पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:दुर्गुणों को पराजित करना हो तो इसके जितने साधन हैं, उनमें से एक है हनुमान चालीसा

15 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

छुपे हुए सूरज को बुझा हुआ मान लेना बहुत बड़ी गलती है। रावण ने श्रीराम को केवल एक वनवासी मानकर यही किया था। अपने अहंकार के कारण उसने मनुष्यों का मूल्यांकन गलत ढंग से करना शुरू कर दिया था। देवी भागवत में तपस्विनी वेदवती की कथा आती है। एक बार कठोर तप करते समय रावण ने उसका शील भंग करने का प्रयास किया था।

आहत होकर उसने तो शरीर त्याग दिया, पर शाप दे गई थी कि तेरी मृत्यु का कारण एक स्त्री बनेगी। रावण को यह शाप अपनी शक्ति के दुरुपयोग का परिणाम था। आज नवरात्र के समापन पर संकल्प लेना चाहिए कि रावण जैसी भूल हम नहीं करेंगे। ध्यान रखना है विजयादशमी का दिन जब रावण के जीवन में आ गया तो हम कैसे बच सकेंगे। इसलिए प्रयास करें राम जीवन में आएं, लेकिन हम रावण न बन जाएं।

अपनी शक्ति का सदुपयोग करना हो, दुर्गुणों को पराजित करना हो तो इसके जितने साधन हैं, उनमें से एक है हनुमान चालीसा। हनुमान चालीसा के करोड़ों जप का अनूठा कार्यक्रम आज शाम 7 बजे से जयपुर में होगा, जिसका सीधा प्रसारण टीवी तथा अन्य डिजिटल माध्यमों से किया जाएगा। मैं स्वयं व्याख्यान के माध्यम से बताने का प्रयास करूंगा कैसे अनाहत चक्र पर अपनी ऊर्जा का उपयोग कर दुर्गुणों को जीत सकते हैं। शक्ति के सदुपयोग को समझना हो तो इस कार्यक्रम से अवश्य जुड़िएगा।