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अनुपमा चोपड़ा का कॉलम:स्टारडम में अपने मूल काम से नहीं भटकना चाहिए, अभिनय विज्ञापन से ज्यादा महत्वपूर्ण है

11 दिन पहले
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अनुपमा चोपड़ा, संपादक, FilmCompanion.in - Dainik Bhaskar
अनुपमा चोपड़ा, संपादक, FilmCompanion.in

आज कल अभिनेताओं पर बहुत सारी चीजें करने का दबाव रहता है। ‘सरदार ऊधम सिंह’ फिल्म के मुख्य किरदार विक्की कौशल से मैंने इस दबाव पर कुछ दिनों पहले बात की। यह फिल्म काफी शोधपरक है, पीरियड फिल्म है, कैरेक्टर भी बहुत डिमांडिंग है। उरी फिल्म करने के बाद आज विक्की बेहद सफल अभिनेता हैं, फिल्म करने के साथ-साथ वह पत्रिकाओं, विज्ञापन के लिए भी शूट करते हैं, ब्रांड प्रमोशन करते हैं। इस पर विक्की का जवाब थोड़ा अलग था। उन्होंने बताया कि ‘एक्शन और कट के बीच का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।

उस दौरान अगर मैं अपने काम के प्रति ईमानदार और सच्चा नहीं रहूं, तो बाकी सारा स्टारडम, विज्ञापन मेेरे लिए मायने नहीं रखता। अगर अभिनय ही सच्चा नहीं होगा, तो सबकुछ व्यर्थ है।’ विक्की कहते हैं कि ‘मैं अभिनय का सबसे ज्यादा ध्यान रखता हूं। क्योंकि बाकी चीजें उसी से आ रही हैं। अगर वो ठीक नहीं है तो बाकी चीजें ठीक नहीं रहेंगी।’

युवा अभिनेताओं के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण सबक है, क्योंकि स्टारडम के साथ आने वाली बाकी चीजों की ओर आकर्षित होना बहुत आसान है। इस इंडस्ट्री में इतना पैसा है और ग्लैमर है कि अपनी राह से भटकना बहुत आसान है। इसलिए युवा अभिनेताओं को ये ख्याल रखना चाहिए कि आपका मूल काम क्या है। विक्की कहते हैं कि उनके बारे में सोशल मीडिया पर जो भी अफवाहें होती हैं या कि अभिनय से इतर काम जैसे फोटो शूट आदि इसमें व्यवधान नहीं डाल सकते कि एक्शन और कट के बीच में आप क्या करें।

आज हमारी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेताओं को ऑफर इसी आधार पर मिलते हैं कि उनके पास कितने ब्रांड्स हैं। पर आज से 25-30 साल पहले स्थिति ऐसी नहीं थी। प्रसून जोशी ने एक वाक्या सुनाया था कि वो दिलीप साहब के पास किसी विज्ञापन का प्रस्ताव लेकर गए थे। दिलीप साहब ने इसे करने से साफ मना कर दिया था और कहा था कि हम इश्तिहारों के लिए नहीं बने हैं। हालांकि 1990 के बाद से स्थितियां बदलीं। जब शाहरुख, आमिर और सलमान आए और उन्होंने पेप्सी के एड किए। फिर अमिताभ ने भी विज्ञापन करना शुरू किया। मिड 90 के पहले अिमताभ बच्चन ने एक भी कमर्शियल नहीं किया था।

उस समय में ये मामला सुर्खियों में भी रहा। उन दिनों एक्टर्स भी बहुत चुनिंदा ब्रांड्स के लिए विज्ञापन करते थे। अगर किसी अभिनेत्री ने लक्स का विज्ञापन कर लिया तो माना जाता था कि वह ‘ए लिस्ट’ अभिनेत्री हो गई हैं। हालांकि हॉलीवुड में आज भी ऐसा नहीं है। उदाहरण के लिए हॉलीवुड के विख्यात अभिनेता ब्रैड पिट का उदाहरण लें। उनका अभिनय या काम से ही उनका कद है, विज्ञापनों से नहीं। पहले तो हॉलीवुड अभिनेता जापान जाकर ब्रांड एंडोर्स करते थे, क्योंकि उन्हें शर्म आती थी कि ये एक्टिंग नहीं है।

पर हमारी फिल्म इंडस्ट्री, खासतौर पर बॉलीवुड में ब्रांड की संख्या परसेप्शन बनाने का काम करते हैं। ब्रांड्स बताते हैं कि आप ए-लिस्टिंग स्टार हैं या कुछ और। इस बदलाव के पीछे अर्थव्यवस्था है। आज के युवाओं को लगता है कि ये हमारे बीच की ही चीज है। विज्ञापनों, ब्रांड्स को ‘बैज ऑफ ऑनर’ की तरह लिया जाने लगा है। तीन दिन के काम के कई करोड़ों रुपए मिल जाते हैं। विज्ञापनों में बहुत सारा पैसा है। इसलिए ये ट्रेंड खतरनाक भी है। नए एक्टर्स को ध्यान रखना चाहिए कि वे एक्टिंग के लिए बने हैं, मॉडलिंग के लिए नहीं।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं।)

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