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थाॅमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:ऊंची दीवार-बड़ा दरवाजा ही अमेरिका राष्ट्रपति बाइडेन के लिए सही स्थिति, इससे अवैध प्रवासन रोका जा सकता है

2 वर्ष पहले
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थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड
विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार - Dainik Bhaskar
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार

हाल ही में अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर गैरकानूनी प्रवासन में तेजी दिखी। इसे देखते हुए मुझे स्पष्ट नहीं है कि इसमें से कितना मौसमी है, कितना ट्रम्प द्वारा शुरू ही गई दीवार के निर्माण को रोकने की राष्ट्रपति बाइडेन की घोषणा और शरणार्थी नीतियों की समीक्षा के कारण है और कितना तेजी से टीकाकरण करवा रहे अमेरिका में नौकरी के लालच के कारण है।

लेकिन केवल मार्च में ही प्रवासियों और शरण मांगने वालों की 1,70,000 की संख्या देखकर मेरा यह मत मजबूत हुआ है कि बड़े दरवाजे के साथ ऊंची दीवार ही सही सीमा नीति है। अगर हम ऊंची दीवार पर जोर देंगे और ट्रम्प की तरह निर्दयता का तमगा पहन लेंगे तो प्रवासन के लाभ से चूक जाएंगे। लेकिन हम सिर्फ दीवार की बुराइयों पर ध्यान देंगे और बड़े दरवाजे के सिद्धांत, यानी प्रवासियों को कानूनी प्रवेश देने को नजरअंदाज करेंगे, तो भी हमें प्रवासन के लाभ नहीं मिल पाएंगे।

क्यों? क्योंकि कई अमेरिकी सोचेंगे कि सीमा खुली व अनियंत्रित है और वे ऐसे नेता चुनेंगे जो प्रवासन को रोक दें, जो हमारे देश की जीवन शक्ति है। मध्यावधि चुनावों में अनियंत्रित सीमा तो जैसे ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के लिए वरदान की तरह होगी। हाल ही में हुआ एबीसी न्यूज/इपसोस पोल बताता है कि 57% अमेरिकी बाइडेन द्वारा सीमा संभालने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं।

ऊंची दीवार-बड़ा दरवाजा ही बाइडेन के लिए सही स्थिति है, जिससे अवैध प्रवासन रोका जा सकता है। बाइडेन के लिए यह आसान नहीं होगा क्योंकि प्रवासियों का नियंत्रित आगमन कभी इतना जरूरी नहीं रहा, जितना अभी है। अवैध प्रवासियों को लाने वाली ताकतें भी कभी इतनी शक्तिशाली नहीं थीं। वे ताकतें बढ़ रही हैं क्योंकि आज जीवनक्षम देश बनना मुश्किल है। आज कोई महाशक्ति आपके देश को छूना नहीं चाहती क्योंकि इससे उनका सिर्फ खर्च बढ़ेगा।

चीन विश्व व्यापार संघ में है, इसलिए कम वेतन वाले उद्योंगों में प्रतिस्पर्धा मुश्किल है। आबादियां बढ़ गई हैं। जलवायु परिवर्तन छोटे किसानों को तोड़ रहा है, इसलिए वे अपनी जमीन छोड़ रहे हैं। स्मार्टफोन पर मानव तस्करी करने वाले से जुड़ना आसान हो गया है। नतीजा: कमजोर देश टूट रहे हैं, उनमें अव्यवस्था वाले क्षेत्र बन रहे हैं, जिससे लाखों लोग व्यवस्था वाले क्षेत्रों में जाना चाहते हैं। जैसे लैटिन अमरिका, अफ्रीका, मध्य पूर्व व दक्षिण एशिया से अमेरिका और यूरोप में। महामारी नेे स्थिति बदतर कर दी है।

आगे स्थितियां और चुनौतीपूर्ण होंगी। वास्तव में जहां इस पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है कि बहुत से बच्चे अकेले सीमा पार से आ रहे हैं, द वॉल स्ट्रीट जरनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रवासन में मौजूदा तेजी में बड़ा हिस्सा अकेले वयस्कों का है। ये ज्यादातर मेक्सिकन हैं, जो महामारी के कम होने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संभावित बूम को देखकर काम की तलाश में आ रहे हैं। उचित सीमा नियंत्रण और कमजोर देशों की स्थिरता में निवेश के बिना अमेरिका और यूरोपीय संघ प्रवासन ही ऐसी कई लहरें देखते रहेंगे।

इधर हम चीन के साथ शीत युद्ध का उदय होते देख रहे हैं, जिसमें आर्थिक और सैन्य, दोनों युद्धभूमियां टेक्नोलॉजी के आसपास ही होंगी। इस प्रतिस्पर्धा में दोनों देश ज्यादा से ज्यादा दिमागी हुनर, पेटेंट और स्टार्टअप का लाभ उठाना चाहेंगे। लेकिन दिमाग तो दुनिया में बराबर बंटा है। अमेरिका के पास अवसर यह है कि उसने प्रवासन और अपने मुक्त विश्वविद्यालयों के जरिए किसी भी देश की तुलना में ज्यादा होशियार लोगों, महत्वाकांक्षी कामगारों और नई कंपनी शुरू करने के इच्छुकों को आकर्षित किया है।

स्टीव जॉब्स के जैविक पिता सीरिया से बतौर छात्र आए थे और नतीजा था ‘एपल’। सर्गी ब्रिन का परिवार रूस से आया और नतीजा था ‘गूगल’। लेकिन यह सफलता का फार्मूला नहीं है। क्योंकि जर्मनी जैसे अन्य देशों ने भी ऐसी स्थिति का लाभ उठाया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)