साधना शंकर का कॉलम:कोरोना ने डिजिटल हेल्थकेयर का दायरा बढ़ाया, धीरे-धीरे ही सही पर महामारी ने हमें इसकी ओर धकेला है

6 महीने पहले
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साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी - Dainik Bhaskar
साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी

7 अप्रैल को हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस आता है। कोविड के दौर में स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी और व्यक्तिगत दोनों की प्राथमिकताएं हो गई हैं। धीरे-धीरे ही सही पर निश्चित तौर पर महामारी ने हम सबको डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की ओर धकेला है। पिछले साल जब मुझे कोविड हुआ, तो मेरा इलाज करने वाले डॉक्टर से मैं एक भी बार नहीं मिली। उनसे मैंने वर्चुअली ही परामर्श लिया, कभी वीडियो कॉल पर तो कभी फोन पर। स्वास्थ्यकर्मी से इकलौता सामना लैब में टेस्ट के दौरान हुआ।

महामारी के दौरान दूसरी सेवाओं समेत स्वास्थ्य सेवाओं के भी ऑनलाइन इस्तेमाल में तेजी आई। महामारी से पहले तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं का विलय ई-फार्मेसी, टेलीमेडिसिन और घर पर देखभाल के माध्यम जैसे कई क्षेत्रों में बढ़ रहा था। हालांकि सेवाएं उपलब्ध कराने वालों के साथ लोग भी इसे अपनाने में पीछे थे। मरीज के साथ-साथ उसकी देखभाल करने वाले के लिए भी जीवनरक्षक के तौर पर उभर रही डिजिटल हेल्थकेयर अब अपवाद के बजाय सामान्य होती जा रही है।

महामारी से पहले हुई मोबाइल क्रांति ने इस बात को सुनिश्चित किया कि वर्चुअल हेल्थकेयर लोगों के बड़े वर्ग को सुलभ हो सके। चीन ने महामारी से पहले ही डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया और महामारी सामने आने के बाद इसका कुशलता से प्रयोग किया। महामारी रोकने के लिए शुरुआती कदम- संपर्कों को पता लगाना, टेस्ट और मामलों पर नजर, सारा कुछ डेटा पर आधारित था। जल्द ही जहां-जहां मुमकिन हो सका, मरीजों की देखभाल भी ऑनलाइन हुई।

इससे न सिर्फ स्वास्थ्यकर्मी बल्कि अस्पताल में मौजूद बाकी मरीज सुरक्षित रहे। महामारी ने डिजिटल स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया, जिससे सेवाओं में सुधार के साथ-साथ, कीमतें कम हुईं और बेहतर सेवाएं मिलीं। स्वास्थ्य क्षेत्र समाकलित बिगडेटा, एआई और रिमोट लर्निंग की ओर बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सारे पहलू तेजी से ऑनलाइन मोड पर जा रहे हैं। यहां तक कि गंभीर हालत में टेली-आईसीयू मॉडल अपनाया जा रहा है।

विशेषज्ञ दूर से रियल टाइम ऑडियो-विजुअल के जरिए आईसीयू में जुड़े रहेंगे और मरीज का इलाज करेंगे। रोजमर्रा की जिंदगी में भी हम पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरणों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी देख रहे हैं। चहलकदमी का डेटा और ऐसी कई चीजें हम ऐप से साझा करते हैं।

बेहतर रूप से रोग का पता लगाने और निदान के लिए जल्दी ही ये उपकरण कई शारीरिक मापदंडों का रियल टाइम डेटा डॉक्टर्स को देंगे। स्वास्थ्य का अपना सोशल नेटवर्क भी बढ़ रहा है, जहां एक ही तरह की स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग जानकारी साझा कर रहे हैं।

भारत में हेल्थकेयर सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है और 2025 तक इसके 370 बिलियन डॉलर पार करने की उम्मीद है। प्राथमिक उपचार की सलाह 2025 तक 15-20% वर्चुअली हो जाने और ई-फार्मेसी का बाजार 5 साल में दवाओं की कुल बिक्री का 10-12% पहुंचने का अनुमान है। वहीं टेलीमेडिसिन का बाजार 2020-25 के बीच 31% की औसत वार्षिक वृद्धि के साथ 5.5 बिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है।

हालांकि वर्चुअल हेल्थकेयर की अपनी चुनौतियां हैं। दूरदराज इलाकों का डिजिटल दुनिया से जुड़ना स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और ऑनलाइन व पारंपरिक उपचार के बीच सही तालमेल की कमी, इनमें से कुछ है। अधिकांश लोक स्वास्थ्य केंद्रों में हार्डवेयर और बैंडविथ की क्षमता बढ़ाने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। जैसे-जैसे डिजिटल हेल्थकेयर का इस्तेमाल बढ़ता जाएगा, इस क्षेत्र में डाटा की निजता का भी ख्याल रखना होगा।

वर्चुअल हेल्थकेयर का दायरा जैसे-जैसे बढ़ता जाएगा, बेहतर परिणामों के लिए मरीजों व सुविधाएं देने वालों, दोनों के लिए कई सीखें होंगी। इसका हम कैसे इस्तेमाल करते हैं और आगे बढ़ने के लिए कैसे एक-दूसरे की मदद करते हैं, यही हमारी अच्छी सेहत तय करेगा।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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