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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अनुशासन और आत्मविश्वास का नाम ईश्वर जिसे हर कोई संकल्प के साथ पा सकता है

4 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

आज का मनुष्य भाग्य का मारा और काल का प्यारा है। भाग्य और काल दोनों दिखते नहीं हैं। हमारे शास्त्रों में चार दिग्पालों की चर्चा आती है- इंद्र, वरुण, कुबेर और यम। यू कहें कि ये चारों ही संसार का संचालन करते हैं। इनमें इंद्र शीर्ष पर है, लेकिन डरा हुआ है। हर बड़े आक्रमण पर भगवान की शरण में जाना पड़ता है।

इस दौर में बड़े-बड़े सत्ताधीश भी भयभीत हो गए। उनके भीतर का इंद्र ईश्वर की शरण ढूंढ रहा है। वरुण को जल की व्यवस्था का देवता माना जाता है। आज जो व्यवस्थाएं सुदृढ़ होना थीं, वो सब पानी-पानी हो गई हैं। कुबेर संसार के सबसे बड़े धनी, देवताओं के खजांची, लेकिन रावण ने इन्हें कंगाल कर दिया था। इस समय कुबेर की गति भी समझ ही नहीं आ रही है।

कृपा, जादू, चमत्कार या तिकड़म से कुछ लोगों की दौलत खूब बढ़ गई और कुछ की बचत तक खर्च हो गई। ऐसा लगता है जैसे कुबेर भी थककर बैठ गए हों। चारों दिग्पालों में इस समय सर्वाधिक दबदबा यमराज का रहा। फुरसत ही नहीं है। पूूरा यमलोक इतना व्यस्त है कि उसी कारण भू-लोक त्रस्त है।

ध्यान रखिए, इन चारों दिग्पालों की चाबी ईश्वर के हाथ में है। तो हर बुद्धिमान आदमी इस समय उसे पकड़ ले, जिसने इन चारों को पकड़ा हुआ है। ईश्वर एक ऐसे आत्मविश्वास और अनुशासन का नाम है जिसे हर कोई संकल्प के साथ पा सकता है।