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डॉ चन्द्रकांत लहारिया का कॉलम:जानकारी से ही हो सकता है बचाव; ओमिक्रॉन से बचाव में कारगर साबित होंगे यह चंद उपाय

7 दिन पहले
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डॉ चन्द्रकांत लहारिया, जाने माने महामारी विज्ञान और 
प्रिवेंटिव मेडिसिन विशेषज्ञ - Dainik Bhaskar
डॉ चन्द्रकांत लहारिया, जाने माने महामारी विज्ञान और प्रिवेंटिव मेडिसिन विशेषज्ञ

अब भारत में कोविड की तीसरी लहर आ चुकी है। कोविड का वायरस सार्स-कोव-2 बड़ा अड़ियल नजर आता है, हार मानने के लिए तैयार ही नहीं है। ऐसे में हमें वर्षों पुरानी बात का सहारा लेना होगा कि जानकारी ही बचाव है। आइए, आज उन सब बातों पर चर्चा करते हैं जो ओमिक्रॉन से बचावकारी सिद्ध होंगी। पहली बात, ओमिक्रॉन, डेल्टा की तुलना में 3 से 4 गुना तेजी से फैलता है। इसलिए इस लहर में संक्रमण से बचने के लिए कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन और भी जिम्मेदारी से करना होगा।

दूसरी बात, उपलब्ध टीके ओमिक्रॉन में भी कारगर हैं, इसलिए टीका लगवाएं। अगर तीसरे डोज़, जो दूसरा टीका लगने के नौ महीने या 39 सप्ताह बाद लगता है, के पात्र हैं तो वह भी लगवाइये। तीसरी बात, याद रखें कि टीके कोविड की गंभीर बीमारी से बचाते हैं, संक्रमण से नहीं। इसलिए टीके और मास्क दोनों जरूरी हैं। चौथी बात, इस लहर में दस में से नौ संक्रमित लोगों को कोई लक्षण नहीं आते। अगर दोनों टीके लगे हों, तो बीमारी बहुत ही मामूली होती है। लक्षणों के आधार पर डेल्टा-ओमिक्रॉन में अंतर करना मुश्किल है।

खांसी, जुकाम, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर में दर्द कोविड के आम लक्षण हैं। ओमिक्रॉन का संक्रमण होने पर नाक व गले के पिछले हिस्से में खुजली जैसी महसूस हो सकती है। बहुत अधिक पसीना आना भी ओमिक्रॉन का खास लक्षण है। सूंघने या स्वाद की क्षमता पर असर नहीं हो रहा है। फिर, अधिकतर लोग दो से तीन दिन में घर पर ही ठीक हो जाते हैं। बच्चों पर ओमिक्रॉन का कोई खास असर देखने को नहीं मिला हैं। ओमिक्रॉन हो या फिर डेल्टा, सावधानियां और इलाज दोनों में समान हैं।

जिन व्यक्तियों को लक्षण नहीं हैं, उन्हें कोविड की जांच करने की जरूरत नहीं है। कोविड के लक्षण आने पर, खास तौर से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों जैसे 60 साल से अधिक के लोग या अन्य जिन्हें कोई अन्य बीमारी है, कोविड-19 की नाक और गले के सैंपल से जांच कराना चाहिए। इसके लिए खून की जांच या सीटी स्कैन की जरूरत नहीं हैं। पॉजिटिव पाए गए लोगों को 7 दिन तक बाकी लोगों से अलग रहना, परिवार के अन्य लोगों को संक्रमण से बचाएगा। इस लहर में, अस्पतालों में भर्ती होने वालों की संख्या गिनी चुनी है।

बहुत कम को ऑक्सीजन या आईसीयू बेड की जरूरत पड़ रही है। साधारण लक्षणों वाले लोगों को भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है। तेज बुखार आने पर पेरासिटामोल की गोली ले सकते हैं और नाक बह रही है तो कोई भी जुकाम की दवा। जरूरी है कि अच्छा खाना, समय पर और पर्याप्त नींद लें। आराम करने और चिंता न करने से इम्यूनिटी मजबूत होती हैं। खूब सारा पानी अथवा अन्य तरल पदार्थ या फिर ओआरएस भी पी सकते हैं। अगर कोई भी चिंताजनक लक्षण जैसे ऑक्सीजन गिरना या सांस में दिक्कत हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

कोविड के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, प्लाज्मा थैरेपी, इवेरमेक्टिन, डॉक्सीसाइक्लिन,एज़िथ्रोमाइसिन, विटामिन सी और जिंक इत्यादि को कोई भूमिका नहीं है। ओमिक्रॉन के खिलाफ एंटीबाडी कॉकटेल काम नहीं करता है। एक नई गोली ‘मोल्नुपीरावीर’ को भारत में मंजूरी दी गई है, लेकिन जिन्हें दोनों टीके लग चुके हैं या अन्य कोई बीमारी नहीं हैं, उनके लिए ये दवा अधिक फायदेमंद नहीं। डॉक्टरों को सही दवा चुनने दें और किसी भी दवा की मांग न करें।

याद रखें, अच्छा डॉक्टर वह है, जो आपकी बात ढंग से सुने, इलाज कम से कम दवाइयों से करे और अनावश्यक जांच भी न करवाए। ओमिक्रॉन तेजी से फैलता है और उसी तेजी से कम होता है। लहर करीब 3-4 सप्ताह रहती है। अगर आपके जिले या शहर में मामले बढ़ रहे हैं, तो ऐसे में उन चार सप्ताह अधिक सावधानी आपको सुरक्षित रखेगी। खास तौर से मास्क सही तरीके से पहनें। अगर अभी सावधानी बरतेंगे तो ये लहर अगले दो महीने में खत्म हो सकती है। ‘बचाव इलाज से बेहतर है’ की बात आचरण में लाने का इससे बेहतर समय और नहीं हो सकता।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)