एन. रघुरामन का कॉलम:ओलिंपिक में गोल्ड पाने के लिए हर छोटा-सा असर भी मायने रखता है

4 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

इस शनिवार छह रेलवे कर्मचारियों के नाम की घोषणा हुई, जो टोक्यो ओलिंपिक्स के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा बनेंगी। इनमें पांच टीसी हैं। क्या आपको ‘चक दे इंडिया’ फिल्म याद आई? और दिल के कोने में इच्छा जागी कि ये महिलाएं रियल लाइफ में वैसे ही खेलें, जैसे रील लाइफ में वे महिलाएं खेली थीं?

यह संभव है! बेशक उन्होंने बहुत मेहनत की होगी, लेकिन इसके साथ उनकी सुविधाओं के प्रबंधन से जुड़े लोगों को भी प्रबंधन विशेषज्ञ की तरह सोचते हुए छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देना होगा जिससे टोक्यो ओलिंपिक्स की उम्मीदें और बढ़ेंगी। जैसा अभी यूके में हो रहा है। जहां हर देश की नजर ओवरगारमेंट (बाहरी कपड़े) पर है, ब्रिटेन का खेल प्राधिकरण अंडरगारमेंट्स पर ध्यान दे रहा है।

बीजिंग 2008 में माइकल फेल्प्स का फुल बॉडी स्विमसूट था, लंदन 2012 में यह ब्रिटिश सायकिलिंग टीम की मांसपेशियों गर्म करने वाले ‘हॉट पेंट्स’ थे और अब टोकियो के लिए ब्रिटेन पहले ही ‘वेपरफ्लाय’ जूतों की बात कर रहा है, जो यूके के एथलीट को थोड़ा फायदा देंगे। लेकिन ब्रिटेन की महिला खिलाड़ी ने भी एक गुप्त हथियार सीने से लगा रखा है। यह है खासतौर पर डिजाइन किए गए स्पोर्ट्स ब्रा (अंतर्वस्त्र)।

खराब फिटिंग के अंतर्वस्त्र महिलाओं के लिए समस्या पैदा करते हैं, जिससे सीने में दर्द से लेकर प्रदर्शन तक प्रभावित होता है। पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय ने शोध में पाया कि खराब सपोर्ट वाले अंतर्वस्त्र पहनकर दौड़ने वाली महिलाओं के कदम 4 सेमी तक छोटे पड़े, जो मैराथन दौड़ने में उन्हें भारी पड़ सकता है। इससे व्यायाम भी कठिन हो जाता है और शरीर के ऊपरी भाग की मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ जाती है, जिससे वे जल्दी थक सकती हैं।

अच्छे सपोर्ट वाला अंतर्वस्त्र स्वाभाविक सांस लेने में मदद करेगा। सर्वे में शामिल 70% महिला एथलीट ने कहा कि उन्हें सीने के हिस्से में और मदद चाहिए। इसलिए इंग्लिश इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (ईआईएस) ने अंडरवियर बनाने वाली कंपनी ‘क्लोवर’ के साथ 15 खेलों के 100 ब्रिटिश एथलीट के लिए ‘फिट स्पोर्ट्स ब्रा’ बनाई हैं।

ये अंडरगारमेंट रोविंग (नौका दोड़) और पैरालिंपिक शूटिंग प्रतियोगिता में महत्वपूर्ण होंगी क्योंकि अगर पतवार सीने से लगती है तो प्रतियोगी को कुछ मिलीसेकंड का नुकसान हो सकता है और एक शूटर के लिए एक-एक मिलीमीटर की सूक्ष्मता जरूरी है। ऐसे अंडरगारमेंट तेज हृदयगति से राइफल में होने वाले छोटी से छोटी हलचल रोकते हैं।

दुनियाभर में आम स्पोर्ट्स किट में कई नवाचार हुए, लेकिन अंडरगारमेंट्स पर कम ध्यान दिया गया है। साथ ही कोई भी स्पोर्ट्स किट का आइडिया पुरुषों के खेल से शुरू होता है, फिर महिलाओं के लिए अपनाते हैं। ऐसा नहीं होता कि महिला एथलीट को ध्यान में रखकर शुरुआत से इसे बनाया जाए।

मैदानी एथलीट, जैसे हॉकी खिलाड़ी अक्सर हार्ट रेट मॉनीटर, जीपीएस ट्रैकर या अन्य स्मार्ट डिवाइस पहनते हैं। क्लोवर के अंतर्वस्त्र में ऐसे ट्रैकिंग डिवाइस के लिए जेब है। यूके की महिला एथलीट्स को 23 जुलाई से शुरू हो रहे ओलिंपिक्स के लिए नए अतंर्वस्त्र मिल चुके हैं।

सीनियर स्पोर्ट्स फिजिशियन और ईआईएस में फीमेल एथलीट हेल्थ की को-लीड अनिता बिस्वास मानती हैं कि ‘सिर्फ अंतर्वस्त्रों से ही सबकुछ नहीं होगा, हर एथलीट की पिछले चार वर्षों की तैयार भी मायने रखती है लेकिन ऐसे छोटे-छोटे आरामों का थोड़ा असर पड़ता ही है।’ फंडा यह है कि ओलिंपिक में गोल्ड पाने के लिए हर छोटा-सा असर भी मायने रखता है। अगर आप वैश्विक इवेंट में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं तो एक कदम आगे रहकर जीतने के लिए छोटी से छोटी चीज पर ध्यान दें।

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