जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:किसान कथा कहती फिल्में व साहित्यकारों की रचनाएं

17 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

अमेरिका में जन्मी पर्ल एस बक ने चीन के किसानों की व्यथा कथा ‘मदर अर्थ’ लिखी। अमेरिका के खेतों में काम करने के लिए अश्वेत मजदूरों पर जुल्म ढाए गए। अब्राहम लिंकन ने समानता के लिए संघर्ष किया। मामूली चरित्र भूमिकाएं करने वाले अभिनेता ने अब्राहम लिंकन पर कातिलाना हमला किया। संभवत: उस चरित्र अभिनेता का अभिनय के लिए किया गया यह सर्वश्रेष्ठ प्रयास रहा हो। फिदेल कास्त्रो की हत्या के प्रयास अनेक बार किए गए। रोम का इतिहास इस तरह की हत्याओं से भरा पड़ा है। जॉन एफ कैनेडी और उनके भाई की भी हत्या की गई।

जॉन विल्क्स बूथ कई बार यह कह चुका था कि एक दिन वह अब्राहम लिंकन की हत्या करेगा। उसकी इस बात को एक शराबी की बड़बड़ ही माना गया। यहां तक कि जॉन एफ कैनेडी के पोस्टर दीवारों पर लगाए गए और उसे अपराधी घोषित किया गया। ‘फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ ने इसे क्यों अनदेखा किया। यह आज भी रहस्य ही है।

यह माना जाता है कि राजनैतिक हत्याओं से इतिहास नहीं बदलता परंतु पत्रकार लेखक कार्ल सिफाकिस की ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ एसैसिनेशन’ बहुत बड़ी संख्या में बिकी है। शेक्सपीयर के त्रासदी नाटक ‘जूलियस सीजर’ में एंटोनी का वक्तव्य यादगार माना जाता है। एंटोनी कहता है- ‘रोम के नागरिकों मेरी बात सुनो, मैं सीजर का दाह संस्कार करने आया हूं ना कि उसकी प्रशंसा करने के लिए। मनुष्य की मृत्यु के उपरांत उसके गुण तो प्रायः समाप्त हो जाते हैं पर अवगुण बहुत समय तक कायम रहते हैं।

मार्कस ब्रूटस ने आपसे कहा कि सीजर महत्वाकांक्षी था। ब्रूटस की आज्ञा से ही सीजर की दाह क्रिया के बारे में मैं कुछ कहने आया हूं। अनेक देशों से बंदियों को पकड़ कर रोम लाया गया था। जिनके लिए शत्रु द्वारा चुकाए गए धन से रोम का सार्वजनिक धन कोष समृद्ध हुआ है। क्या यही सीजर की महत्वाकांक्षा थी? कौन नहीं जानता की दुखी लोगों की पुकार सुनकर सीजर रोता था।

आप सब ने देखा कि लुपेर्केलिया उत्सव में तीन बार मैंने सीजर को ताज दिया परंतु तीनों बार उसने ताज अस्वीकार कर दिया। मेरी वेदना के लिए मुझे क्षमा करिए क्योंकि मेरा ह्रदय उस कफन में सीजर के पास पहुंच गया है।’ इस वक्तव्य ने नागरिकों की विचार प्रक्रिया में परिवर्तन ला दिया। किसान की व्यथा पर मुंशी प्रेमचंद ने बहुत कुछ लिखा है।

अगर प्रेमचंद साहित्य का अंग्रेजी में अनुवाद होता या वह अंग्रेजी में लिखते तो उन्हें नोबेल प्राइज जरूर मिल जाता। सआदत हसन मंटो की लिखी ‘किसान कन्या’, महबूब खान की ‘औरत’ और ‘मदर इंडिया’ से पहले रची गई कृति है। इनमें से किसान कथा ‘मदर इंडिया’ को सबसे अधिक भारतीय दर्शकों ने देखा है।

बिमल रॉय की महान फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ के लिए शैलेंद्र का लिखा गीत है- ‘धरती कहे पुकार के बीज बिछा ले प्यार के...मौसम बीता जाए’। इस फिल्म का अन्य गीत है- ‘हरियाला सावन ढोल बजाता आया...धिन तक तक मन के मोर नाचता आया...मिट्टी में जान जगाता आया...’ ज्ञातव्य है कि मुंशी प्रेमचंद की दो बैलों की कथा से प्रेरित फिल्म ‘हीरा मोती’ जेटली नामक फिल्मकार ने बनाई थी।

इकबाल की रचना है-‘जिस खेत से दहक़ां को मयस्सर नहीं रोजी, उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो’ ज्ञातव्य है कि फ्रांस में हुई क्रांति मजदूरों और किसानों ने मिलकर की थी। उसी क्रांति से आजादी, भाईचारा और समानता का महान आदर्श प्रस्तुत हुआ। मैडम तुसाद की आत्मकथा में फ्रांस की क्रांति का विवरण प्रस्तुत हुआ है।

अकिरा कुरोसावा की ‘सेवन समुराई’ के अंत में एक योद्धा को अन्याय के खिलाफ लड़ते समय एक किसान कन्या से प्रेम हो जाता है। योद्धा अपनी प्रेमिका को साथ चलने के लिए कहता है। वह महिला हाथ छुड़ाकर अपने खेत की ओर जाते हुए कहती है कि यह बीज बोने का मौसम है। फणीश्वरनाथ रेणु की ‘तीसरी कसम’ प्रेरित फिल्म शैलेंद्र ने बनाई। शैलेंद्र, रेणु की ‘मैला आंचल’ और ‘परती परिकथा’ पर भी फिल्में बनाना चाहते थे। यह दोनों उपन्यास किसान व्यथा ही प्रस्तुत करते हैं।

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