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थाॅमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:इजरायल-फिलिस्तीन के संघर्ष में बाइडेन के लिए पांच उपाय, पूरी दुनिया के लिए अहम मुद्दा

2 महीने पहले
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थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार - Dainik Bhaskar
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन की इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष की मध्यस्थता में न पड़ने की इच्छा पर मुझे सहानुभूति है। लेकिन इजरायल और हमास के बीच चले झगड़े से मुझे यह स्पष्ट है कि जब तक हम द्विराष्ट्र समाधान की क्षमता संरक्षित नहीं करते, एक-राज्य की वास्तविकता न सिर्फ इजरायल, वेस्ट बैंक और गाजा को खत्म कर देगी, बल्कि यह डेमोक्रेटिक पार्टी और अमेरिका के हर यहूदी संगठन तथा यहूदी पूजागृहों को नुकसान पहुंचाएगी। हालात बदतर हों, इससे पहले अमेरिका ये पांच कदम उठा सकता है।

पहला, बाइडेन को अमेरिका-फिलिस्तीन संबंधों को दोबारा आकार देने के लिए रामल्लाह में फिलिस्तीन सरकार के हेडक्वार्टर के पास फिलिस्तीन प्राधिकरण (पीए) के लिए राजनयिक मिशन शुरू करना चाहिए। साथ ही उन्हें पीए के राजनयिक प्रतिनिधि को वाशिंगटन आमंत्रित करना चाहिए, जिसे भविष्य के फिलिस्तीन राष्ट्र के संभावित राजदूत की तरह देखा जाए। सिर्फ पूर्वी येरुशलम ही नहीं, रामल्लाह में भी राजनयिक मिशन खोलकर बाइडेन ट्रम्प द्वारा एक एम्बेसी रखने की गलती सुधार लेंगे।

दूसरी, बाइडेन को ट्रम्प की योजना के साथ शांति पर बातचीत का प्रस्ताव देना चाहिए। मोटे तौर पर यह प्रस्तावित किया गया था कि इज़रायल को वेस्ट बैंक का 30 प्रतिशत और फिलिस्तीनियों को 70 प्रतिशत मिलेगा, साथ ही भूमि की अदला-बदली होगी। यरुशलम के बाहर फिलिस्तीनियों की राजधानी होगी। यह योजना हास्यास्पद रूप से इजरायल के पक्ष में एकतरफा थी, और फिलिस्तीनियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। लेकिन नेतन्याहू ने इसे स्वीकार कर बातचीत के अंत की जगह, प्रभावशाली शुरुआती बिंदु बना दिया।

तीसरी, अमेरिका 6 अरब राष्ट्रों (बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को, सूडान, यूएई) को इजरायल से संबंध सामान्य करने और साथ ही अपने दूतावास तेल अवीव से पश्चिम येरुशलम ले जाने के लिए प्रोत्सहित करें, जिसे सभी देश इजरायल का हिस्सा मानते हैं। इससे इजरायली खुश होंगे। बाइडेन इन राष्ट्रों को आरंभिक फिलिस्तीन राज्य के रामल्लाह में अमेरिकी की तरह दूतावास खोलने के लिए प्रेरित करें। इससे द्विराष्ट्र वास्तविकता मजबूती होगी और इजरायल के लिए इसका विरोध मुश्किल होगा।

चौथा, अमेरिका इन अरब देशों को प्रोत्साहित करे कि वे फिलिस्तीनी प्राधिकरण को दिया जा रहा अपना वित्तीय समर्थन व्यापक रूप से बढ़ाएं और केवल पीए के माध्यम से आने वाली सहायता पर गाजा के लिए सशर्त मदद करें। वे ऐसा न सीधे हमास के लिए करें और न ही संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से करें।

जब तक नेतन्याहू व अब्बास अपनी-अपनी इकाइयों का नेतृत्व कर रहे हैं, तब तक द्विराष्ट्र समझौते के समापन की संभावनाएं दूर हैं। लेकिन कम से कम यह प्रयास आगे जाकर एक की संभावना को संरक्षित करेंगे। आज, यह पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है, न सिर्फ इजरायली-फिलिस्तीनियों के लिए, बल्कि कई अमेरिकियों और डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों, यहूदी दुनिया और खुद बाइडेन के लिए भी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)