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डॉ. भारत अग्रवाल का कॉलम:गृह मंत्रालय पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान और चीन की शत्रु संपत्तियों को संभालने के लिए तैयार, देश में ऐसी संपत्तियां 12 हजार 426

7 महीने पहले
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डॉ. भारत अग्रवाल - Dainik Bhaskar
डॉ. भारत अग्रवाल

शत्रु संपत्तियों पर निगाह
विधानसभा चुनाव के बाद गृह मंत्रालय पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान और चीन की शत्रु संपत्तियों को संभालने के लिए तैयार है। वास्तव में अमित शाह सिर्फ पश्चिम बंगाल नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए ऐसे निर्देश दे चुके हैं। पश्चिम बंगाल में पाकिस्तानी नागरिकों की छोड़ी दो हजार 735 संपत्तियां हैं। चीनी नागरिकों की 29 हैं।

शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 प्रभाव में है और सरकार ऐसे में कार्रवाई कर सकती है। अमित शाह के नेतृत्व में मंत्रियों का एक समूह इस पर सक्रिय है। पूरे देश में कुल शत्रु संपत्तियां 12 हजार 426 हैं। इनका कुल मूल्य 1 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। सोना-चांदी भी जब्त किया गया है। सवाल है कि इसका उपयोग कैसे किया जाए?

सारी मेहनत पीएम की
प्रधानमंत्री के भाषण का जो भी कार्यक्रम हमारी नजरों में आता है, वास्तव में उसके लिए उन्होंने बहुत भारी भरकम होमवर्क किया होता है। शायद आम लोग भी यह बात जानते हैं। लेकिन अब पश्चिम बंगाल में मोदी के ब्रिगेड रैली वाले भाषण के बाद यह सवाल किया जा रहा है कि मोदीजी के पश्चिम बंगाल के भाषणों और कार्यक्रमों के पीछे किसकी सलाह काम कर रही है। चर्चा यह है कि इनके पीछे कोई एक सलाहकार नहीं है।

पश्चिम बंगाल के लिए प्रधानमंत्री कई स्रोतों से जानकारी जुटाते हैं। इसमें बंगाल के भी कुछ लोग हैं। देबाश्री मुखर्जी संयुक्त सचिव हैं और जल स्वच्छता, शहरी गरीबी पर्यावरण मुद्दों की विशेषज्ञ हैं। पीएम ने उनसे जानकारी ली। इसी तरह उन्होंने बिबेक देबरॉय और स्वपन दासगुप्ता से भी सलाह की है। पश्चिम बंगाल मूल के या पश्चिम बंगाल कैडर के दिल्ली में नियुक्त कुछ अधिकारियों ने सलाह दी है और कोलकाता से कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री को सलाह दी है। यही स्थिति बीजेपी की राज्य इकाई की और सिसिर बाजोरिया जैसे उद्योगपतियों और रामकृष्ण मिशन के कुछ भिक्षुओं की भी है।

मांगा, तो क्यों मांगा !
कहा जाता है कि बिन मांगे मोती मिले और इस कहावत में दम है। पश्चिम बंगाल में जिन्होंने टिकट नहीं मांगा उन्हें टिकट मिल गया। लेकिन जिन्होंने टिकट मांगा उनका क्या हुआ? उत्तर है कहावत की अगली लाइन में, अर्थात मांगे मिले न भीख। शिखा मित्रा और तरुण साह को बीजेपी ने टिकट दे दिया। दोनों का दावा है कि इन्होंने टिकट मांगा ही नहीं था। लेकिन टिकट मांगने वाले सोवन सरकार को टिकट नहीं मिला। कहानी में एक और पहलू है कि जिन्होंने टिकट मांगा और मिला उनका टिकट काट कर किसी और को देना पड़ा। जैसे अशोक लाहिरी।

टिकट छत्तीसी
अब देखिए 91 साल के ओ. राजगोपाल का टिकट काट दिया गया। वह केरल में बीजेपी के टिकट पर चुने जाने वाले पहले विधायक रहे हैं और पिछले विधानसभा में चुनकर आए थे। जब उन्हे कहा गया कि उम्र की वजह से टिकट कटा तो उन्होंने पलट कर पूछा कि श्रीधरन की उम्र कितनी है? उत्तर मिला आप से उम्र में पूरे छत्तीस महीने छोटे हैं और आपका उनसे छत्तीस का आंकड़ा भी नहीं है।

अरे भई, नक्शा तो देख लेते
एक और कहावत है - पसीने छूटना। भाजपा के दो नेता पुद्दुचेरी में पार्टी के चुनाव अभियान में सहयोग के लिए भेजे गए हैं। लेकिन अब उनके पसीने छूट रहे हैं। वजह है सामान्य ज्ञान की कमी। दोनों यह सोच कर गए थे कि पुद्दुचेरी बहुत छोटा राज्य है। आखिर सिर्फ 30 विधानसभा घूमना कौन सी बड़ी बात है। सो दोनों पहुंच गए पुद्दुचेरी।

अब पुद्दुचेरी का एक जिला है माहे और दूसरा है यानम। गाड़ी पर बैठकर जब एक नेताजी ने ड्राइवर से यानम ले चलने के लिए बोला तो उन्हें बताया गया कि वह विशाखापत्तनम के पास है और दूरी 800 किलोमीटर से ज्यादा है। दूसरे साहब को भी बताया गया कि माहे भी 600 किलोमीटर से ज्यादा दूर है और केरल के कोझीकोड के पास है।

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