात्र को नींद में चलने का रोग था। उसने हीरा उठा लिया और दलदल में फेंक दिया। उससे मन ही मन प्रेम करने वाली कुबड़ी सेविका ने सब देखा परंतु किसी को बताया नहीं। मंदिर के भक्तों से पुलिस ने पूछताछ की परंतु उस रात वे अपने होटल से बाहर निकले ही नहीं थे।

अगाथा क्रिस्टी का जासूस पात्र पायरो, बेल्जियम में जन्मा था। उसकी मूंछें इतनी नुकीली थीं कि मूंछों से हीरा काटा जा सकता था। हीरों के लिए धरती में खुदाई की जाती है। हीरा मिट्टी से अपना रंग और आकार ग्रहण करता है। मिट्टी का प्रभाव स्पष्ट नजर आता है। वैचारिक संकीर्णता मिट्टी से भी झूठ बुलवाने का प्रयास करती है। कबीर की पंक्तियां याद आती हैं कि ‘हीरा वहां न खोलिए, जहां कुंजड़ों की हाट।’