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डॉ चन्द्रकांत लहारिया का कॉलम:कोविड से रिकवरी के बाद भी चुनौतियां कम नहीं हैं, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की हो तैयारी

3 महीने पहले
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डॉ चन्द्रकांत लहारिया, जन नीति और स्वास्थ्य तंत्र विशेषज्ञ - Dainik Bhaskar
डॉ चन्द्रकांत लहारिया, जन नीति और स्वास्थ्य तंत्र विशेषज्ञ

भारत में कोविड-19 के मामले घट रहे हैं। महामारी की दूसरी लहर में आधिकारिक रूप से करीब दो करोड़ लोगों को संक्रमण हुआ। वास्तविक संख्या इससे कई गुना ज्यादा रही होगी। कोविड-19 के बाद ज्यादातर लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। लेकिन करीब एक चौथाई मरीजों में चार हफ्तों और हर 10 में से एक मरीज को तीन महीनों तक कुछ लक्षण बने रहते हैं। इसे पोस्ट-कोविड कहते हैं। कुछ मरीजों में 12 हफ्तों बाद भी लक्षण रह सकते हैं, उस स्थिति को लॉन्ग-कोविड कहा जाता है।

जरूरी है ठीक हो चुके लोगों को पोस्ट/लॉन्ग कोविड के लक्षण ज्ञात हों। ठीक होने के बाद खांसी, गले में दर्द, उच्च बुखार, थकान, बदन दर्द तथा मांसपेशियों के दर्द के अलावा, पोस्ट कोविड लक्षणों के दो समूह हैं: सांस संबंधी लक्षण, जिनमें सांस लेने में परेशानी और ब्लड ऑक्सीजन सैचुरशन कम होना शामिल है।

दूसरे समूह में शरीर के अन्य भाग जैसे हृदय, पेट, दिमाग, गुर्दे प्रभावित होते है। लोग हृदयगति बढ़ने, पेट खराब होने या मानसिक भ्रम आदि की शिकायत करते हैं। इन लक्षणों के आने पर चिकित्सकीय सलाह लें। कोविड से ठीक हुए हर व्यक्ति को, पहले से चल रही दिक्कत जैसे कि उच्च रक्तचाप, शुगर और हृदय संबंधी रोगों पर बेहतर नियंत्रण करना चाहिए। जिन्हें कोविड-19 हुआ था, उन्हें ठीक होने के तीन महीने बाद टीका लगवाना चाहिए।

राज्य सरकारों को पोस्ट/लॉन्ग-कोविड के लिए विशेष क्लीनिक स्थापित करने चाहिए। इससे जुड़े सभी इलाज, जांच, दवाएं लोगों के नज़दीक और मुफ्त होनी चाहिए। मेडीकल कॉलेज और जिला अस्पतालों के साथ ही ग्रामीण व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ये क्लीनिक चलाए जाने चाहिए। फिर, कोविड-19 वायरस अभी भी आसपास है।

सभी बचाव के तरीकों का पालन करें लेकिन जो गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं (जैसे बुजुर्ग) उन्हें प्राथमिकता पर टीकाकरण करवाना चाहिए। कोविड-19 की दूसरी लहर ने लोगों और परिवारों को मानसिक रूप से भी प्रभावित किया है। लोगों ने अपनों को खोया है और चुनौतियों का सामना किया है। इसने उनके मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ा है। इसलिए आने वाले समय में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत और मांग बढ़ेगी।

समय आ गया है राज्य सरकारें इन उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर विशेष ध्यान दें। सरकारों को पोस्ट/लॉन्ग कोविड और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों सुनिश्चित करना चाहिए। कोविड-19 लहर में कोविड के अलावा, अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई थीं, उन्हें फिर सुचारु करने का समय आ गया है।

यह संभव हो पाएगा जब 30,000 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह क्रियाशील बनाया जाए। साथ ही, टेली-कंसल्टेशन, समुदायों में साप्ताहिक स्वास्थ्य क्लीनिक और निजी क्षेत्र के साथ काम करना शामिल है। यह सब कोविड-19 की अगली लहर के लिए भी तैयार करेगा।

कोविड महामारी का आर्थिक पहलू भी है। दूसरी लहर में लोगों ने बीमारी पर हज़ारों रुपए खर्च किए। लोगों की बचत चली गई, कर्ज लिया और चीजें गिरवी रखीं। गरीब आर्थिक रूप से और कमज़ोर हो गए। सरकारों को ऐसे सभी परिवारों को आर्थिक सहायता देना चाहिए। कोविड-19 महामारी ने हमें एक बार फिर सिखाया है कि बीमारी का न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक (आर्थिक) प्रभाव पड़ता है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना इन सबसे बचा सकता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)